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    धुरंधर-2 में दिखा प्रयागराज जंक्शन, यहां नहीं हुई थी शूटिंग फिर कैसे 'हमजा' व 'पिंडा' पहुंच गए? उठा रहस्य से पर्दा

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 20 Mar 2026 12:51 PM (IST)

    फिल्म धुरंधर 2 में दिखाए गए प्रयागराज जंक्शन के दृश्य को लेकर बहस छिड़ गई है। फिल्म में हमजा और पिंडा को प्रयागराज जंक्शन पर दिखाया गया है, जिससे दर्श ...और पढ़ें

    धुरंधर 2 फिल्म में प्रयागराज जंक्शन का लोकेशन।

    धुरंधर 2 फिल्म में प्रयागराज जंक्शन का लोकेशन।

    HighLights

    1. तकनीकी रूप से फिल्म की शूटिंग कहीं और हुई थी, प्रयागराज में छिड़ी बहस

    2. एनसीआर सीपीआरओ बोले- धुरंधर 2 की शूटिंग प्रयागराज जंक्शन पर नहीं हुई

    अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। बाक्स आफिस पर सुनामी लेकर आई फिल्म 'धुरंधर 2' इन दिनों न केवल अपनी कमाई बल्कि अपनी कहानी और लोकेशन को लेकर भी जबरदस्त सुर्खियों में है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई जसकीरत और उसके अभिनय का कायल हो चुका है। हालांकि फिल्म के एक खास सीन को लेकर उत्तर प्रदेश के 'संगम नगरी' यानी प्रयागराज में एक अलग ही बहस छिड़ गई है।

    क्या वाकई इस फिल्म की शूटिंग प्रयागराज में हुई है?

    फिल्म के दूसरे सीन में जब मुख्य किरदार 'हमजा' (जसकीरत) अपने दोस्त 'पिंडा' के साथ ट्रेन से प्रयागराज जंक्शन पहुंचता है, तो दर्शकों को लगता है कि वे अपने शहर की गलियों को पर्दे पर देख रहे हैं। हालांकि क्या वाकई इस फिल्म की शूटिंग प्रयागराज में हुई है? इस सस्पेंस से अब पर्दा उठ चुका है। धुरंधर-2 में झूठा सीन दिखाया गया है कि हमजा प्रयागराज जंक्शन पहुंचता है।

    प्रयागराज जंक्शन पर शूटिंग पर बोले सीपीआरओ

    जैसे ही फिल्म में प्रयागराज का नाम आया और स्टेशन के बोर्ड के साथ जसकीरत को दिखाया गया, स्थानीय फैंस के बीच यह चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर दावे किए जाने लगे कि जसकीरत ने प्रयागराज की तपती धूप में शूटिंग की है। हालांकि, इस मामले पर प्रामाणिकता के साथ स्पष्टीकरण उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) की ओर से आया है।

    चर्चाओं पर लगाया विराम 

    उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि - "धुरंधर 2 की शूटिंग प्रयागराज जंक्शन या उत्तर मध्य रेलवे के किसी भी स्टेशन परिसर में नहीं हुई है। हालांकि फिल्म की पटकथा में प्रयागराज का उल्लेख है और पात्रों को यहाँ आते हुए दिखाया गया है, लेकिन फिल्मांकन के लिए यहाँ की अनुमति नहीं ली गई थी और न ही क्रू यहां आया था।"

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    तकनीक का कमाल या किसी और शहर का सेट?

    जब स्टेशन प्रयागराज का नहीं था, तो पर्दे पर वह इतना असली कैसे लगा? जानकारों का मानना है कि फिल्मकारों ने या तो किसी अन्य छोटे स्टेशन को 'प्रयागराज' के रूप में पेश किया है या फिर 'क्रिएटीव विजुअल्स' और 'सीजीआई' के जरिए स्टेशन के नाम वाले बोर्ड को बदला गया है। फिल्म में जसकीरत और पिंडा को जिस तरह अतीफ अहमद के ठिकाने पर जाते हुए दिखाया गया है, वह दृश्य दर्शकों को पूरी तरह भ्रमित करने में सफल रहा है।

    'धुरंधर 2' का क्रेज : आखिर क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

    फिल्म 'धुरंधर 2' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक घटना बन चुकी है। इसकी सफलता के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला तो जसकीरत का अभिनय है। हमजा के किरदार में जसकीरत ने जान फूंक दी है। एक गांव के लड़के का ड्रग्स के काले कारोबार और अतीफ अहमद जैसे गैंगस्टर्स के बीच फंसना, दर्शकों को झकझोर देता है। फिल्म के डायलाग्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। विशेषकर हमजा और पिंडा की दोस्ती के सीन युवाओं को बेहद पसंद आ रहे हैं। भले ही प्रयागराज में शूटिंग न हुई हो, लेकिन फिल्म जिस तरह से उत्तर प्रदेश के परिवेश और अपराध जगत की बारीकियों को दिखाती है, वह बहुत ही सटीक लगती है।

    प्रयागराज और सिनेमा का पुराना नाता

    प्रयागराज हमेशा से फिल्मकारों की पहली पसंद रहा है। 'धुरंधर 2' में इस शहर का जिक्र होना यह दर्शाता है कि हिंदी सिनेमा के केंद्र में अब छोटे शहर और उनकी कहानियां आ चुकी हैं। इससे पहले भी कई बड़ी फिल्मों की शूटिंग नैनी ब्रिज, संगम तट और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हो चुकी है। यही कारण था कि दर्शकों को सहज ही विश्वास हो गया कि जसकीरत वाकई प्रयागराज की सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

    ड्रग्स के खिलाफ कड़ा संदेश

    फिल्म में जब हमजा अतीफ अहमद के पास ड्रग्स लेने पहुंचता है, तो वह दृश्य केवल मनोरंजन के लिए नहीं है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि 'धुरंधर 2' के जरिए समाज में फैले नशे के जाल और उससे होने वाली तबाही को बेहद कड़वी सच्चाई के साथ पेश किया गया है। यही वजह है कि इसे महिलाओं और बुजुर्गों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है।

    पर्दे का प्रयागराज और असलियत

    यहां यह स्प्ष्ट हो गया है कि फिल्मों में जो दिखता है, वह हमेशा सत्य नहीं होता। 'धुरंधर 2' ने प्रयागराज को अपनी कहानी का अहम हिस्सा बनाकर शहर के लोगों को एक गर्व का क्षण तो दिया, लेकिन तकनीकी रूप से यह शूटिंग कहीं और संपन्न हुई थी। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी का बयान यह साफ करता है कि रेलवे ने इस फिल्म के लिए कोई आधिकारिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं कराया था। बहरहाल, फिल्म की कमाई के आंकड़े बता रहे हैं कि लोकेशन चाहे जो भी हो, फिल्म ने लोगों के दिलों में अपनी जगह पक्की कर ली है।

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