जौहर यूनिवर्सिटी रेड: ED को मिले 494 करोड़ के अनसुलझे राज, हार्ड डिस्क जब्त; 11 बड़ी फर्में भी जांच के घेरे में
ईडी ने जौहर विश्वविद्यालय में 16 घंटे की जांच के बाद हार्ड डिस्क जब्त की, जहां 494 करोड़ रुपये के खर्च का ब्योरा नहीं मिला। विश्वविद्यालय प्रबंधन और दानदाताओं पर कार्रवाई की तलवार लटकी है, क्योंकि वे आय का स्रोत नहीं बता पा रहे हैं।

जौहर विश्वविद्यालय से ईडी की टीम जाने के बाद सूना पड़ा द्वार। जागरण
जागरण संवाददाता, रामपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय में 16 घंटे तक सघन जांच-पड़ताल के बाद बुधवार देर रात प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमें हार्ड डिस्क लेकर लौट गईं। अब जौहर विवि के साथ उसके बड़े दानदाताओं पर कार्रवाई की तलवार लटकी है।
प्रबंधन जौहर विवि के निर्माण पर अनुमानित खर्च 494 करोड़ का ब्योरा नहीं दे सका है। जौहर ट्रस्ट को दान देने वाले भी आय का स्रोत नहीं बता पा रहे हैं। ऐसे में वे भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। इसके चलते उनकी धड़कनें भी बढ़ी हुई हैं।
ईडी की टीमों ने बुधवार सुबह सात बजे जौहर विश्वविद्यालय और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट कार्यालय सहित रामपुर में छह, सहारनपुर में सीए दीपक के कार्यालय व आवास और दिल्ली में आजम के करीबी के यहां छापा मारा था।
रात लगभग 10 बजे तक विश्वविद्यालय निर्माण पर हुए खर्च संबंधी दस्तावेजों को खंगाला गया। दान के नाम पर जौहर ट्रस्ट में लाखों-करोड़ों की धनराशि भेजने वालों का लेखाजोखा भी जुटाया। अकाउंट विभाग से जुड़े कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की गई।
हालांकि, अधिकांश कर्मचारी वर्ष 2017 के बाद से यहां नियुक्त हैं, इसलिए इससे पूर्व विश्वविद्यालय निर्माण पर हुए खर्च का ब्योरा देने में असमर्थता जताई। सूत्रों के अनुसार, अकाउंट विभाग से टीम कंप्यूटर की एक हार्ड डिस्क भी अपने साथ ले गई है।
इसमें संभवत: वर्ष 2017 के बाद विश्वविद्यालय के आय-व्यय का ब्योरा समाहित है। हालांकि, जौहर ट्रस्ट के पास विश्वविद्यालय निर्माण पर खर्च किए गए 88 करोड़ के सरकारी बजट व दान में दर्शाई गई करोड़ों की धनराशि के अभिलेख उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा विश्वविद्यालय के लिए खरीदी गई जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हुए बजट का भी लेखाजोखा नहीं है। इसके चलते ईडी की ओर से किए गए कई सवाल अनुत्तरित रह गए।
हालांकि, ईडी के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से मुहैया कराए गए अभिलेखों को कब्जे में ले लिया है। इनमें उन 11 फर्मों का ब्योरा भी शामिल है, जिन्होंने जौहर ट्रस्ट को चंदे के नाम पर करोड़ों की धनराशि खाते में भेजी है।
जानकारों के अनुसार, अब ईडी की टीम जौहर विश्वविद्यालय से जुटाए गए अभिलेखों का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके बाद जौहर ट्रस्ट के बैंक खातों से करोड़ो का लेनदेने करने वाली फर्मों से भी आय के स्रोत का ब्योरा मांगेगी।
अगर फर्में सही ब्योरा उपलब्ध करा पाती हैं तो कार्रवाई की जद से वह फर्में बाहर हो जाएंगी। अन्यथा की स्थिति में जौहर ट्रस्ट के साथ ही फर्म संचालक भी ईडी की कार्रवाई की जद में होंगी।
ईडी से जुड़े जानकार बताते हैं कि विश्वविद्यालय निर्माण में खर्च हुई धनराशि का अगर जौहर ट्रस्ट ब्योरा नहीं दे पाएगा तो ऐसे में कालाधन का उपयोग माना जाएगा। इसको लेकर प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग के तहत ट्रस्ट व उससे जुड़े लोगों पर ईडी प्राथमिकी दर्ज करा सकती है।
साथ ही विश्वविद्यालय और ट्रस्ट के बैंक खाते भी फ्रीज किए जा सकते हैं। इस कार्रवाई की आशंका से अब जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोग सहमे हुए हैं। माना जा रहा है कि बहुत जल्द ईडी अपने पत्ते खोल देगी।
दानदाता फर्मों पर भी नजर
आयकर विभाग से ईडी को मिले इनपुट में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के बहीखातों में उल्लिखित कई दानदाता अस्तित्वहीन संस्थाओं का ब्योरा भी शामिल है। इनमें शामिल 11 फर्मों के नाम का भी उल्लेख किया है। इनमें से अधिकांश फर्म अस्तित्वहीन पाई गई हैं। माना जा रहा है कि ईडी इन फर्म संचालकों को भी अपनी जांच के दायरे में लाएगी।
इन फर्मों से किया गया दान का दावा
- पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, लखनऊ
- सालार ओवरसीज लिमिटेड, मुरादाबाद
- ए. आर. एजुकेशन ट्रस्ट, दिल्ली
- अर्थ कम्युनिकेशल इंफ्राटेक (प्राइवेट) लिमिटेड, नोएडा
- रामिगेट इंफ्रा डेवलपर्स (प्राइवेट) लिमिटेड, नई दिल्ली
- रायल एम्पोरिया फ्रा टेक (प्राइवेट) लिमिटेड
- फैजा परवीन, मुरादाबाद
- मोहम्मद हसीब, बहराइच
- रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड (रद)
- वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड
- ड्रीम ऑफ पर्ल रियल्टी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड
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