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    UP D.El.Ed. से क्यों घटा प्रतियोगियों का मोह? प्रदेश के 67 डॉयट संस्थानों में से 14 में आधी से ज्यादा रिक्त रह गईं सीटें

    By Awadhesh Pandey Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 29 May 2026 12:37 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश में डीएलएड प्रशिक्षण के प्रति छात्रों का रुझान लगातार कम हो रहा है, जिससे लाखों सीटें खाली रह गई हैं। 2018 के बाद बेसिक शिक्षक भर्ती न आन ...और पढ़ें

    यूपी के किसी डॉयट में डीएलएड की सभी सीटें नहीं भर सकी हैं।

    यूपी के किसी डॉयट में डीएलएड की सभी सीटें नहीं भर सकी हैं।

    HighLights

    1. निजी डीएलएड संस्थानों को मिलाकर डेढ़ लाख सीटों पर नहीं मिले अभ्यर्थी

    2. प्राथमिक शिक्षक भर्ती को अनिवार्य है डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन प्रशिक्षण

    3. वर्ष 2018 के बाद बेसिक शिक्षक भर्ती न आने से डीएलएड पाठ्यक्रम का घटा आकर्षण

    राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण के प्रति छात्र-छात्राओं का रुझान लगातार कम हो रहा है। यही कारण है कि पिछले कई वर्ष से डीएलएड की सभी सीटें नहीं भर पा रही हैं।

    90 हजार सीटों पर ही प्रवेश हुए

    सत्र विलंबित होने के कारण वर्ष 2025 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 2026 में पूरी हुई और प्रवेश की स्थिति यह है कि प्रदेश के 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डॉयट) में से कोई ऐसा नहीं है, जिसकी सभी सीटें भरी हों। 14 डायट ऐसे हैं, जिनमें आधी से ज्यादा सीटों पर अभ्यर्थी नहीं मिले। इस तरह डॉयट और निजी डीएलएड प्रशिक्षण संस्थानों को मिलाकर 2,39,500 सीटों में से करीब 90 हजार सीटों पर ही प्रवेश हुए हैं।

    2,39,500 सीटों में करीब 1.49 लाख खाली

    प्रदेश में 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डॉयट) संचालित हैं। इसमें वाराणसी में संचालित कॉलेज आफ टीचर एजुकेशन (सीटीई) भी सम्मिलित है। इसके अलावा 3,046 निजी डीएलएड संस्थान एवं 258 अल्पसंख्यक कॉलेज चल रहे हैं। इस तरह इन सभी संस्थानों को मिलाकर कुल 2,39,500 सीटों में से करीब 1.49 लाख खाली रह गई हैं।

    सबसे अच्छी स्थित बांदा और श्रावस्ती की 

    स्थिति यह है कि डॉयट के रूप में संचालित सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों की सभी सीटों के लिए भी अभ्यर्थी नहीं मिले। डॉयट में प्रवेश के मामले में सबसे अच्छी स्थिति बांदा और श्रावस्ती की है। इनमें स्वीकृत कुल 50-50 सीटों में से 49-49 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। दोनों में केवल एक-एक सीटें रिक्त हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर फर्रुखाबाद और महराजगंज है, जहां 50-50 सीटों में से केवल दो-दो खाली हैं। तीसरे नंबर पर इटावा, कुशीनगर, बलिया हैं। इटावा में 50 में 47 तथा बलिया एवं कुशीनगर में 100-100 सीटों के सापेक्ष 97-97 पर प्रवेश हुए हैं। इनमें तीन-तीन सीटें खाली हैं।

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    इन जिलों में आधी से अधिक सीटें रिक्त 

    इसके विपरीत मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, अमरोहा, बिजनौर, कन्नौज, औरैया, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, ललितपुर, वाराणसी में आधी से ज्यादा सीटें रिक्त हैं। इनमें अधिकांश में 200 सीटें सृजित हैं। इस तरह प्रदेश के डायट संस्थानों में कुल 10,600 सीटें हैं, जिनमें 7,198 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। 3,402 सीटें रिक्त रह गई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2018 के बाद से बेसिक शिक्षक भर्ती नहीं आने से डीएलएड पाठ्यक्रम के प्रति आकर्षण कम हुआ है।

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