'SC ने पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है शंकराचार्य लिखने पर नहीं', माघ मेला प्रशासन द्वारा भेजे गए नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील
प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या पर स्नान से रोकने और संतों के साथ मारपीट के विरोध में जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं। शंकराचा ...और पढ़ें
HighLights
शंकराचार्य लिखने पर जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस दिया है
मौनी अमावस्या पर स्नान करने से रोकने तथा संतों से मारपीट के विरोध में स्वामी धरने पर बैठे हैं
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या पर स्नान करने से रोकने, संतों से मारपीट के विरोध में जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं। शंकराचार्य लिखने पर उन्हें प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस दिया। इसके जवाब में उनके अधिवक्ता सामने आ गए हैं।
...इसलिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लिख रहे शंकराचार्य
जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता पीएन मिश्र ने मंगलवार को माघ मेला स्थित स्वामी के शिविर के सामने धरना स्थल पर मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य लिखने पर रोक नहीं है। बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं। उनके गुरु ने उनके नाम रजिटर्ड वसीयत की है। इसी के आधार पर वह शंकराचार्य लिख रहे हैं।
मैं पक्ष में हूं न विपक्ष में : स्वामी निश्चलानंद सरस्वती
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शंकराचार्य के रूप में पुरी पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का मौन समर्थन मिलने का दावा किया था। स्वामी निश्चलानंद ने उस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, मैं इस मामले में कुछ बोलना नहीं चाहता। मैं किसी के पक्ष में हूं न विपक्ष में। अविमुक्तेश्वरानंद मेरा लाडला है, लेकिन विवाद में मुझे नहीं बोलना। उन्होंने मेला प्रशासन के निर्णय को अकाट्य बताया। साथ ही कहा कि मीडिया और दूसरे लोग विवाद को तूल दे रहे हैं, जो उचित नहीं है।
पहले कहा- अन्न-जल त्याग, अब कह रहे खा रहा हूं
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि उनका अपमान किया गया है। इसकी वजह से अन्न-जल त्याग दिया है। अधिकारियों के माफी न मांगने तक नहीं उठेंगे। वहीं, मंगलवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि वह अन्न-जल ग्रहण कर रहे हैं।