₹494 करोड़ का हिसाब और संदिग्ध दान का आरोप: आजम खां के जौहर ट्रस्ट पर आयकर विभाग का बड़ा फैसला जल्द
आयकर विभाग आजम खां के मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट पर ₹494 करोड़ के हिसाब और संदिग्ध दान को लेकर जल्द बड़ा फैसला सुना सकता है। ट्रस्ट को वित्तीय अनियमितताओं और कर चोरी के आरोपों पर नोटिस दिए गए थे, जिसके जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं है।

आजम खान और जौहर विश्वविद्यालय
HighLights
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से दोनों नोटिसों के जवाब मिलने के बाद फैसला सुनाने की तैयारी
2015-16 से 2020 तक आय और व्यय व संदिग्ध फर्मों से मिले दान का साक्ष्यों सहित मांगा था हिसाब
जागरण संवाददाता, रामपुर। आजम खां के मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट पर ईडी के साथ आयकर विभाग की कार्रवाई का साया मंडराने लगा है। आयकर विभाग ने ट्रस्ट को अलग-अलग नोटिस भेजकर वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2020 तक आय और व्यय व संदिग्ध फर्मों से मिले दान का साक्ष्यों सहित हिसाब मांगा था। ट्रस्ट की ओर से जवाब भी दे दिया गया है। अब आयकर विभाग कभी भी अपना फैसला सुना सकता है।
आयकर विभाग के उपायुक्त जसवंत सिंह ने 21 जुलाई को मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर भेजे गए नोटिस में वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक ट्रस्ट के बैंक खातों से हुए लेनदेन का साक्ष्यों के साथ विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
बैंक खातों में एक लाख रुपये और उससे अधिक की अन्य जमा राशियों के स्रोत का विवरण देने के साथ जौहर विश्वविद्यालय के नाम पर ट्रस्ट/विश्वविद्यालय की अचल संपत्तियों में निवेश के स्रोत का हिसाब भी मांगा था।
नोटिस में कहा गया था कि जिला मूल्यांकन अधिकारी और आयकर विभाग की ओर से 10 नवंबर 2023 को प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में 59 भवन हैं और इन भवनों के निर्माण की वास्तविक लागत 494.46 करोड़ रुपये है।
इसमें किए गए निवेश के स्रोत का पूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण दें। इसके अतिरिक्त भूमि, फर्नीचर और अन्य चल वस्तुओं पर किए गए निवेश के स्रोत का भी ब्योरा मांगा था।
इसके बाद आयकर विभाग ने 24 जुलाई को जौहर ट्रस्ट को भेजे दूसरे नोटिस में कहा था कि जिन 11 फर्मों से आपको दान प्राप्त हुआ है, उसके संबंध में दान की राशि, बहीखाता, दान की रसीद, आयकर रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और अन्य प्रासंगिक दस्तावेज प्रदान करें, जो पहचान, साख और दान राशि की प्रामाणिकता को सिद्ध करते हों।
सितंबर 2023 में आयकर विभाग की जौहर ट्रस्ट विश्वविद्यालय में तलाशी और ज़ब्ती की कार्रवाई के दौरान भी इसका ब्योरा नहीं दिया गया था। इस पर आयकर विभाग की टीम ने टिप्पणी की थी कि पूछताछ के दौरान यह पता चला कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के बहीखातों में उल्लिखित कई दानदाता अस्तित्वहीन संस्थाएं हैं।
इसके साथ ही उसने सभी 11 फर्मों के नाम का भी उल्लेख किया था। सूत्र बताते हैं कि जौहर ट्रस्ट ने दोनों नोटिसों के जवाब दे दिए हैं, हालांकि आयकर विभाग उससे संतुष्ट नहीं है। वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल कपूर ने बताया कि आयकर विभाग अगर आय-व्यय संबंधी दिए गए साक्ष्यों से संतुष्ट नहीं होता है तो उसे अघोषित आय मानते हुए 60 प्रतिशत आयकर और तीन गुणा तक जुर्माना वसूल कर सकता है।
आयकर रिटर्न पर भी उठाए थे सवाल
जौहर ट्रस्ट की ओर से 2020-21 से 2023-24 तक चार वर्षों का आयकर रिटर्न दाखिल किया गया था। इसमें दर्शाई गई आय के सापेक्ष दो से तीन गुणा अधिक धनराशि बैंक अकाउंट में पाई गई। इसको लेकर भी आयकर विभाग ने सवाल उठाते हुए कहा था कि ट्रस्ट ने बैंक डिपाजिट और बताई गई आय के बीच के अंतर का मिलान नहीं किया है।
बैंक डिपाजिट और बताई गई इनकम के बीच का अंतर ट्रस्ट द्वारा की जा रही गैर-वास्तविक गतिविधियों की ओर इशारा करता है। आयकर विभाग ने 23 जून को वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी, कर चोरी, सरकारी धन के दुरुपयोग, विश्वविद्यालय परिसर में मस्जिद निर्माण और नौ सदस्यीय ट्रस्ट में परिवार के ही पांच सदस्यों को शामिल करने जैसे आरोप साबित होने पर ट्रस्ट का पंजीकरण रद कर दिया था।
