सहारनपुर जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में मिलीं एक्सपायरी ग्लूकोज की बोतलें... रातों-रात हटाया स्टाक
सहारनपुर जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में एक्सपायरी ग्लूकोज की बोतलें मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना के बाद रातोंरात स्टॉक हटाकर मर ...और पढ़ें

जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में रखीं एक्सपायरी ग्लूकोज की बोतलें। सौ. इंटरनेट मीडिया।
HighLights
ट्रामा सेंटर में मिलीं एक्सपायरी ग्लूकोज की बोतलें।
रातोंरात हटाया गया स्टॉक, मरीजों की ड्रिप बदली।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की लापरवाही की जांच।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में एक्सपायरी ग्लूकोज की बोतलें मिलने और मरीजों को लगाए जाने की सूचना से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। शुक्रवार रात इंटरनेट मीडिया पर ट्रामा सेंटर के स्टाक में रखी एक्सपायरी ग्लूकोज की तस्वीरें प्रसारित होने के बाद अधिकारी हरकत में आ गए। देर रात ट्रामा सेंटर में रखे पूरे स्टाक की जांच कराई गई और एक्सपायरी ग्लूकोज की सभी बोतलों को तत्काल हटाया गया।
इतना ही नहीं, जिन मरीजों को एक्सपायरी ग्लूकोज चढ़ाई जा रही थी। उनकी ड्रिप भी बदल दी गई। एक्सपायरी ग्लूकोज में जून 2025 और जून 2026 की तिथि अंकित थी। जिनका उपचार में इस्तेमाल किया जा रहा था। जिला अस्पताल की दवा भंडारण व्यवस्था, स्टाक की नियमित निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यदि ग्लूकोज की एक्सपायरी अवधि समाप्त हो चुकी थी तो उसे समय रहते स्टोर से हटाया क्यों नहीं गया?
इतना ही नहीं मरीजों तक पहुंचने से पहले एक्सपायरी ग्लूकोज की बोतलों की जांच क्यों नहीं की गई? स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? स्वास्थ्य अधिकारियों का यह भी कहना है कि किसी कर्मचारी की हरकत भी हो सकती है। जिसने एक्सपायरी ग्लूकोज की बोतलों के स्टाक को ट्रामा सेंटर में लाकर रख दिया, जबकि एक्सपायर हो चुकी दवाओं या ग्लूकोज का उपयोग मरीजों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
ऐसे में अस्पताल में दवाओं की नियमित जांच, स्टाक का समय-समय पर सत्यापन और एक्सपायरी सामग्री को तत्काल नष्ट किया जाना अनिवार्य है। इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि एक्सपायरी ग्लूकोज अस्पताल के स्टाक में कब से मौजूद था। कितने मरीजों को संबंधित बैच की ग्लूकोज लगाई गई है। किस स्तर पर लापरवाही हुई है।