रामपुर: 500 करोड़ के विवाद में फंसी जौहर यूनिवर्सिटी, आजम खान के विक्टिम कार्ड पर BJP का पलटवार
जौहर विश्वविद्यालय पर कार्रवाई को लेकर रामपुर में सियासत तेज। सपा-कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता रही हैं, तो भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार की पाठशाला करार दिया है। जानें पूरी वजह।

आजम खान और जौहर विश्वविद्यालय
HighLights
जौहर विश्वविद्यालय पर कार्रवाई को लेकर सपा-कांग्रेस कर रही शिक्षा के मंदिर पर हमले का शोर
भाजपा नींव से लेकर इमारत बुलंद होने तक विश्वविद्यालय को बता रही भ्रष्टाचार की पाठशाला
अनिल अवस्थी, रामपुर। निर्माण से लेकर संचालन तक विवादों में घिरे जौहर विश्वविद्यालय पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कई सवालों के घेरे में कैद आजम खान इस मुद्दे पर विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं। उनकी मंशानुरूप ही शिक्षा के मंदिर पर हमले का शोर मचाते हुए कांग्रेस और सपा अपना सियासी लाभ तलाशती नजर आ रही है।
उधर, भाजपा इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार बता रही है। इन सबके बीच स्थानीय प्रशासन की न्यायिक प्रक्रिया व केंद्रीय एजेंसियों की जांच आहिस्ता-आहिस्ता रफ्तार भरती नजर आ रही है।
लगभग आठ वर्षों से कानूनी शिकंजे में फंसे सपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान की सलामती को शायद ही सपा व कांग्रेस पहले कभी इतनी फिक्रमंद हुई होंगी। अब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। दोनों ही दल आजम से हमदर्दी जताकर उनके समर्थकों को अपने पाले में खींचने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं।
उधर, कानूनी दांवपेंच में फंसे आजम खान के पास आयकर विभाग को देने के लिए न कोई ब्योरा है और न ही जवाब। विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च हुए लगभग पांच सौ करोड़ का लेखाजोखा जुटाना जौहर ट्रस्ट के बस की बात नहीं है। ऐसे में कार्रवाई से बचने को आजम खान के तरकश में सबसे असरदार तीर शिक्षा के मंदिर पर हमले का शोर मचाना ही बचा है।
विश्वविद्यालय के अवैध घोषित 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद छात्र-छात्राओं को धरने पर बैठाने की कवायद भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। इसी दौरान जब जंतर-मंतर पर जेन-जी का धरना प्रदर्शन हुआ तो इस मुद्दे को उनके बीच ले जाने के भी प्रयास हुए।
सपा की ओर से आयोजित हर प्रेसवार्ता में विश्वविद्यालय के खिलाफ जारी आदेश को सियासी बताते हुए छात्र-छात्राओं के भविष्य का हवाला दिया गया। जबकि, यह स्पष्ट है कि अगर कोई न्यायिक आदेश गलत व मनमाने ढंग से किया गया है तो उसके लिए अपील का रास्ता खुला रहता है।
आजम की हमदर्दी हासिल करने को रामपुर पहुंचे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी आदेश को सियासी बताकर छात्र-छात्राओं को लड्डू खिलाए। इसके बाद 12 अगस्त को आनन-फानन में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव विश्वविद्यालय पहुंच गए।
उन्होंने न सिर्फ सरकार बनने पर आजम खान को गृहमंत्रालय दिलाने की बात कही बल्कि, विश्वविद्यालय के अवैध निर्माण के खिलाफ आदेश करने वाले अधिकारियों को देख लेने की चेतावनी भी दे डाली। सपा के नगर अध्यक्ष आसिम राजा प्रशासन, आयकर व ईडी की कार्रवाई को विश्वविद्यालय को खत्म करने की साजिश बताते हैं।
वहीं, भाजपा विधायक आकाश सक्सेना सवाल उठाते हैं कि आजम खान के जौहर ट्रस्ट ने अगर चंदे की रकम से विश्वविद्यालय का निर्माण कराया है तो वह आयकर विभाग को इसका ब्योरा क्यों नहीं उपलब्ध करा पा रहा। जिन दानदाताओं ने करोड़ों रुपये दिए उनके पास भी रकम का कोई हिसाब नहीं है।
जिन फर्मों से करोड़ो का दान मिलने का दावा किया गया उनमें अधिकांश अस्तित्व में ही नहीं हैं। सपा सरकार में सरकारी योजनाओं के नाम पर स्वीकृत 88 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च कर दिए गए।
अंत में सबसे अहम सवाल यह है कि अगर विश्वविद्यालय का निर्माण वास्तव में अल्पसंख्यकों और वंचितों को शिक्षित करने के उद्देश्य से कराया गया तो उसके ट्रस्ट में सिर्फ आजम खान के परिवार के लोग ही क्याें शामिल हैं।
इन सवालों के आधार पर भाजपा विश्वविद्यालय को शिक्षा के मंदिर के बजाय भ्रष्टाचार की पाठशाला बता रही है। हालांकि, समय विधानसभा चुनाव का है, इसलिए अभी इस मुद्दे पर राजनीति और गरम होगी। न्यायिक कार्रवाई सियासी उतार-चढ़ाव से जोड़कर आंकी जाएगी
करीबियों से चल रही ईडी की पूछताछ
जौहर विश्वविद्यालय में छापेमारी के दौरान ईडी ने कई दस्तावेज कब्जे में लेकर उनकी छानबीन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक ईडी ने अकाउंट्स से जुड़े दो कर्मचारियों को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की है। इसके अलावा ए एंड एस एंटरप्राइजेज के मालिक मोहम्मद सालिम से भी पूछताछ की जा रही है। मोहम्मद सालिम आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम के दोस्त हैं।
महज फार्मेसी में हुए 125 छात्र-छात्राओं के प्रवेश
विवादों से जूझते जौहर विश्वविद्यालय से छात्र-छात्राओं की दूरी भी बढ़ती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इस शैक्षिक सत्र में विश्वविद्यालय में फार्मेसी के विषयों में महज 125 प्रवेश हुए हैं। इसको लेकर भी विश्वविद्यालय प्रबंधन दबाव में है। वहीं विश्वविद्यालय में कुल छात्र संख्या भी एक हजार तक सिमट गई है। जबकि, विश्वविद्यालय की साइट पर यह संख्या तीन हजार प्रदर्शित हो रही है।
