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    नदी नहीं, मौत की धारा: बहल्ला के जहरीले पानी ने दर्जनों गांवों में मचाया हाहाकार!

    Updated: Wed, 07 Jan 2026 06:50 PM (GMT+05:30)

    टांडा की बहल्ला नदी फैक्ट्रियों के केमिकल से जहरीली हो चुकी है। इसका काला पानी दर्जनों गांवों के हैंडपंपों और फसलों को बर्बाद कर रहा है। लोग पीलिया और ...और पढ़ें

    बहल्‍ला नदी

    बहल्‍ला नदी

    HighLights

    1. किसानों की फसलों को हो रहा लगातार नुकसान, लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में, ग्रामीण पीने के पानी के लिए परेशान

    संवाद सहयोगी, जागरण, टांडा। जनपद की नदिया प्रदूषण मुक्त नहीं हो पा रही हैं। फैक्ट्रियों के प्रदूषण की वजह नदी जहर की धारा बनती जा रही है। जनपद की सीमा से गुजरने वाली बहल्ला नदी की स्थिति कुछ ऐसी ही हो गई है। पडोसी राज्य उत्तराखंड के शहर काशीपुर से निकलकर टांडा क्षेत्र से गुजरने वाली बहल्ला नदी अब जीवनदायिनी नहीं, बल्कि ज़हर की धारा बन चुकी है।

    औद्योगिक इकाइयों द्वारा लगातार केमिकल व अपशिष्ट छोड़े जाने से नदी का पानी पूरी तरह दूषित हो गया है। नदी में बहता पानी का मेला व काला दिखाई देना ही इसकी गवाही दे रहा है। चूंकि इसका असर अब केवल बहल्ला नदी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी नहरों, हैंडपंपों और भूजल तक प्रदूषण पहुंच चुका है। इससे परेशान क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग स्वच्छ पेयजल को तरस रहे हैं।

    यह समस्या नई नहीं है। काफी समय से है लेकिन सरकारी मशीनरी इससे कोई राहत नहीं दिला पा रही है। समय-समय पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग मुरादाबाद की टीम आती हैं और पानी के नमूने लेकर लौट जाती हैं, मगर नदी के पानी में कोई बदलाव महसूस नहीं होता। ग्रामीणों का कहना है कि उत्तराखंड के काशीपुर से बहने वाली यह नदी आगे सैदनगर के बैजना और मुरादाबाद के गांव खबरियां की सीमा में पहुंच कर कोसी में समा जाती है।

    कोसी आगे जाकर पटवाई सीमा में रामनगर में मिलती है। इसी तरह नालों से आ रहे दूषित पानी के कारण उनके गांवों के हैंडपंपों का पानी कुछ देर बाद ही पीला हो जाता है। कपड़े धोने पर पीले पड़ जाते हैं। बर्तन तक बदरंग हो रहे हैं। कई बार पानी उबालकर पीना पड़ता है। हालात इतने खराब हैं कि लोग पशुओं को भी यह पानी पिलाने से बच रहे हैं।

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    मजबूरी में केवल एक-दो इंडिया मार्का हैंडपंपों पर निर्भरता है, लेकिन उनमें से भी अधिकांश से दूषित पानी ही निकल रहा है। दूषित पानी के कारण क्षेत्र में पीलिया, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग और संक्रामक बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रोहित शर्मा व मयंक आदि ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग या स्वास्थ्य विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।

    किसानों पर दोहरी मार

    बहल्ला नदी से जुड़ी नहरों का पानी खेतों में पहुंचने से किसानों की फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। दूषित पानी से सिंचाई करने पर फसल की बढ़वार रुक गई हैं। मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होती जा रही है। किसानों का कहना है कि गेहूं, धान तथा सब्जियों आदि फसलों में भारी नुकसान हो रहा है।

    मुख्यमंत्री के आदेशों की अनदेखी

    हैरानी की बात यह है कि एक पखवाड़े पहले मुख्यमंत्री ने रामगंगा नदी में किसी भी प्रकार का अपशिष्ट न डालने के सख्त निर्देश दिए थे। बावजूद इसके बहल्ला नदी के जरिए यह प्रदूषित पानी पहले कोसी नदी और फिर रामगंगा में मिल रहा है। इससे साफ है कि प्रशासनिक स्तर पर आदेशों का पालन नहीं हो रहा।

    जांच और कार्रवाई की मांग

    सामाजिक संगठनों भाकियू, भाकियू लोकशक्ति, तथा ग्रामीणों ने प्रशासन से बहल्ला नदी, नहरों और पेयजल स्रोतों की तत्काल वैज्ञानिक जांच, दोषी फैक्ट्रियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

     

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