रामपुर में बाढ़ का खतरा: 180 संवेदनशील गांवों की निगरानी के लिए 280 'आपदा मित्र' तैनात, चौकियों पर अलर्ट
रामपुर में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने 280 प्रशिक्षित आपदा मित्रों को सक्रिय किया है, जो 180 संवेदनशील गांवों की निगरानी करेंगे। ये स्वयं ...और पढ़ें

बृजघाट स्थित गंगा नदी में नाव से घूमते श्रद्धालु। फाइल फोटो
HighLights
छह तहसील क्षेत्रों में आपदा मित्रों को शासन स्तर से दिलाया जा चुका प्रशिक्षण
बाढ़ चौकियों को भी किया गया अलर्ट, अफवाहों पर रोक लगाने की भी जिम्मेदारी
जागरण संवाददाता, रामपुर। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य को प्रभावी बनाने के लिए 280 प्रशिक्षित आपदा मित्रों को सक्रिय किया गया है। इनकी सूची सभी तहसील क्षेत्र की बाढ़ चौकियों पर भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल इनकी सेवाएं ली जा सकें।
प्रशासन का उद्देश्य है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य में देरी नहीं हो और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके। जिले में कुल 180 गांवों को बाढ़ संभावित के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें 65 अति संवेदनशील और 115 संवेदनशील श्रेणी वाले हैं। ये गांव मुख्य रूप से कोसी और रामगंगा और पीलाखार नदियों के किनारे पर स्थित हैं।
जहां हर वर्ष अधिक बारिश होने अथवा पहाडी क्षेत्रों के जलाशयों से पानी छोडे जाने के बाद जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बना रहता है। चूंकि मानसून का मौसम आरंभ हो चुका है। नदियों का जलस्तर भी बढ़ना व घटना आरंभ हो गया है। इस कारण से स्वार, टांडा, सदर व शाहबाद तहसील क्षेत्र के इन गांवों की लगातार निगरानी की जा रही है और संबंधित तहसील प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
इनके साथ ही जिले में चयनित 280 आपदा मित्रों को पहले से ही शासन से आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी, राहत सामग्री वितरण और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। बाढ़ की स्थिति बनने पर ये स्वयंसेवक प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर राहत एवं बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सहायता करने तथा अफवाहों पर रोक लगाने में भी इनकी जिम्मेदारी रहेगी। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया गया है। नावों और अन्य राहत उपकरणों की उपलब्धता भी की जा रही है।
राहत शिविरों के लिए संभावित स्थान भी चिन्हित कर लिए गए हैं, जहां जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से ठहराया जाएगा। पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा और उपचार की तैयारियां पूरी रखने को कहा गया है।
जिला आपदा विशेषज्ञ दीपक कुमार का कहना है कि सभी विभागों के समन्वय और आपदा मित्रों की सक्रिय भागीदारी से किसी भी आपदा का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि संभावित बाढ़ के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखा जाए तथा प्रभावित लोगों तक राहत और सहायता समय पर पहुंचाई जा सके। इसी मंशा के तहत आपदा मित्रों को भी सतर्क किया है।
कहां कितने आपदा मित्र
कुल 280 आपदा मित्रों में शाहबाद तहसील क्षेत्र में 65, स्वार में 32, बिलासपुर में 41, टांडा में 35, सदर में 47 और 60 मिलक तहसील क्षेत्र में हैं। तहसील स्तर से इनके नाम जुटाकर प्रदेश मुख्यालय पर समय-समय पर इन्हें प्रशिक्षण दिलाया जा चुका है।
जिला आपदा विशेषज्ञ के अनुसार इनके चयन का आधार शासन स्तर से 18 वर्ष से अधिक की आयु, कक्षा आठ व 10 वीं पास हों, शारीरिक तौर पर पूरी तरह फिट हो इत्यादि निर्धारित किया गया था।
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