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    Success Story: ₹2 लाख के लोन से शुरू किया कैंडल स्टार्टअप, रामपुर का युवा अब खुद कमा रहा ₹40,000; 8 लोगों को भी दी नौकरी

    Updated: Wed, 08 Jul 2026 02:46 PM (IST)

    बिलासपुर तहसील के 20 वर्षीय सोनू ने 2 लाख रुपये के ऋण से मोमबत्ती बनाने का स्टार्टअप शुरू किया है। अब वह हर महीने 30-40 हजार रुपये कमाते हैं और अपने छ ...और पढ़ें

    मोमबत्ती तैयार करता युवक। जागरण

    मोमबत्ती तैयार करता युवक। जागरण

    HighLights

    1. बिलासपुर तहसील के युवा ने शुरू किया मोमबत्ती बनाने का स्टार्ट अप

    जागरण संवाददाता, रामपुर। नौकरी के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे गांव के युवाओं के लिए सोनू मिसाल बन गए हैं। उन्होंने पिछले वर्ष सरकारी योजना से दो लाख का ऋण लेकर मोमबत्ती बनाने का स्टार्टअप शुरू किया था। अब खुद 30 से 40 हजार रुपये महीना कमा रहे हैं और अपने छोटे से व्यापार से गांव के आठ लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

    युवाओं को प्रेरणा देने वाली यह कहानी जिले की तहसील बिलासपुर के छोटे से गांव मेहतोष में रहने वाले 20 वर्षीय सोनू की है। वह ज्यादा पढ़े लिखे न होने के कारण वह जानते थे कि उन्हें शहर में नौकरी नहीं मिलेगी और दूसरों के यहां मजदूरी वह करना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने स्वरोजगार की राह चुनी।

    मोमबत्ती बनाने का काम शुरू किया, लेकिन संसाधन नहीं होने से मुनाफा कम हो रहा था। सांचों से एक बार में 24 मोमबत्ती ही तैयार होती थीं। दिन भर मेहनत करने के बाद 300 पैकेट ही तैयार हो पाते थे। किसी ने मोमबत्ती बनाने की मशीन लगाने की सलाह दी।

    बाजार में कीमत पता की तो 1.90 लाख रुपये की मशीन बताई, जो उनके लिए बड़ी रकम थी। ऐसे में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना उनके लिए मददगार बनी। इस योजना के तहत उन्होंने दो लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया। 13 सितंबर 2024 को उनका ऋण स्वीकृत हो गया।

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    काम शुरू करने से पहले नजीबाबाद में लिया 10 दिन का प्रशिक्षण

    ऋण मिलने के बाद सोनू ने काम शुरू करने से पहले अपने कौशल को निखारने के लिए विभाग द्वारा नजीबाबाद स्थित खादी ग्रामोद्योग के प्रशिक्षण केंद्र में 10 दिन का विशेष प्रशिक्षण भी लिया। वहां उन्हें मशीन आपरेटिंग सिस्टम, मोमबत्ती बनाने की नई तकनीक और मार्केटिंग के बारे में सीखा।

    पहले सांचे से जहां एक बार में 24 मोमबत्ती ही बना पाते थे, वहीं अब एक बार में मशीन से 300 मोमबत्तियां तैयार होती हैं। उत्पादन बढ़ने से अब वह हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक कमा रहे हैं।

    गांव के आठ लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। वह बताते हैं कि बरसात के मौसम और दीपावली पर्व पर उनके उत्पादों की मांग इतनी बढ़ जाती है कि लोकल मार्केट और बड़ी दुकानों से आने वाले आर्डर पूरे करने मुश्किल हो जाते हैं। अब उनका दो और नई मशीनें लगाने का लक्ष्य है।

     

    प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। सोनू जैसे कई युवा इस योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

    - भूपेंद्र सिंह, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी


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