प्रयागराज में विंध्य एक्सप्रेसवे का काम तेज, 45 गांवों का अलाइनमेंट फाइनल
प्रयागराज में विंध्य एक्सप्रेसवे के 45 गांवों का अलाइनमेंट तय हो गया है, जबकि 33 गांवों में सर्वे जारी है। इस परियोजना के लिए 31 गांवों में रकबा और भू ...और पढ़ें

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HighLights
प्रयागराज में विंध्य एक्सप्रेसवे के 45 गांवों का अलाइनमेंट फाइनल।
33 गांवों में सर्वे का कार्य तेजी से जारी।
31 गांवों में भू-रिकॉर्ड की गड़बड़ी सुधारी गई।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। संगम नगरी के विकास में महत्वपूर्ण सड़क परियोजना विंध्य एक्सप्रेसवे का 45 गांवों का अलाइनमेंट का खाका खींच लिया गया है। अब 33 गांव ही शेष बचे हैं, जहां सत्यापन का कार्य तेजी से चल रहा है। सर्वे का कार्य यूपीडा की कंसल्टेंट एजेंसी द्वारा किया जा रहा है जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारी उस पर मुहर लगाएंगे।
प्रयागराज से भदोही, मीरजापुर होते हुए सोनभद्र तक जाने वाले 333 किमी के विंध्य एक्सप्रेसवे की स्वीकृति मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में दी गई थी। वैसे इसकी घोषणा महाकुंभ के दौरान ही हो चुकी थी। प्रयागराज के 84 गांवों से इस एक्सप्रेसवे के गुजरने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। इसमें सोरांव के 29, फूलपुर के 24 व हंडिया के 31 गांव शामिल हैं।
इनमें सोरांव के 15, फूलपुर के 24 व हंडिया के 12 गांवों समेत कुल 45 गांवों का यूपीडा की कंसल्टेंट एजेंसी ने मैपिंग कर प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया, जिसमें प्रशासन ने सर्वे कराया तो सोरांव के 14, फूलपुर के 16 व हंडिया के 11 गांवों सेमत कुल 31 गांवों में गाटा, रकबा व भूस्वामियों के नामों में संशोधन कराना पड़ा। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से 45 गांवों की फाइनल रिपोर्ट यूपीडा को भेजी गई।
अब सोरांव के छह, फूलपुर के 12 व हंडिया के 12 गांवों समेत 33 गांवों का सत्यापन का कार्य चल रहा है। इस तरह से कुल 78 गांवों के फाइनल होने के बाद छह ग्राम पंचायतें ही बचेंगी, जिसके लिए यूपीडा की ओर से प्रस्ताव आएगा तो आगे की कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल, पूरी प्रक्रिया में अभी एक से डेढ़ माह का और समय लग सकता है।
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विशेष भू-अध्याप्ति अधिकारी व एडीएम नमामि गंगे संजीव कुमार शाक्य ने बताया कि 45 गांवों की रिपोर्ट पहले ही जा चुकी है। अब 33 गांवों की सत्यापन रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।
परियोजना की प्रशासनिक नोडल अधिकारी तथा एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह ने बताया कि अलाइनमेंट और सत्यापन का कार्य पूरा होने के बाद यूपीडा की ओर से भूमि के बैनामों की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी, जिसके लिए तीनों तहसीलों के अधिकारियों को पहले से ही निर्देशित किया जा चुका है।