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RPF में विभागीय जांच के नियम बदले, आरोपित कर्मचारी को सफाई देने का मौका मिलेगा; रेलवे बोर्ड ने रूल निष्पक्ष बनाया

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 21 Jul 2026 11:05 PM (GMT+05:30)

रेलवे बोर्ड ने आरपीएफ की विभागीय जांच प्रक्रिया में बदलाव किया है, अब गंभीर मामलों में आरोपित कर्मचारी को जांच ...और पढ़ें

रेलवे बोर्ड ने आरपीएफ में विभागीय जांच के नियम बदले हैं।

रेलवे बोर्ड ने आरपीएफ में विभागीय जांच के नियम बदले हैं।

HighLights

  1. आरोप तय होने पर सीधे नहीं तैनात होंगे जांच अधिकारी

  2. 10 से 15 दिन तक जवाब देना का कर्मचारी को मिलेगा मौका

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) के जवानों व अधिकारियों के खिलाफ होने वाली विभागीय जांच प्रक्रिया को रेलवे बोर्ड ने अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बना दिया है। अब किसी भी बड़े मामले (मेजर पेनल्टी) में आरोप तय होने के बाद सीधे जांच अधिकारी (इन्क्वायरी आफिसर) की नियुक्ति नहीं की जाएगी। आरोपित कर्मचारी को पहले अपनी सफाई देने का लिखित मौका मिलेगा। इसके लिए देश के सभी जोनल रेलवे, आरपीएसएफ और प्रशिक्षण संस्थानों को निर्देश हुआ है।

आरोपित को सुने बिना जांच अधिकारी नियुक्त होता था

अभी तक जब भी किसी जवान या अधिकारी पर किसी गंभीर मामले में चार्जशीट (मेजर पेनल्टी) जारी होती थी, तो आरोपित की बात सुने बिना ही सीधे जांच अधिकारी नियुक्त होता था। इससे मामला सीधे लंबी विभागीय जांच में चला जाता था, भले ही कर्मचारी के पास शुरुआत में ही अपनी बेगुनाही का कोई ठोस सबूत क्यों न हो।

आरोपित को 10 दिन मिलेगा पक्ष रखने का समय 

अब चार्जशीट मिलने के बाद आरोपित कर्मचारी को अपना लिखित पक्ष रखने के लिए 10-15 दिन का समय मिलेगा। दाखिल जवाब पर अनुशासनिक प्राधिकारी (अनुशासन अधिकारी) उसके जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की निष्पक्ष समीक्षा करेंगे। जवाब से संतुष्ट हुए या यह पाते हैं कि मामला बड़ा दंड देने लायक नहीं है, तो बिना जांच अधिकारी बैठाए मामले को वहीं समाप्त किया जा सकता है या छोटी कार्रवाई देकर निपटाया जा सकता है। जांच अधिकारी की नियुक्ति तभी होगी जब जवाब देखने के बाद भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता हो।

16 जुलाई से नियम प्रभावी

आरपीएफ की महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने बताया कि यह नियम 16 जुलाई से प्रभावी हो चुका है और इसे सभी आरपीएफ थानों व चौकियों के नोटिस बोर्ड पर लगाने के साथ ही रोजाना होने वाली हाजिरी (रोल काल) और सुरक्षा सम्मेलनों में पढ़कर सुनाने के निर्देश दिए गए हैं।

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