आजम खान को बड़ा झटका! जौहर यूनिवर्सिटी का 'शाही गेट' अब 'आम रास्ता', गेट पर ही खुलेगा यह खास सेंटर
जौहर विश्वविद्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार नौ साल बाद अब आम रास्ता घोषित कर दिया गया है, जिस पर आजम खान ने पीडब्ल्यूडी की सड़क को घेर लिया था। जिलाधिकार ...और पढ़ें

जौहर विश्वविद्यालय
HighLights
आजम खान ने यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार से परिसर के अंदर कर ली थी पीडब्ल्यूडी की 3.5 किमी लंबी सड़क
अनिल अवस्थी, रामपुर। नौ वर्ष बाद जौहर विश्वविद्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार अब आम रास्ता हो गया है। सपा सरकार में आजम खान ने 13 करोड़ की लागत से बनी लोक निर्माण विभाग की 3.5 किमी लंबी इस सड़क को विश्वविद्यालय में कैद कर लिया था। आठ जुलाई को दैनिक जागरण ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने लोक निर्माण विभाग से जांच कराई।
जांच में खबर की पुष्टि होते ही जिलाधिकारी के निर्देश पर बुधवार को विश्वविद्यालय पहुंची लोक निर्माण विभाग की टीम ने प्रवेश द्वार के बाहर आम रास्ता का बोर्ड लगा दिया है। मुख्य द्वार के बाहर अब विद्यार्थियों के लिए काउंसिलिंग सेंटर बनवाया जाएगा।
सिंगनखेड़ा में आजम खान ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की नींव रखने के बाद उसका मुख्य द्वार लोक निर्माण विभाग की सड़क पर स्थापित कर लिया था। विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा होने के बाद मई 2016 में आजम खां ने अपनी हनक की बदौलत त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए 17 करोड़ का बजट भी स्वीकृत करा लिया।
इसमें से 13 करोड़ से अधिक की लागत से सड़क का चौड़ीकरण कराया गया। मुख्यमंत्री योगी के प्रदेश की कमान संभालने के बाद आजम खां की उलटी गिनती शुरू हुई।
वर्ष 2019 में जौहर विश्वविद्यालय में अरबों रुपये का सरकारी बजट खपाने की शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी आंजनेय कुमार ने नौ सदस्यीय टीम गठित कर जांच शुरू कराई तो धीरे-धीरे निजी विश्वविद्यालय पर अरबों का सरकारी बजट खपाने का रिकार्ड सामने आ गया।
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जांच टीम में शामिल लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि- ‘मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के परिसर के अंदर मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढीकरण का कार्य कराया गया है जिसकी स्वीकृत लागत रुपये 1716.65 लाख है एवं अद्यतन आवंटन रुपये 1373.32 लाख है।
उपरोक्त शासनादेश द्वारा स्वीकृति के सापेक्ष प्राप्त आगणन के अंतर्गत ही मार्ग निर्माण का कार्य लोक निर्माण विभाग के स्वामित्व के मार्ग पर ही कराया गया है, परंतु मार्ग के प्रारंभिक चैनेज पर यूनिवर्सिटी का गेट बना हुआ है, जिस कारण इस मार्ग पर आवागमन यूनिवर्सिटी प्रशासन के नियंत्रण में है।’
तत्कालीन जिलाधिकारी आंजनेय कुमार ने प्रकरण को भ्रष्टाचार का मानते हुए उसकी उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। मगर इस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आजम इस सरकारी रोड पर कब्जा जमाए रहे।
दैनिक जागरण की खबर पर डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केवी सिंह से रिपोर्ट मांगी थी। उन्होंने जांच के बाद खबर की पुष्टि की। इसके बाद बुधवार को डीएम ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लोक निर्माण की टीम भेजकर आम रास्ता होने का बोर्ड लगवा दिया। बारिश के कारण बाहर ही बोर्ड लग सके हैं। गुरुवार को यूनिवर्सिटी के गेट के अंदर भी यही बोर्ड लगाए जाएंगे।
सार्वजनिक उपयोग की सड़क पर अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जा सकता। दैनिक जागरण की खबर पर लोक निर्माण विभाग से कराई गई जांच में इसकी पुष्टि होते ही सड़क पर आम रास्ता का बोर्ड लगा दिया गया है। विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य की राह दिखाने के लिए यहां एक काउंसिलिंग सेंटर भी बनाया जाएगा।
- अजय कुमार द्विवेदी, जिलाधिकारी
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