प्रयागराज : घूस न मिलने पर फर्जी रिपोर्ट लगा अविवाहित युवती को विवाहित बताया, सामूहिक विवाह योजना से वंचित किया, VDO निलंबित
प्रयागराज में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक अविवाहित युवती को घूस न मिलने पर विवाहित दर्शाकर अपात्र घोषित कर दिया गया। सीडीओ ने इस मामले म ...और पढ़ें

प्रयागराज में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में रिश्वत लेने के आरोप में ग्राम विकास अधिकारी पर सख्त कार्रवाई हुई।
HighLights
सीडीओ ने डीडीओ को आरोपित ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित करने का आदेश दिया
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत पीड़ित ने किया था आवेदन, सत्यापन में निरस्त
जनपद के गंगापार स्थित फूलपुर ब्लाक के चकरारी गांव की रहने वाली है भुक्तभोगी महिला
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। ऊपरी कमाई के चक्कर में कुछ कर्मचारी गरीबों का हक मारने में जुटे हैं। एक गरीब महिला सिर्फ इसलिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत अपनी बेटी के हाथ पीले नहीं करा सकी, क्योंकि उसने ग्राम विकास अधिकारी को घूस नहीं दी थी। इस कारण कर्मचारी ने सत्यापन में उसकी अविवाहित बेटी को विवाहित दर्शाकर अपात्र घोषित कर दिया। सीडीओ हर्षिका सिंह ने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित करने का आदेश दिया है।
महिला ने बेटी की शादी को ऑनलाइन आवेदन किया था
मामला फूलपुर ब्लाक के चकरारी गांव का है। यहां की रहने वाली सुशीला देवी ने अपनी बेटी राधिका की शादी तय कर दी थी। आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने के कारण वह मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बेटी की शादी करना चाहती थी। इसके लिए उसने ऑनलाइन आवेदन भी किया था। ग्राम पंचायत के सचिव का काम देख रहे ग्राम विकास अधिकारी अखिलेश कुमार ने इसका सत्यापन किया।
घूस न दिया तो फर्जी रिपोर्ट लगा दी
सुशीला देवी का आरोप है कि सचिव ने योजना का लाभ दिलाने के लिए 10 हजार रुपये मांगे थे, जो वह नहीं दे सकी। घूस न मिलने पर सचिव ने उनकी बेटी के विवाहित होने की रिपोर्ट लगा दी। जबकि, वह अविवाहित थी। सचिव की फर्जी रिपोर्ट के कारण समाज कल्याण विभाग ने उनका आवेदन निरस्त कर दिया।
निलंबन का निर्देश जिला विकास अधिकारी को दिया
सीडीओ ने बताया कि मामले की शिकायत मिली थी। इसकी जांच कराई गई तो पता चला कि ग्राम विकास अधिकारी ने फर्जी रिपोर्ट लगाकर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की पात्र को अपात्र घोषित कर दिया। सचिव ने आवेदक की बेटी को विवाहित बताया था, जबकि आवेदक ने सामूहिक विवाह के तीन दिन बाद बेटी की शादी की थी। सीडीओ ने कहा कि संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित करने के निर्देश जिला विकास अधिकारी जीपी कुशवाहा को दिए गए हैं।
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योजना के तहत वधु को मिलते हैं 60 हजार रुपये
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना तहत सरकार प्रति जोड़े पर एक लाख रुपये बजट खर्च करती है। इसमें 60 हजार रुपये शादी के बाद वधु के खाते में भेजे जाते हैं। इसके अलावा 25 हजार रुपये के उपहार दिए जाते हैं। शेष 15 हजार रुपये विवाह के आयोजन पर खर्च होते हैं।