बच्चों से मोबाइल की लत छुड़ाने में बड़े काम का फार्मूला 'स्क्रीन कर्फ्यू', प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल की पहल
प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल ने बच्चों में मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए 'स्क्रीन कर्फ्यू' फार्मूला अपनाया है। इसके तहत 150 बच्चों पर सफल प्रयोग किया गय ...और पढ़ें

प्रयागराज में कॉल्विन अस्पताल के मनोरोग विभाग ने स्क्रीन कर्फ्यू के तहत कई बच्चों में मोबाइल का लत छुड़वाया।
HighLights
कॉल्विन अस्पताल के मनोरोग विभाग ने 150 बच्चों पर किया सफल प्रयोग
150 बच्चों पर सफल प्रयोग, पढ़ाई में आया सुधार।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से जिनके बच्चे शिक्षा और संस्कार से दूर हो रहे हैं उनके लिए 'स्क्रीन कर्फ्यू' फार्मूला बड़े काम का है। पहल हुई है मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय 'काल्विन' के मनोरोग विभाग में। इसमें कुछ शर्तों के साथ 150 बच्चों और किशोरों को शामिल किया गया, इसमें सूर्यास्त के बाद मोबाइल न देखने की प्रेरणा दी गई। छह महीने तक सभी ने शर्तों का पालन किया।
मनोचिकित्सक ने काउंसिलिंग, अभिभावकों ने प्रेरित किया
मनोचिकित्सक ने काउंसलिंग के साथ ही मोबाइल से कुछ हद तक दूरी बनाने का तरीका बताया, अभिभावकों ने भी प्रेरित किया तो परिणाम अच्छे आए। 90 बच्चों की पढ़ाई पर इससे सकारात्मक प्रभाव पड़ा, 20 बच्चों पर आंशिक असर रहा। जिनके बच्चों की आदतों में सुधार हुआ उन्होंने और भी लोगों के बच्चों को प्रेरित करने का संकल्प लिया।
स्क्रीन कर्फ्यू फार्मूला में ये शर्तें भी
स्क्रीन कर्फ्यू की धारणा बनाकर पिछले छह महीने से काल्विन अस्पताल में एक कार्यक्रम पर अमल किया जा रहा है। जो भी बच्चे मोबाइल से बिगड़ी आदतों और मानसिक दुष्प्रभाव के चलते अस्पताल लाए गए उन्हें और अभिभावकों को एक अहम काम की जिम्मेदारी दी गई। कहा गया कि शाम को छह बजे या अधिकतम सात बजे के बाद मोबाइल नहीं देखेंगे, टीवी स्क्रीन भी नहीं देखेंगे। कम से कम दो घंटे किताबों से पढ़ाई करेंगे। स्कूल से मिला होमवर्क करने के अलावा सामान्य ज्ञान भी रोज पढ़ेंगे।
बच्चों के व्यवहार में सुधार आया
अधिकतर बच्चों ने इन शर्तों का पालन करना शुरू कर दिया। उनमें धीरे-धीरे उत्साह भरने लगा। प्रत्येक आठ-10 दिन पर बच्चों को लेकर अभिभावक काल्विन अस्पताल में फालोअप के लिए जाने लगे। उनमें लगातार सुधार आता गया।
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नंबर गेम
150 बच्चों पर हुआ प्रयोग
90 बच्चों के परीक्षा परिणाम में आया सुधार
20 बच्चों ने किया आंशिक पालन
40 बच्चों ने पालन नहीं किया तो उनकी काउंसिलिंग हो रही है
15 साल तक के बच्चे और किशोर किए गए थे शामिल
06 महीने तक चला स्क्रीन कर्फ्यू कार्यक्रम
चुनौती कठिन थी, निभाया तो मिली खुशी
मीरापुर में रहने वाले प्रदीप निषाद ने बताया कि 13 वर्षीय बेटा मोबाइल बहुत देखता था, उसकी पढ़ाई लिखाई खराब होने लगी। परीक्षाओं में नंबर बहुत कम आ रहे थे। जब से स्क्रीन कर्फ्यू कार्यक्रम में शामिल हुए तो बच्चे ने शर्तों का पालन पूरे मनोयोग से किया। जिन विषयों में नंबर खराब आते थे अब उसमें काफी सुधार हो गया है।
पढ़ाई में नंबर भी अच्छे आने लगे
दारागंज निवासी राजू गोस्वामी ने बताया कि मनोचिकित्सक ने जो शर्त बताई थी बच्चे से उसका पालन कराया। काफी कठिन चुनौती थी, बच्चे के सामने हम सभी को शाम सात बजे के बाद फोन से दूरी बनानी पड़ी। आखिरकार बच्चे की आदत में काफी सुधार हो गया है, अब उसके स्कूल में नंबर भी अच्छे आने लगे हैं।
सूर्यास्त के बाद बच्चों को मोबाइल और टीवी स्क्रीन से दूरी बनाने के लिए प्रेरक कार्यक्रम चलाया था। इसमें शामिल ज्यादातर बच्चों के परिणाम में 25 प्रतिशत तक सुधार देखा गया। स्क्रीन कर्फ्यू एक फार्मूला है जिसे अपनाकर बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी कम किया जा सकता है।
- डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय 'काल्विन'।