शौक पड़ा भारी! बिल्लियों के हमले से दहशत, एक हफ्ते में 40 लोगों को अस्पताल पहुंचा चुकी हैं पालतू बिल्लियां
स्वार में पालतू बिल्लियों के काटने की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे एक सप्ताह में लगभग 40 लोगों को एंटी-रेबीज टीका लगवाने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक इमेज
HighLights
एंटी रेबीज लगवाने के बावजूद बिल्ली पालने का बढ़ रहा शौक
संवाद सहयोगी, स्वार (रामपुर)। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के स्वार नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पालतू बिल्लियां अचानक लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई हैं। शौक के तौर पर घरों में पाली जा रही ये बिल्लियां अब आक्रामक होकर अपने ही मालिकों, बच्चों और पड़ोसियों को शिकार बना रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वार में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, बीते केवल एक सप्ताह के भीतर बिल्ली के काटने से घायल लगभग 40 मरीज इलाज कराने पहुंचे हैं।
आवारा कुत्तों से ज्यादा बिल्ली के काटने के मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सीएचसी स्वार में रोजाना औसतन 6 से 7 लोग बिल्ली के हमले के शिकार होकर एंटी-रेबीज का टीका लगवाने आ रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस समय आवारा कुत्तों की तुलना में बिल्लियों के काटने के मामले दोगुने से भी अधिक दर्ज किए जा रहे हैं।
इलाके में आवारा कुत्तों के काटने से रोजाना 3 से 4 लोग (सप्ताह में लगभग 20 मरीज) प्रभावित हो रहे हैं। बिल्लियों के काटने की इस अप्रत्याशित बाढ़ ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
शौक पड़ रहा भारी, बच्चे भी बन रहे शिकार
स्वार क्षेत्र में बिल्ली पालने का क्रेज तेजी से बढ़ा है। कई परिवारों में बच्चे इन बिल्लियों के साथ दिन-रात खेलते हैं। लेकिन मूड बदलने या किसी व्यवधान के कारण ये बिल्लियां अचानक हमला कर देती हैं।
गांव शौपुरी पिस्तौर निवासी समर सिंह, तालिब, अर्जुन, आयुष, कार्तिक और अबरार समेत कई लोग बिल्ली के काटने के बाद घबराकर सीएचसी पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें एंटी-रेबीज का टीका लगाया।
बिल्ली या कुत्ते के काटने पर बरतें ये सावधानियां
चिकित्सकों का कहना है कि पालतू जानवरों को घर में रखने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और व्यवहार का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। यदि कोई जानवर काट ले, तो इन बातों पर तुरंत अमल करें-
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- तत्काल सफाई: काटे गए स्थान को तुरंत साफ बहते पानी और साबुन से कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं।
- डॉक्टरी परामर्श: बिना समय गंवाए नजदीकी प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाकर डॉक्टर को दिखाएं।
- नियमित वैक्सीनेशन: अपने पालतू जानवरों का पशु चिकित्सक से समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन करवाएं।
- घरेलू नुस्खों से बचें: घाव पर मिर्च, हल्दी या चूना लगाने की भूल न करें, इससे संक्रमण बढ़ सकता है।
क्षेत्र में बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक कर रहा है कि जानवर पालते समय सतर्कता बरतें, ताकि खुद के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी सुरक्षित रखा जा सके।