बाढ़ व भारी बारिश में ड्रोन से होगी रेलपुलों की निगरानी, रेलवे बोर्ड ने मानसून से पहले हाई अलर्ट जारी किया
रेलवे बोर्ड ने मानसून से पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया है। इस बार भारी बारिश की आशंका को देखते हुए बाढ़ और बारिश के दौरान रेल पुलों की निगरानी ड्रोन ...और पढ़ें

प्रयागराज में यमुना पर बना रेल ब्रिज की फाइल फोटो।
HighLights
12 नदियों पर उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) करता है पुलों की निगरानी
एक अप्रैल तक सभी जोन रेलवे बोर्ड को बताएंगे कितनी की है तैयारी
अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। देशभर में मानसून के दस्तक देने से करीब तीन माह पूर्व ही रेलवे बोर्ड ने आगामी मानसून के दौरान रेल पटरियों और पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'हाई अलर्ट' जारी किया है। इस बार भारी बारिश का अनुमान है। ऐसे में बाढ़ और भारी बारिश के दौरान रेल पुलों की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जाएगी।
सभी रेलवे जोन तैयारियों की रिपोर्ट व संसाधन बताएंगे
आमतौर पर मानसून की तैयारियां मई के अंत तक की जाती हैं, लेकिन इस बार रेलवे बोर्ड ने मार्च के अंतिम सप्ताह में ही सभी जोनल रेलवे के 'प्रिंसिपल चीफ इंजीनियरों' को विस्तृत दिशा-निर्देश भेज दिए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एक अप्रैल 2026 तक सभी जोनल रेलवे को अपनी तैयारियों की रिपोर्ट और उपलब्ध संसाधनों का पूरा ब्योरा सौंपना होगा।
आपदा से पूर्व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
रेलवे बोर्ड ने निर्देश जारी किया है कि किस पुल की निगरानी ड्रोन करेंगे, कितने ड्रोन उपलब्ध हैं, इसकी भी सूचना देनी होगी। इस 'प्री-मानसून' अलर्ट का मकसद किसी भी संभावित आपदा से पहले सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता इंतजाम करना है।
बोर्ड निदेशक ने पत्र जारी किया है
रेलवे बोर्ड के निदेशक (सिविल इंजीनियरिंग) अभिमन्यु लांबा द्वारा जारी 24 मार्च को जारी पत्र के अनुसार, इस वर्ष संवेदनशील रेल पुलों की निगरानी के लिए ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। दुर्गम इलाकों और ऊफान पर रहने वाली नदियों के ऊपर बने पुलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए ड्रोन तकनीक को प्राथमिकता दी गई है।
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बोल्डर, रेत बोरियां व मिट्टी का भारी स्टाक होगा
इससे बाढ़ के दौरान बिना किसी मानवीय जोखिम के पुलों की संरचना और जलस्तर का सटीक आकलन किया जा सकेगा। बारिश से ट्रैक धंसने की स्थिति में मरम्मत के लिए चिह्नित स्टेशनों पर बोल्डर (पत्थर), रेत की बोरियां और मिट्टी का भारी स्टाक अभी से जमा किया जाएगा।
रेलवे को लगातार अलर्ट भी मिलता रहेगा
नदी के जलस्तर को मापने के लिए 'वाटर लेवल मानिटरिंग सिस्टम' को सीधे ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) से जोड़ा गया है, जिससे रेलवे को लगातार अलर्ट भी मिलता रहेगा। रेल अधिकारी स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के साथ 24 घंटे संपर्क में रहेंगे ताकि बांधों से पानी छोड़े जाने की सूचना समय पर मिल सके। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि मानसून की तैयारी शुरू कर दी गई है। तकनीक का प्रयोग इसके बहुत सटीक बनाएगा।
एनसीआर में इन नदियों के पुलों की होगी निगरानी
उत्तर मध्य रेलवे यानी एनसीआर क्षेत्र में यमुना, चंबल, केन, सोन, टोंस, धसान नदी, नारायण नदी, सिंध, बेतवा, बाघिन, पैसुनी नदी, कुंआरी नदी पर बने 20 पुल की विशेष निगरानी होगी। प्रयागराज में पुराना यमुना पुल को भी विशेष सूची में रखा गया है।