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    अराजक खनन-मूक व्यवस्था : अवैध बालू खनन से पुलों के आसपास यमुना नदी हो रही खोखली, प्रयागराज-कौशांबी में हादसे का खतरा

    By shyam mishra Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 10 Apr 2026 03:17 PM (GMT+05:30)

    प्रयागराज और कौशांबी में यमुना नदी के पुलों के पास अवैध बालू खनन से पुलों की नींव खोखली हो रही है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गई है। नैनी और कौशांबी म ...और पढ़ें

    प्रयागराज में नैनी स्थित मोहब्बतगंज के पास ईडीएफसी पुल के ठीक पास में यमुना नदी में हो रहा अवैध खनन। जागरण

    प्रयागराज में नैनी स्थित मोहब्बतगंज के पास ईडीएफसी पुल के ठीक पास में यमुना नदी में हो रहा अवैध खनन। जागरण 

    HighLights

    1. नैनी के मोहब्बतगंज, कौशांबी के महेला में रोज लाखों फीट बालू का अवैध खनन

    2. नैनी से लेकर लालापुर, कौशांबी तक माफिया नदी के बीच में निकलवा रहे बालू

    3. अधाधुंध बालू के अवैध खनन से शहर के कई मुहल्लों में कटान का भी बढ़ा खतरा

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। यमुना में अवैध खनन अब सीधे-सीधे पुलों की नींव पर हमला बन गया है। नैनी के मोहब्बतगंज में बने ईडीएफसी रेल पुल और गऊघाट के पुल के साथ कौशांबी में यमुना के पुलों के के पिलरों के आसपास सैकड़ों नावों से रोज लाखों घन फीट बालू निकाला जा रहा है।

    बेतहाशा खुदाई नदी के तल को खोखला कर रही 

    अप-डाउन स्ट्रीम में हो रही यह बेतहाशा खुदाई नदी के तल को खोखला कर रही है। इससे पुलों की नींव कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ रहा है। प्रयागराज में 17 किलोमीटर और कौशांबी में करीब 12 किमी लंबाई में यमुना का कलेजा चीरा जा रहा है और दो दर्जन से अधिक माफिया बेखौफ इस काले कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।

    खास-खास

    - 2 दर्जन से ज्यादा खनन माफिया यमुना में व्यापक स्तर बालू निकलवा रहे
    - 17 किमी की लंबाई में यमुना का चीरा जा रहा कलेजा, अपराधी भी शामिल

    एनजीटी के नियम की उड़ रही धज्जियां  

    जबकि एनजीटी के नियम सप्ष्ट हैं कि धारा में खनन प्रतिबंधित और पुलों के आसपास सुरक्षित दायरा अनिवार्य है। इसके बावजूद खनन विभाग, पुलिस और प्रशासन की चुप्पी इस पूरे खेल में संरक्षण देती नजर आ रही है। एमएनआइटी के विशेषज्ञों की चेतावनी भी नजरअंदाज है कि पिलरों के आसपास गहराई तक खनन से फाउंडेशन खिसक सकता है और संरचना अस्थिर हो सकती है। कटान से शहर के मुहल्ले पहले ही खतरे में हैं अब पुल भी दांव पर हैं।

    पुल के पिलर्स की नींव कमजोर होने की आशंका

    ईस्टर्न डेडीक्रेटेट फ्रेट कारीडोर (ईडीएफसी) के तहत नैनी के मोहब्बतगंज में यमुना नदी पर रेल पुल बनाया गया है। इस पर गुड्स ट्रेनों का संचालन हो रहा है। इसी पुल के पिलर्स के आसपास सैकड़ों नावों से बालू का अवैध खनन कराया जा रहा है। भोर से शाम तक रोज ही लाखों घन फीट बालू के निकाले जाने से पुल के पिलर्स की नींव के कमजोर होने की आशंका बढ़ती जा रही है।

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    काले कारनामे के खिलाफ कार्रवाई नहीं 

    अवैध बालू खनन रोकने के लिए जिम्मेदार खनन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की नाक के नीचे चल रहे इस काले कारनामे के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं की सकी है। नैनी के मड़ौका से लेकर लालापुर के प्रतापपुर तक इस तरह बालू के हो रहे अवैध खनन से शहर के कई मोहल्लों में कटान बढ़ने की आशंका उत्पन्न हो लगी है।

    एक दर्जन मुहल्ले कटान की जद में  

    प्रयागराज में सादियापुर, दरियाबाद, गऊघाट, बलुआघाट, ककरहा घाट, मीरापुर, करैलाबाग समेत एक दर्जन मुहल्ले पहले से कटान की जद में हैं, जो अब भारी पैमाने पर बालू के अवैध खनन से बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं। करैलाबाग में स्थापित इंटेकवेल की ओर से पानी खिसककर नैनी की ओर जा रहा है, जिससे गर्मी के दिनों में शहर में पेयजल का संकट खड़ा हो सकता है। इसी इंटेकवेल से शहर की 35 प्रतिशत आबादी को जलापूर्ति की जाती है।

    क्या कहते हैं वरिष्ठ खान अधिकारी? 

    वरिष्ठ खान अधिकारी प्रयागराज केके राय का कहना है कि यमुना नदी में अवैध बालू खनन को लेकर स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। पुलों के आसपास अप और डाउन स्ट्रीम में खनन का पट्टा नहीं दिया जाता है। यदि ऐसा है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अवैध खनन पर अधिकारियों का प्रभावी नियंत्रण नहीं

    खनन विभाग द्वारा कौशांबी में सात घाटों पर बालू खनन का पट्टा दिया गया है। जबकि खनन लगभग डेढ़ दर्जन स्थानों पर बालू माफिया द्वारा कराया जाता है। विभागीय अधिकारियों द्वारा अवैध खनन न होने के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन, यमुना का सीना चीरकर बीच धारा में धड़ल्ले से चलती पोकलैंड और बैकहो लोडर (जेसीबी) व नावों के माध्यम से घाटों तक किए जा रहे बालू के परिवहन इस बात का साफ संकेत हैं कि अवैध खनन पर अधिकारियों का कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है।

    यहां भी धड़ल्ले से हो रहा अवैध बालू खनन 

    ग्रामीण एवं आसपास के लोग बताते हैं कि राजापुर में यमुना नदी पर बने पुल के कुछ दूरी पर ही शाहपुर भवनसुरी, महेवााघाट और दलेलागंज में खनन होता है। इसी प्रकार महिलाघाट पर यमुना में बने पुल के दाएं और बाएं तरफ भी खनन हो रहा है। यह पुल मऊ, चित्रकूट जनपद तक बना है। इन दोनों पुलों से आवागमन होता है। वहीं, चक गुलाम आलम से चित्रकूट में मुस्तकिल तारी तक और राजापुर में ही एक और पुल राम वनगमन मार्ग (कालिंदी पर) पर बन रहा है। चक गुलाम आलम की तरफ तो नहीं, लेकिन चित्रकूट की तरफ खनन होता...।

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