रायबरेली में बड़ा फर्जीवाड़ा, नकली दस्तावेजों से बनवाए दो पासपोर्ट; लखनऊ कार्यालय की सूचना पर FIR दर्ज
रायबरेली में एक व्यक्ति पर फर्जी दस्तावेजों और गलत विवरण का उपयोग करके दो पासपोर्ट बनवाने का आरोप है। लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर पुल ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
फर्जी दस्तावेजों से दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए गए।
लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय की रिपोर्ट पर पुलिस ने जांच की।
आरोपी परवेज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
संवाद सूत्र, सलोन (रायबरेली)। फर्जी दस्तावेजों और गलत विवरण का इस्तेमाल कर दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए गए। लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय मिली रिपोर्ट के आधार के पर पुलिस ने मामले में एक प्यक्ति के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की है।
पासपोर्ट कार्यालय लखनऊ से पत्र मिला, जिसमें मियां साहब का फाटक के परवेज के विरुद्ध जांच का उल्लेख किया गया था। जांच की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक को सौंपी गई। इसके बाद अभिलेखों के परीक्षण, स्थानीय सत्यापन के बाद सामने आया कि वर्ष 2007 में परवेज ने वास्तविक नाम और जन्मतिथि 15 अप्रैल 1970 के आधार पर पासपोर्ट संख्या G6360260 बनवाया था।
इस पासपोर्ट का उपयोग विदेश यात्रा के लिए भी किया गया। विदेश में रहने के बाद वह भारत आकर सलोन कस्बे में रहने लगे। आरोप है कि इसके बाद वर्ष 2016 में उसने दोबारा पासपोर्ट बनवाने के लिए व्यक्तिगत विवरण में बदलाव कर लिया।
जांच में क्या आया सामने?
जांच में पाया गया कि उसने जन्मतिथि बदलकर 2 मार्च 1987 दिखाई और आधार कार्ड सहित अन्य अभिलेखों में संशोधित विवरण प्रस्तुत कर नया पासपोर्ट संख्या P1112287 प्राप्त कर लिया। इसके आधार पर पुनः विदेश यात्रा भी की।
पुलिस का कहना है कि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपित ने पहले से जारी पासपोर्ट की जानकारी छिपाते हुए अपना नाम, जन्मतिथि एवं अन्य व्यक्तिगत विवरण आंशिक रूप से बदलकर दूसरा पासपोर्ट हासिल किया। इस तरह कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनका उपयोग अपने निजी लाभ के लिए किया गया।
उपनिरीक्षक अमरनाथ सरोज की तहरीर पर कोतवाली में आरोपित के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 319(2), 318(4), 336(3), 340(2) तथा पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12(1)(बी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
कोतवाली प्रभारी बालेंदु गौतम का कहना है कि मामले की विवेचना के दौरान दस्तावेजों की सत्यता, विदेश यात्रा के रिकार्ड व अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।