UP में बेहतर शिक्षण के अग्रदूत बने ARP स्कूलों से दूर, विद्यार्थी कैसे बनेंगे निपुण? जिम्मेदार दायित्यों के प्रति उदासीन
उत्तर प्रदेश के 19508 विद्यालयों में जनवरी से सहयोगात्मक पर्यवेक्षण नहीं हुआ है, जिससे निपुण लक्ष्य प्राप्त करने में बाधा आ रही है। महानिदेशक ने मई मे ...और पढ़ें

यूपी के करीब 20 हजार परिषदीय स्कूलों में जनवरी से अब तक सपोर्टिव सुपरविजन नहीं हुआ है।
HighLights
प्रदेश के 19508 विद्यालयों में नहीं हुआ सपोर्टिव सुपरविजन
मई में इन स्कूलों में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करना प्राथमिकता
अमलेन्दु त्रिपाठी, प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों की शैक्षणिक दशा सुधारने के लिए यूं तो ढेरों प्रयास हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अपने दायित्यों के प्रति उदासीन हैं। कुछ ऐसा ही शिक्षा के अग्रदूत यानी एआरपी और एसआरजी की कार्यप्रणाली की समीक्षा से प्रतीत हो रहा है। ऐसे में निपुण लक्ष्य मिलना आसान नहीं है। प्रदेश के कुल 19508 विद्यालय ऐसे हैं जिसमें जनवरी से अब तक सपोर्टिव सुपरविजन नहीं हुआ।
एआरपी को एक दिन में दो विद्यालय जाना अनिवार्य
परिषदीय स्कूलों में अकादमिक रिसोर्स पर्सन और स्टेट रिसोर्स पर्सन की मदद से सहयोगात्मक पर्यवेक्षण का निर्देश है, जिससे पठन-पाठन की गुणवत्ता में सुधार आए। प्रत्येक एआरपी को एक दिन में दो विद्यालय जाना अनिवार्य है। कक्षा शिक्षण का अवलोकन करने के साथ शिक्षकों को नवीन विधियां बताना और निपुण भारत लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। एआरपी अर्थात अकादमिक रिसोर्स पर्सन को पर्यवेक्षण के लिए जाने पर स्कूल में न्यूनतम दो घंटे का समय बिताने का निर्देश है।
स्कूल शिक्षा महानिदेशक की समीक्षा में आंकउ़े निराशाजनक
स्कूल शिक्षा महानिदेशक की समीक्षा में सपोर्टिव सुपरविजन को लेकर निराशाजनक आंकड़े मिले हैं। प्रयागराज में 197 विद्यालय ऐसे हैं जहां जनवरी से एक बार भी सवोर्टिव सुपरविजन नहीं किया गया। प्रतापगढ़ में 202, वाराणसी में 31, आगरा में 749, अलीगढ़ में 77, आंबेडकर नगर में 34, अमरोहा में 285, औरैया में 179, अयोध्या में 185, आजमगढ़ में 37, बहराइच में 836, बागपत में सात स्कूल बिना सहयोगात्मक पर्यवेक्षण वाले हैं।
प्रदेश के स्कूलों की स्थिति
प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जहां सभी बड़े अफसर बैठते हैं, वहां के स्कूल में भी नियमों की अनदेखी हो रही है। बिना पर्यवेक्षण वाले 755 स्कूल हैं। प्रदेश के अन्य जिलों की बात करें तो महराजगंज में 136, महोबा में 172, मैनपुरी में 429, मथुरा में 686, मऊ में 97, मेरठ में 194, मीरजापुर में भी 194, मुरादाबाद में 171, पीलीभीत में 344 स्कूल ऐसे हैं, जहां के शिक्षकों और विद्यार्थियों को सहयोगात्मक पर्यवेक्षण नहीं मिला।
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नगर क्षेत्र के स्कूलों की अनदेखी
प्रयागराज में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के आंकड़ों को देखें तो नगर क्षेत्र के सब से अधिक 51 स्कूलों की अनदेखी की गई। यहां एआरपी नहीं पहुंचे। दूसरे पायदान पर शंकरगढ़ में 35 स्कूल सहयोगात्मक पर्यवेक्षण से दूर रहे। उरुवा के चार, सैदाबाद के तीन, प्रतापपुर के 19, फूलपुर के दो, मेजा के छह, मऊआइमा के एक, मांडा के 12, कोरांव के 22, कौड़िहार द्वितीय के तीन, करछना के 11, जसरा के पांच, होलागढ़ के चार, हंडिया के एक, धनूपुर के चार, बहरिया के 13 और बहादुरपुर के एक स्कूल में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण अब तक नहीं हुआ।
क्या बोले प्रयागराज के बीएसए?
प्रयागराज के बीएसए अनिल कुमार का कहना है कि स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने आदेशित किया है कि मई में इन स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर सहयोगात्मक पर्यवेक्षण किया जाए। विद्यार्थियों को निपुण बनाने के लिए हर संभव कोशिश आवश्यक है।