रायबरेली रेलवे स्टेशन पर टिकट के लिए लग रही लंबी लाइन, टेंडर न होने से बंद हैं वेंडिंग मशीनें
रायबरेली रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को टिकट के लिए लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। पांच महीने से ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनें (एटीवीएम) बंद पड़ी ...और पढ़ें
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लोको लाबी में मशीन से लोको पायलट कैमरे की नजर में लगाता हाजिरी। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, रायबरेली। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगवाई गई आटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनें (एटीवीएम) बंद पड़ी हैं। पांच मशीनों में तीन मशीनें स्टेशन पर हैं, जो पांच महीने से टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण बंद हैं। ऐसे में यात्रियों को टिकट लेने के लिए लंबी लाइन में लगनी पड़ती है।
स्टेशन पर कुल पांच एटीवीएम मशीनें कोविड के दौरान स्टेशन आई थी। इसमें दो में तकनीकी खामी आने पर पांच माह पहले लखनऊ मुख्यालय भेज दिया गया था, जबकि तीन मशीनें हैं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण इन्हें पांच माह से बंद करके रखा गया है। इसके कारण यात्रियों को परेशानियां हो रही हैं।
स्टेशन पर ज्यादातर समय सिर्फ एक टिकट काउंटर ही खुलता है। इस पर भी यात्रियों की भीड़ रहती है। सबसे ज्यादा दिक्कत उस समय होती है, जब ट्रेनें आ चुकी होती हैं। सुबह कुछ ऐसा माहौल बना कि ट्रेन आकर खड़ी थी और टिकट लेने वालों की लाइन लगी थी। ऐसे में यात्रियों के बीच धक्कामुक्की भी हुई।
रेलवे स्टेशन से रोजाना औसतन 35 जोड़ी यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें सफर करने वाले यात्रियों की संख्या लगभग हजारों में रहती है। सुबह और शाम को ट्रेनों की संख्या ज्यादा रहती है। इसलिए यात्रियों की भीड़ भी अधिक होती है। ऐसे में टिकट लेने के लिए काउंटर पर लाइन लगी नजर आती है।
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यात्रियों को टिकट लेने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए तीन एटीवीएम की व्यवस्था कराई गई थी, जिनमें टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण एटीवीएम ही चल पा रही हैं। पिछले पांच महीने से एक भी एटीवीएम नहीं चल रही है।
वाणिज्य निरीक्षक प्रभारी डीडी शुक्ल ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण एटीवीएम बंद है, जिन्हें जल्द शुरू कराएंगे। जिसको लेकर विभागीय पत्राचार किया गया है। भीड़ अधिक होने पर दो काउंटर चलाए जाते हैं।
चार टिकट काउंटर, खुलता सिर्फ एक
टिकट काउंटर तो चार बने हैं, लेकिन सिर्फ एक ही खुलता है। इससे मुश्किल और बढ़ जाती है। सिर्फ एक काउंटर पर टिकट बनवाने के लिए यात्रियों को काफी इंतजार करना पड़ता है।
ट्रेन आने वाली होती है या फिर प्लेटफॉर्म पर खड़ी होती है तो यात्रियों को इस बात का डर बना रहता है कि कहीं गाड़ी छूट न जाए। ऐसे में जल्दी टिकट बनवाने के लिए धक्का मुक्की और मारा मारी की नौबत आ जाती है।