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    मधुमक्खी पालन : शहद बेचकर प्रति वर्ष 10 लाख रुपये की कर रहे आय, प्रयागराज के 200 किसान इस व्यवसाय से जुड़े

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Mon, 18 May 2026 04:51 PM (IST)

    प्रयागराज के आलोक कुमार मौर्य ने मधुमक्खी पालन के माध्यम से सैकड़ों किसानों के जीवन को समृद्ध किया है। उनके द्वारा उत्पादित शहद का अमेरिका, ऑस्ट्रेलिय ...और पढ़ें

    प्रयागराज में मधुमक्खी पालन के लिए लगाए गए बाक्स। जागरण

    प्रयागराज में मधुमक्खी पालन के लिए लगाए गए बाक्स। जागरण

    HighLights

    1. अमेरिका, आस्ट्रेलिया, यूरोप व सऊदी अरब तक कर रहे शहद का निर्यात

    2. संगम नगरी के आलोक ने सैकड़ों के किसानों के जीवन को बनाया समृद्ध

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। संगमनगरी के किसानों ने देश-विदेश तक शहद की मिठास पहुंचा दी है। दो दशक पहले तक यहां सिर्फ 15-20 कृषक मधुमक्खी पालन से जुड़े थे। किसान आलोक कुमार मौर्य ने इस क्षेत्र में समृद्धि की कहानी लिखी, बल्कि 40 अन्य युवाओं को रोजगार दिया। उनकी सफलता ने दूसरे किसानों को राह दिखाई और अब पूरे जिले में करीब 200 किसान शहद का उत्पादन कर रहे हैं।

    मधुमक्खी पालन ने किया समृद्ध

    झूंसी के शेरडीह निवासी आलोक वर्मा के पास करीब चार बीघा खेत है। आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के साथ वह कुछ और भी करना चाह रहे थे। इसमें मधुमक्खी पालन को चुना। स्नातक करने के बाद लुधियाना से प्रशिक्षण लिया और काम शुरू कर दिया। आलोक बताते हैं कि जैसे-जैसे समय बीता, वैसे-वैसे काम बढ़ता गया। अब वह करीब 500 बाक्स लगाते हैं। इससे हर साल लगभग 10 लाख की आमदनी हो जाती है।

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    विदेश तक शहद की मिठास

    इनके शहद का अमेरिका, आस्ट्रेलिया, यूरोप, सऊदी अरब समेत दूसरे देशों में भी निर्यात हो रहा है। आलोक की कामयाबी दूसरे किसानों के लिए नजीर बनी। अन्य किसान भी इस व्यवसाय से जुड़ने लगे। पहले बहादुरपुर सहित जिले के कुछ हिस्से में ही मधुमक्खी पालन होता था। अब बहरिया, कोरांव, शंकरगढ़, करछना, सोरांव समेत हर ब्लाक में शहद उत्पादन हो रहा है। 

    कई जनपदों के किसान ले रहे प्रशिक्षण

    आलोक कुमार मौर्य वर्ष 2006 से दूसरे किसानों को प्रशिक्षण दे रहे है। पहले उद्यान विभाग के साथ मिलकर काम करते थे। वर्ष 2017 के बाद हनी मिशन से जुड़ गए। हर साल चित्रकूट, मीरजापुर, प्रतापगढ़, भदोही सहित अन्य जनपदों के करीब 300 से 400 किसानों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। 

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    चार महीने का होता है सीजन

    शहद उत्पादन का सीजन नवंबर से लेकर फरवरी तक ही होता है। मार्च से लेकर अक्टूबर तक सिर्फ मधुमक्खियों का पालन होता है। इस आउट सीजन में एक बाक्स की देखरेख में करीब एक हजार रुपये खर्च होते हैं। सीजन के चार महीने में उसी एक बाक्स से करीब चार हजार रुपये कीमत के शहद का उत्पादन होता है।

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