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शिक्षिका ने छोड़ी सरकारी नौकरी, अब मशरूम की खेती से कमा रहीं ₹1 लाख महीना; 8 लोगों को भी दिया रोजगार

Published: Tue, 25 Aug 2026 06:00 AM (IST)

रचना चौहान ने सरकारी शिक्षक की नौकरी छोड़कर मशरूम की खेती शुरू की और अब इससे प्रतिमाह एक लाख रुपये ...और पढ़ें

मशरूम की खेती के साथ रचना चौहान। जागरण

मशरूम की खेती के साथ रचना चौहान। जागरण

HighLights

  1. मशरूम की खेती से एक लाख रुपया मासिक आय कमा रहीं रचना

राजेश राज, रामपुर। सरकारी नौकरी पाने के लिए जहां युवा दिन-रात मेहनत करते हैं, वहीं रचना चौहान ने सरकारी शिक्षक की नौकरी छोड़कर खेती को रोजगार का माध्यम बनाया। परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ उन्होंने करीब पांच बीघा भूमि में मशरूम उत्पादन शुरू किया। मेहनत, लगन और हाईटेक तकनीक का सहारा लेकर उन्होंने मशरूम उत्पादन को इस कदर बढ़ाया कि अब इसकी आपूर्ति रामपुर के साथ ही दूसरे जिलों और राज्यों तक होने लगी है। वहीं दूसरे लोगों के रोजगार का माध्यम भी बन गई।

सिविल लाइंस क्षेत्र में शाहबाद रोड स्थित अजीतपुर औद्योगिक क्षेत्र निवासी रचना चौहान पहले बरेली महानगर के सूफी टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थी। पति संजीव तोमर जिला पंचायतीराज विभाग में सचिव हैं।

परिवार को समय देने के उद्देश्य से उन्होंने शिक्षक की नौकरी छोड़कर दी। यह बात करीब 10 साल पूर्व की है। कुछ वर्ष घरेलू दायित्व निभाने के साथ खाली समय में कुछ अपना कार्य करने का विचार हुआ तो उनका ध्यान मशरूम की खेती पर गया।

इसके बारे में उन्हें कुछ जानकारी पहले से थी। पंतनगर विश्वविद्यालय से मशरूम की खेती से जुड़ा प्रशिक्षण भी प्राप्त किए हुए है। इसी आधार पर मशरूम उत्पादन की शुरुआत सीमित संसाधनों से की थी।

बाद में धीरे-धीरे मशरूम की खेती के तौर-तरीकों को समझते हुए उत्पादन और क्षेत्रफल दोनों बढ़ाए। वर्तमान में पांच बीघा से अधिक क्षेत्र में मशरूम का उत्पादन कर रही हैं। पूरा फार्म हाउस बना रखा गया। इससे उन्हें हर माह एक लाख रुपये तक की आय होने लगी है।

खास बात यह है कि उनका यह काम अब केवल उनकी आय का जरिया नहीं रहा, बल्कि गांव के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का साधन बन गया है। उन्होंने आठ अन्य लोगों को अपने मशरूम उत्पादन कार्य से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया है।

रचना बताती हैं कि खेती में तकनीक और सही प्रबंधन अपनाकर बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है। मशरूम उत्पादन में तापमान, नमी और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

मांग बढ़ने के साथ उन्होंने उत्पादन को भी बढ़ाया, जिससे स्थानीय बाजार के अलावा दूसरे जिलों बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ, गौरखपुर, दिल्ली, गाजियाबाद इत्यादि राज्यों में भी मशरूम की विभिन्न वैरायटी मशरूम, बटन मशरूम आदि की आपूर्ति शुरू हो गई।

सरकारी शिक्षक की नौकरी छोड़कर खेती को अपनाने और उसे सफल व्यवसाय में बदलने वाली रचना चौहान को जिला स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

उनका कहना है कि खेती को पारंपरिक नजरिये से अलग हटकर आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग के अनुसार किया जाए तो यह युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकती है।

खेती में मेहनत के साथ नई तकनीक और बाजार की जरूरत को समझना जरूरी है। मशरूम उत्पादन ने न केवल मुझे आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार देने का अवसर दिया है।

उपनिदेशक कृषि राम किशन ने बताया कि रचना चौहान जिले में मशरूम का उत्पादन करती हैं। इसके लिए उन्हें जिला स्तर पर अच्छे किसानों के रूप में सम्मानित भी किया गया है।

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