प्रयागराज के 48 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली नुमैया डाही झील की बदलेगी सूरत, होगा सुंदरीकरण और लगेगी एसटीपी
प्रयागराज की 48 हेक्टेयर में फैली नुमैया डाही झील का नमामि गंगे योजना के तहत सुंदरीकरण किया जाएगा और गंदे पानी के शोधन के लिए एसटीपी लगेगी। यह वेटलैंड ...और पढ़ें

प्रयागराज की नुमाया डाही झील की आर्द्रभूमि पर लगा वन विभाग का बोर्ड। जागरण
HighLights
शहर पश्चिमी क्षेत्र में स्थित इस झील को घोषित किया जा चुका है वेटलैंड वन
रावतपुर के पास झील के पास बनाया गया है वाच टावर, होता है मत्स्य पालन
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। शहर पश्चिमी क्षेत्र में यमुना नदी के पास स्थित नुमैया डाही झील (खेड़ुवा ताल) का अब सुंदरीकरण कराया जाएगा। इसमें जाने वाले नालों के पानी के शोधन के लिए एसटीपी स्थापित की जाएगी। लगभग 48 हेक्टेयर में फैली यह झील पर्यावरण, स्थानीय मछुआरों और प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक जगह है। इसे नमामि गंगे योजना के तहत वेटलैंड वन भी घोषित किया जा चुका है।
नमामि गंगे के तहत एनएमसीजी करेगा पुनर्स्थापन
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) इस महत्वपूर्ण जलवायु क्षेत्र का पुनर्स्थापन कर रहा है और गंगा बेसिन में वैज्ञानिक मूल्यांकन के माध्यम से पहचाने गए अन्य उच्च प्राथमिकता वाले जलवायु क्षेत्रों के संरक्षण प्रयासों का विस्तार करने की योजना बना रहा है। इसके तहत ही सभी कार्य कराने के प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं।
खास-खास
- 48 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली है यह झील, चार गांवों की सीमा है इसके चारो ओर
- 2 किमी दूर है यमुना नदी से यह झील, कमलगट्टा की खेती को दिया गया पट्टा
झील की भूमि का चिह्नीकरण कर पिलर लगाए गए हैं
यह झील प्रयागराज में करेहदा, जलालपुर और लखनपुर के पास स्थित है। यह जगह कई मछलियों का प्रजनन केंद्र है और ठंड के मौसम में यहां बहुत सारे प्रवासी पक्षी आते हैं। यह गंदे पानी को साफ करती है और बाढ़ को रोकती है। गंगा बेसिन के तहत इस झील को बचाने के लिए विशेष काम किए जाएंगे। वैसे वन विभाग की ओर से कई कार्य कराए जा चुके हैं। डीएफओ अरविंद कुमार यादव ने बताया कि यहां वाच टावर और स्टाफ के रहने के लिए कैंप कार्यालय बनाया गया है। झील की भूमि का चिह्नीकरण कर पिलर लगा दिए गए हैं।
झील के सुंदरीकरण को बनेगी कमेटी
एडीएम नमामि गंगे संजीव शाक्य ने बताया कि इस झील के सुंदरीकरण के लिए कई विभागों की कमेटी बनाई जाएगी, जिसके अधिकारी प्रस्ताव तैयार करेंगे। वहीं गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक सुरेंद्र सिंह परमार का कहना है कि गंदे पानी को शोधित करने के लिए एसटीपी स्थापित कराई जाएगी।
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झील के किनारे पिकनिक स्पॉट होगा
डीएफओ ने बताया कि झील में प्लास्टिक व अन्य कचरा तथा गंदगी न जाने पाए, इसके लिए प्रयास करने होंगे। जलकुंभी की सफाई कराने से झील अपने स्वरूप में लौट सकेगी। सुंदरीकरण के तहत किनारे पर पाथवे निर्माण, बेंच, छायादार शेड, लाइटिंग, बच्चों के झूले व पिकनिक स्पाट बनाया जा सकता है। कुछ नावें भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।