दिल्ली-मुंबई से प्रयागराज आने वाली हर ट्रेन भीड़ से पैक, बाथरूम-गैलरी में भी जगह नहीं, गेट पर लटक करनी पड़ रही यात्रा
होली पर घर लौट रहे यात्री ट्रेनों में भारी भीड़ से परेशान हैं। दिल्ली-मुंबई से प्रयागराज की ओर आने वाली ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं है। स्लीपर ...और पढ़ें

प्रयागराज जंक्शन पर आने वाली ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ से यात्रियों का सफर मुश्किल हो गया है। जागरण आर्काइव
HighLights
ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं, 'नो रूम' में यात्री बेहाल
होली पर ट्रेन यात्रा हुई दुरूह, व्यवस्था हो रही छिन्न-भिन्न
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रंग पर्व होली अपनों के साथ मनाने का सपना लेकर घर लौट रहे यात्रियों के लिए सोमवार का सफर किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम साबित नहीं हो रहा। दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे महानगरों से उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर आने वाली ट्रेनों में उमड़ा जनसैलाब व्यवस्थाओं के दावों की पोल खोलता दिखा। प्रयागराज आने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों की स्थिति यह रही कि स्लीपर में कंफर्म टिकट तो दूर, अब वेटिंग मिलना भी बंद रहा।
एसी कोच में भी जबरदस्त भीड़
सोमवार को प्रयागराज आने वाली ट्रेनों में जनरल और स्लीपर कोच की बात तो छोड़िए, एसी कोच में जबरदस्त भीड़ घुसी रही। कोच के गेट से लेकर बाथरूम की गैलरी और दो सीटों के बीच वाली जगह तक बैठे रहे। आरक्षित टिकट लेकर यात्रा कर रहे लोग भी इस भीड़ से बेहाल रहे। स्थिति यह रही कि अपनी सीट से उठकर बाथरूम तक जाना भी किसी जंग जीतने जैसा रहा। सैकड़ों यात्रियों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर कोच में भीड़ को हटाने और मदद की गुहार लगाई, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।
दिल्ली-प्रयागराज रूट की 32 प्रमुख ट्रेनों में 'नो रूम'
दिल्ली-प्रयागराज रूट की स्थिति सोमवार को सबसे ज्यादा चिंताजनक दिखी। सोमवार को इस रूट की 32 प्रमुख ट्रेनों में 'नो रूम' यानी 'रिग्रेट की स्थिति रही। इन ट्रेनों में वेटिंग टिकट भी नहीं मिला है। प्रयागराज एक्सप्रेस, शिवगंगा, पुरुषोत्तम, मगध, रीवा, और हमसफर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में स्लीपर से लेकर थर्ड एसी तक पूरी तरह पैक रहे। डिब्रूगढ़, हावड़ा और तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनें फुल रही।
एक माह पूर्व भी नहीं मिली सीट
दिल्ली की एक निजी कंपनी में कार्यरत देवेंद्र सिंह बताते हैं, "मैंने एक महीने पहले से टिकट की कोशिश की थी, लेकिन तत्काल में भी हाथ खाली रहे। जैसे-तैसे गेट पर लटककर घर पहुंच रहा हूं, लेकिन ऐसी भीड़ पहले कभी नहीं देखी।" वहीं, छात्र अभिनव कहते हैं कि हर साल होली पर यही मारामारी होती है, रेलवे की विशेष ट्रेनें भी इस भीड़ के आगे बौनी साबित हो रही हैं।
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स्पेशल ट्रेनों में भी वेटिंग लिसट 200 के पार
ट्रेनों में जगह न मिलने के कारण यात्री कोच के पायदानों पर लटक कर और बाथरूम के बाहर बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं। लोग किसी भी तरह अपने परिवार के पास पहुंचना चाहते हैं। रेलवे ने कई विशेष ट्रेनें चलाई लेकिन स्थिति यह रही कि ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची 200 के पार रही।