दागी रेल कर्मियों पर अब तुरंत होगा एक्शन, रेलवे बोर्ड ने बदला वर्षों पुराना नियम; क्या होगी नई प्रक्रिया
रेलवे बोर्ड ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूत करने के लिए दागी रेल कर्मियों पर कार्रवाई के पुराने नियमों में बदलाव किया है। इस नए आदेश ...और पढ़ें

रेलवे बोर्ड के नए नियम से दागी रेल कर्मियों व अधिकारियों पर अब तुरंत कार्रवाई होगी।
HighLights
भारतीय रेलवे का भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति को मजबूत करने को बड़ा फैसला
दागी या दोषियों पर केस चलाने की मंजूरी में सरकारी दस्तावेजों की प्रमाणितता होगी आसान
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भारतीय रेलवे ने अपने प्रशासनिक कामकाज को रफ्तार देने और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। रेल मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रेलवे बोर्ड ने सालों पुराने नियम में बदलाव करते हुए एक नया आधिकारिक आदेश जारी किया है।
कानूनी प्रक्रिया में आएगी तेजी
इस नए आदेश के बाद अब दागी या दोषी रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने वाले सरकारी दस्तावेजों को प्रमाणित करना बेहद आसान हो जाएगा। इस कदम से रेलवे के भीतर अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के मामलों में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी और पूरी कानूनी प्रक्रिया में तेजी आएगी।
मंजूरी के लिए नहीं अटकेगी फाइल
आमतौर पर देखा जाता है कि जब भी किसी रेल कर्मी पर कोई गंभीर आरोप लगता है या कोई बड़ा घोटाला सामने आता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए रेलवे बोर्ड की अंतिम मंजूरी की आवश्यकता होती है। पहले इस मंजूरी के बाद आधिकारिक दस्तावेजों को तैयार करने, उन पर हस्ताक्षर करने और उन्हें संबंधित जांच एजेंसियों या विभागों तक भेजने की प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली होती थी। उच्च स्तर पर फाइलों के दबे रहने या कागजी कार्रवाई में उलझने के कारण अक्सर जांच में देरी होती थी और दोषियों को बचने का मौका मिल जाता था। अब रेलवे बोर्ड ने इसी पेंच को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
तय हो गई जवाबदेही
नए नियमों के अनुसार, अब रेलवे बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए मुकदमों के आदेशों को रेलवे बोर्ड के प्रतिनिधि के रूप में प्रमाणित करने की जिम्मेदारी संयुक्त सचिव, निदेशक, उप सचिव और अवर सचिव स्तर के अधिकारियों को सौंप दी गई है। इसका मतलब यह है कि जैसे ही बोर्ड किसी दोषी कर्मचारी पर मुकदमा चलाने का मुख्य फैसला लेगा, वैसे ही ये अधिकृत अधिकारी तुरंत उस आदेश पर दस्तखत कर उसे आगे बढ़ा सकेंगे। इन अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं कि वे रेलवे बोर्ड के फैसलों के अनुसार ही काम करेंगे और दस्तावेजों पर बकायदा यह लिखा जाएगा कि यह आदेश रेलवे बोर्ड की ओर से और उसके नाम पर जारी किया जा रहा है।
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तेजी से होगी कार्रवाई
इस बड़े बदलाव का सीधा असर पूरे देश के रेल प्रशासन पर पड़ेगा। रेलवे बोर्ड के इस कदम से न सिर्फ मुख्यालय में फाइलों का बोझ कम होगा, बल्कि क्षेत्रीय कार्यालयों और मंडलों में भी संदेश जाएगा कि लापरवाही या भ्रष्टाचार पर तुरंत और सख्त कार्रवाई होगी। यह नया नियम पूरे देश के सभी रेलवे जोनों में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
कानूनी विंग का सुव्यवस्थित होगा कामकाज
इससे सतर्कता विभाग और कानूनी विंग का कामकाज भी काफी सुव्यवस्थित हो जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो रेलवे ने अपने प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक और जवाबदेह बनाने की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम उठाया है, जिससे आने वाले समय में रेल सेवाओं की साख और मजबूत होगी।