UP के राजकीय शिक्षकों की तदर्थ सेवा जोड़कर मांगी पेंशन-ग्रेच्युटी, शिक्षक संघ ने उठाई आवाज
राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा से 1990-92 के तदर्थ शिक्षकों की सेवा को पेंशन व ग्रेच्युटी में जोड़ने की मांग की है। ...और पढ़ें

राजकीय शिक्षक संघ ने राजकीय शिक्षकों की तदर्थ सेवा जोड़कर मांगी पेंशन-ग्रेच्युटी की मांग की है।
HighLights
राजकीय शिक्षक संघ ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को भेजा मांगपत्र
1990 से 1992 तक नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को लाभ देने के हैं शासन के आदेश
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में 1990, 1991 और फरवरी 1992 तक तदर्थ आधार पर नियुक्त शिक्षकों की सेवा को पेंशन एवं ग्रेच्युटी में जोड़ने की मांग राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने की है। कहा कि यह लाभ उसी आधार पर दिया जाए, जैसे माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम-1982 के तहत विनियमित तदर्थ एवं अल्पकालिक शिक्षकों के पेंशन प्रकरणों के निस्तारण के लिए हाई कोर्ट की विभिन्न रिट याचिकाओं में पारित आदेश के अनुपालन में माध्यमिक शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया गया है।
प्रांतीय महामंत्री सत्य शंकर मिश्र एवं प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पाण्डेय ने अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक शिक्षा) को पत्र भेजकर इस संबंध में शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है। बताया है कि प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षा निदेशालय द्वारा 1990 से 1992 तक तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी।
मेरिट के आधार पर विषयवार सूची तैयार कर मंडलों को भेजी गई और मंडलीय उपशिक्षा निदेशकों ने नियुक्ति पत्र जारी किए थे। तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के लिए सात अगस्त 1993 एवं 17 अगस्त 2001 को शासनादेश भी जारी किए गए। इनमें से अधिकांश शिक्षक वर्ष 1994 में लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित होकर नियमित हुए।
बड़ी संख्या में शिक्षक 30 से 35 वर्ष की सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनकी तदर्थ सेवा को पेंशन और ग्रेच्युटी में नहीं जोड़ा जा रहा है। संघ ने विभिन्न न्यायिक आदेशों का हवाला देते हुए बताया कि कई मामलों में तदर्थ सेवा को पेंशन लाभ के लिए मान्य किया है। ऐसे में मांग की है कि सभी पात्र तदर्थ राजकीय शिक्षकों की तदर्थ सेवा जोड़कर पेंशन एवं ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।