आजम खान को लेकर धर्मसंकट में सपा: दूरी से मुस्लिम वोट बैंक का खतरा, नजदीकी से बहुसंख्यक नाराज; समझें पूरा सियासी गणित
सपा आजम खान के मुद्दे पर धर्मसंकट में है, जहां उनसे दूरी मुस्लिम वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। ...और पढ़ें

आजम खान
HighLights
आजम खान को गृहमंत्री बनाने का बयान देकर समर्थकों के भी निशाने पर आए सपा नेता शिवपाल यादव
दूरी बनाई तो छिटक सकता मुस्लिम वोट बैंक, ज्यादा नजदीकी बढ़ाएगी बहुसंख्यक मतदाताओं से दूरी
अनिल अवस्थी, रामपुर। विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है। जौहर विश्वविद्यालय के मुद्दे से भी खेलने की तैयारी है। एआइएमआइएम और कांग्रेस इसके भरोसे आजम समर्थकों में घुसपैठ की आस लगाए है वहीं, सपा असमंजस में है। आजम से दूरी उसके लिए मुस्लिम वोट बैंक छिटकने की वजह बन सकती है जबकि, ज्यादा नजदीकी बहुसंख्यक मतदाताओं की पार्टी से दूरी बढ़ाएगी।
रामपुर आए सपा नेता शिवपाल सिंह यादव इसकी बानगी हैं। सरकार बनने पर आजम खान को गृहमंत्री बनाने का बयान देकर वह न सिर्फ विपक्षियों के निशाने पर हैं बल्कि, आजम समर्थक भी उन्हें कोस रहे हैं।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में काले धन के उपयोग का मुद्दा सियासी रंग लेता जा रहा है। राजनीतिक पार्टियां विधानसभा चुनाव में इसको लेकर अपना नफा-नुकसान तलाश रही हैं।
चूंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुस्लिम राजनीति में आजम खान एक बड़ा चेहरा हैं। इसलिए उनका साथ सियासी समीकरण बनाने-बिगाड़ने में कारगर साबित हो सकता है। समाजवादी पार्टी में आजम खान का वर्चस्व किसी से छिपा नहीं है।
यही वजह है कि जौहर विश्वविद्यालय के प्रकरण पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पहले विधायकों व बाद में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि पार्टी पूरी तरह उनके साथ खड़ी है।
इसके बाद खुद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव 12 अगस्त को आजम खान से मिलने जेल पहुंचे। वहां से निकलकर उन्होंने विश्वविद्यालय में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार बनने पर आजम खान को गृहमंत्री बनाया जाएगा।
उनके इस बयान पर भाजपा खेल गई। इंटरनेट मीडिया पर जबर्दस्त तरीके से इसका प्रचार किया। भाजपा से छिटक रहा बहुसंख्यक वोट बैंक इससे थोड़ा सहम गया। इसके बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव भी सतर्क हो गए।
लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से यहां तक कहा कि उन्हें अब क्या बोलना है, इसे एक पर्चे पर छपवाकर दे देंगे। इसके इतर कोई कुछ नहीं बोलेगा। बुधवार को जब जौहर विश्वविद्यालय पर ईडी ने छापेमारी की तो इंटरनेट मीडिया पर आजम समर्थकों के निशाने पर भी शिवपाल यादव आ गए।
उन्होंने लिखा कि शिवपाल को पता है कि सजा होने के चलते आजम खान चुनाव ही नहीं लड़ सकते, ऐसे में उन्हें गृहमंत्री बनाना संभव नहीं है। इसके बावजूद ऐसा बयान देकर उन्होंने सरकार को आजम के खिलाफ भड़का दिया, इसी के चलते ईडी की कार्रवाई हुई।
विश्वविद्यालय प्रकरण पर फायदे में भाजपा
जौहर विश्वविद्यालय प्रकरण पर भाजपा फायदे में है। चुनाव में वह इसे 'भ्रष्टाचारियों पर प्रहार और जीरो टालरेंस' के उदाहरण के रूप में पेश करेगी। आकाश सक्सेना की शिकायत और 50 करोड़ बनाम 494 करोड़ के खर्च के अंतर को चुनावी रैलियों में उछालकर यह साबित करेगी कि उसने आजम खां के 'साम्राज्य' को ढहा दिया है।
इससे हिंदू मतों के ध्रुवीकरण के आसार बढ़ेंगे। यदि सपा इस मुद्दे को ज्यादा हवा देगी, तो भाजपा इसे अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के तुष्टिकरण के रूप में प्रचारित कर बहुसंख्यक वोटों को अपने पाले में समेट सकती है। सपा यदि आजम से दूरी बनाती है तो मुस्लिम वोट बंटने का खतरा पैदा होगा, ऐसी स्थिति भी भाजपा के लिए लाभदायी होगी।
प्रभावित होगी पश्चिम उप्र की सियासत
आजम खान को लेकर सपा के स्टैंड से पश्चिम उप्र की सियासत प्रभावित होगी। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम मतदाताओं में भी दो तरह की लहरें दिख सकती हैं। पहली- आजम खान के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाई से पैदा हुई नाराजगी (सहानुभूति)। दूसरी- एक बड़ा धड़ा यह सोचने पर मजबूर हो सकता है कि क्या सिर्फ 'सहानुभूति' के नाम पर वोट देने से उनका भला होगा?
रामपुर की सियासत का असर संभल, अमरोहा, मुरादाबाद और बिजनौर जैसी सीटों पर पड़ता है। विश्वविद्यालय पर कसती जांच एजेंसियाें की नकेल मुस्लिमों को एकजुट करेगी। दूसरी ओर रामपुर में आजम खान का किला ढहाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले विधायक आकाश सक्सेना का भाजपा में कद भी बढ़ेगा।
