रामपुर में बाढ़ आई तो देवदूत बनेंगी ब्रजघाट की नावें, प्रशासन का बड़ा मास्टरप्लान तैयार!
रामपुर में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने ब्रजघाट, हापुड़ से नावें मंगाई हैं, क्योंकि स्थानीय नावें उपलब्ध नहीं थीं। ये नावें कोसी, रामगंग ...और पढ़ें

बृजघाट स्थित गंगा नदी में नाव से घूमते श्रद्धालु। फाइल फोटो
HighLights
जिले में बाढ़ आई तो कोसी-रामगंगाश,पीलाखार समेत अन्य नदियों में संभालेंगी मोर्चा
जागरण संवाददाता, रामपुर। बाढ़ की स्थिति में इस बार रामपुर के लोगों की मदद के लिए जिले की नहीं, बल्कि ब्रजघाट गंगा तट की नावें आगे आएंगी। यदि कोसी, रामगंगा या पीलाखार समेत अन्य नदियों में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ के हालात बनते हैं तो यही नावें राहत और बचाव अभियान में पीडित लोगों का सहारा बनती नजर आएंगी। प्रशासन ने बाढ़ से पहले ही इसकी तैयारी पूरी कर ली है।
जिला प्रशासन ने बाढ़ सीजन को देखते हुए नावों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इच्छुक नाव संचालकों से आवेदन मांगे थे। उम्मीद थी कि जिले के नाव संचालक इस व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे, लेकिन तय समय तक जिले से एक भी आवेदन नहीं आया। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी हो गई कि आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक कैसे पहुंचाया जाएगा।
इसी बीच हापुड़ जनपद के प्रसिद्ध ब्रजघाट-गढ़ गंगा तट के नाव संचालक राजमल ने आगे आकर जरूरत पड़ने पर अपनी नावें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा। प्रशासन ने उनके आवेदन की जांच के बाद उसे स्वीकृति दे दी। अब बाढ़ की स्थिति बनने पर आवश्यकता के अनुसार ब्रजघाट से नावें रामपुर भेजी जाएंगी और उन्हें कोसी, रामगंगा समेत जिले की अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया जाएगा।
इन नावों का उपयोग बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री वितरित करने, बीमार और बुजुर्गों को बाहर निकालने तथा जरूरत पड़ने पर पशुओं के बचाव के लिए भी किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि समय रहते नावों की व्यवस्था होने से आपदा की स्थिति में राहत कार्य तेजी से संचालित किए जा सकेंगे।
खबरें और भी
जिले के 50 से अधिक गांव हर वर्ष बरसात के दौरान कोसी और रामगंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पहले से तैयारियां शुरू कर दी हैं। संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, राहत शिविरों की तैयारी, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और नाव की व्यवस्था को आपदा प्रबंधन योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
कलक्ट्रेट में आपदा प्रबंध का कार्य देख रहे हेमंत कुमार व दीपक कुमार का कहना है कि फिलहाल नदियों के जलसतर की स्थिति सामान्य है, लेकिन मानसून के दौरान किसी भी संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि आपदा की घड़ी में लोगों को समय पर सुरक्षित निकालकर जनहानि को रोका जा।
जिले की सीमा से गुजरने वाली प्रमुख नदियों के नाम
कोसी नदी, रामगंगा, पीखाखार, भाकड़ा, बहल्ला, गागन नदी, घूघा नदी, हाथी चिंगार नदी,नइया नदी, बौर नदी, नाहल नदी, किछिया नदी, सैजनी नदी, धीमरी नदी, कलईया नदी, बैगुल नदी व खैरा नदी शामिल हैं। जलस्तर का अधिक प्रवाह मुख्य रुप से कोसी, रामगंगा, पीलाखार व भाकड़ा में रहता है। बाढ़ का खतरा कोसी व रामगंगा नदी से स्वार, टांडा, सदर व शाहबाद क्षेत्र के प्रभावित गांवों में बना रहता है।