न अस्पताल में मिला इलाज, न एंबुलेंस में मिली ऑक्सीजन; रामपुर के कुलदीप ने तड़प-तड़प कर तोड़ा दम
रामपुर में ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में घायल कुलदीप सिंह की इलाज और ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई। नोवा अस्पताल ने भर्ती नहीं किया, जिला अस्पताल में लाप ...और पढ़ें

मुरादाबाद के मझोला थाने में खड़ी क्षतिग्रस्त एंबुलेंस इनसेट में मृतक कुलदीप सिंह का फाइल फोटो
HighLights
रामपुर में ट्रैक्टर ट्राली की टक्कर से घायल हुआ था कुलदीप
पहले नोवा व जिला अस्पताल से लौटाया, मुरादाबाद में मौत
जागरण संवाददाता, रामपुर। सिस्टम की बेपरवाही कहें या फिर खत्म हुई आक्सीजन... रामपुर के कुलदीप ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। शहजादनगर में ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए कुलदीप को पहले नोवा अस्पताल ने गेट से ही बैरंग लौटा दिया। फिर जिला अस्पताल में भी इलाज के नाम पर खानापूरी हुई।
परिवार के लोगों ने आपत्ति जताई तो महज ग्लूकोज की बोतल लगाकर मेरठ हायर सेंटर ले जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। हर गुजरते पल को देख मजबूर परिवार के लोगों ने निजी एंबुलेंस की और मुरादाबाद की ओर जाने लगे। पर, एंबुलेंस में कुलदीप की जान बचाने को लगाई गई आक्सीजन खत्म हो गई।
गाड़ी में बैठे चचेरे भाई हरविंदर ने शोर मचाया। एंबुलेंस चालक इसरार ने कुछ कोशिश की तो मिनट की सांसें लौंटी। हालांकि, मुरादाबाद में साई अस्पताल पहुंचने से पहले सिलिंडर में भरी ‘जिंदगी’ खत्म हो गई और कुलदीप ने परिवार के लोगों के सामने ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
पटवाई के अहमदनगर गांव निवासी 47 वर्षीय कुलदीप सिंह बुधवार रात लगभग आठ बजे बाइक से कहीं जा रहे थे। अहमदनगर-पुरैना मार्ग पर सामने से आ रहे ट्रैक्टर ट्राली ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। हादसे में कुलदीप के सिर व शरीर में अन्य जगह गंभीर चोट आईं।
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जानकारी पर पहुंचे स्वजन पहले उन्हें लेकर रामपुर स्थित नोवा अस्पताल गए। यहां हालत गंभीर देख डाक्टर ने इलाज की सुविधा न होने की बात कहकर मना कर दिया। इसके बाद स्वजन उन्हें लेकर रात करीब सात बजे जिला अस्पताल पहुंचे।
कुलदीप के चचेरे भाई हरविंदर का आरोप है कि जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में उन्हें भर्ती तो कर लिया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। जब स्वजन ने हंगामा किया तो एक कर्मचारी ने ग्लूकोज की बोतल लगा दी। सीटी स्कैन कराने को कहा तो वह भी नहीं कराया। अस्पतालकर्मियों ने हालत गंभीर बताते हुए मेरठ ले जाने को कह दिया।
हरविंदर ने बताया कि इसके बाद अस्पताल के बाहर से 2,500 रुपये किराये पर प्राइवेट एम्बुलेंस लेकर मुरादाबाद के कासमास अस्पताल के लिए निकले। रामपुर की सीमा से बाहर निकलने पर एम्बुलेंस में मरीज के लिए लगे सिलिंडर में आक्सीजन खत्म हो गई।
इस पर एम्बुलेंस चालक इसरार को बताया तो उसने गाड़ी रोककर सिलिंडर में चाबी लगाई, जिससे आक्सीजन चालू हो गई। हालांकि कुछ देर बाद फिर आक्सीजन खत्म हो गई। कुलदीप की बिगड़ती हालत और कासमास दूर होने के चलते दिल्ली रोड पर ही साई अस्पताल ले गए। हालांकि, तब तक कुलदीप की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद चालक फरार हो गया और गुस्साए स्वजन ने एंबुलेंस में तोड़फोड़ की।
मझोला इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार ने बताया कि तोड़फोड़ के बाद एंबुलेंस थाने ले आए हैं। एंबुलेंस पर पड़ा नंबर गलत है। वहीं, पंजीकरण नंबर की जांच की तो एंबुलेंस बरेली के मिनी बाईपास स्थित खुसरो हास्पिटल की निकली। इस पर दर्ज मोबाइल नंबर बंद है। मामले की जांच की जा रही है।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बीसी सक्सेना ने बताया कि शाम लगभग सात बजे सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए कुलदीप को जिला अस्पताल लाया गया था। यहां प्राथमिक उपचार देने के बाद हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया था।
सरकारी एंबुलेंस जिला अस्पताल नहीं उपलब्ध कराता है। इसके लिए तीमारदार को अपने मोबाइल से 108 पर काल करनी होती है। रात दस बजे कुछ लोग दोबारा कुलदीप को लेकर जिला अस्पताल आए, तब उसकी मौत हो चुकी थी और पुलिस को सूचना देकर उसका शव मोर्चरी में रखवा दिया गया था।