'स्ट्रेचर नहीं तो गोद ही सही...' रामपुर जिला अस्पताल की यह तस्वीर सिस्टम पर उठा रही सवाल
रामपुर जिला अस्पताल में मरीजों को स्ट्रेचर और स्टाफ की कमी से जूझना पड़ रहा है, जिससे तीमारदारों को मरीजों को गोद में उठाना या खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ ...और पढ़ें

जिला अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने पर हाथों पर उठाकर अपने मरीज को ले जाते युवक। जागरण
HighLights
जिला अस्पताल में रोजाना भर्ती हो रहे 150 मरीज
मरीजों की भीड़ के दबाव के चलते कम पड़ रहे संसाधन
जागरण संवाददाता, रामपुर। जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों के तीमारदार को स्ट्रेचर नहीं मिल पा रहा है। काफी इंतजार के बाद मिल भी जाए तो उसे खींचने के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं मिलता। ऐसे में तीमारदार को अपने मरीज को गोद में लेकर जाना पड़ता है या फिर खुद ही स्ट्रेचर खींचना पड़ रहा है।
शुक्रवार को जिला अस्पताल की पड़ताल में इस तरह के नजारे कई बार दिखाई दिए, जब तीमारदार अपने मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाते दिखाई दिए। पटवाई के बहपुरा के अजय कुमार को उनके स्वजन पूर्वाह्न करीब 11 बजे तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल लेकर आए थे।
उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाने के लिए इमरजेंसी में मौजूद कर्मचारियों से कहते रहे, लेकिन स्ट्रेचर को लेकर काेई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। थोड़ी देर इंतजार करने को कहा गया। उन्हें किसी तरह सहारा देकर कुर्सी पर बैठाकर स्वजन स्ट्रेचर तलाश करने लगे।
आधे घंटे बाद स्ट्रेचर खाली स्ट्रेचर मिला, जिस पर स्वजन ने कर्मचारी का इंतजार करने के बजाय खुद ही खींचा और मरीज को डाक्टर के पास ले गए। स्वार क्षेत्र से आई महिला निशा ने बताया कि उसका मरीज भर्ती है।
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मरीज का एक्सरे कराना है, जिसके लिए स्ट्रेचर के लिए दो बार आ चुकी हैं। दूसरी बार स्ट्रेचर मिला, लेकिन उसे खींचने के लिए कोई कर्मचारी नहीं है। अब खुद ही स्ट्रेचर खींचकर ले जाना पड़ेगा। कुछ देर बाद वहां दो लोग एक बुजुर्ग को गोदी में उठाकर ले जाते नजर आए।
चलते-चलते इतना ही बताया कि अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं दिखाई दिया तो गोद में उठाकर डाक्टर के पास जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि जिला अस्पताल में स्ट्रेचर की कमी है। पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की व्यवस्था उपलब्ध है। यहां 28 व्हीलचेयर हैं, जबकि 30 से अधिक स्ट्रेचर हैं।
इन्हें खींचने के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या कम है। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि तीमारदार अपने मरीज को स्ट्रेचर पर ले तो जाते हैं, लेकिन स्ट्रेचर वापस उसी स्थान पर रखने नहीं आते, जिसके कारण दूसरे मरीजों के तीमारदार स्ट्रेचर के लिए परेशान होते हैं।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. बीसी सक्सेना का कहना है कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी 24 घंटे खुलती है। यहां रात-दिन गंभीर मरीज, हादसों में घायल आदि आते हैं। रोजाना 150 नए मरीज भर्ती होते हैं। इससे अस्पताल में हर समय नए व पुराने मिलाकर 250 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं।
कभी तो इनकी संख्या 300 से भी अधिक हो जाती है। मरीजों की इतनी अधिक संख्या के लिए जितने डाक्टर व स्टाफ होना चाहिए, वह नहीं है। आया मिलाकर चतुर्थ श्रेणी के 71 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसके आधे ही नियुक्त हैं।
इनमें ज्यादातर सेवानिवृत्त होने के बाद से उनके पद रिक्त हैं। चिकित्सक व स्टाफ की नियुक्ति के लिए शासन को लिखा गया है। सीमित संसाधनों के बावजूद अस्पताल को बेहतर तरीके से चलाने का प्रयास किया जा रहा है।
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