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    कांवड़ यात्रा के भंडारों में अब शाही पनीर और चूरचूर नान का स्वाद, रसमलाई-रबड़ी, जलेबी से मीठा हो रहा सफर

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 11:14 PM (IST)

    श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में भंडारों का स्वरूप बदल गया है, जहाँ अब पारंपरिक भोजन की जगह शाही पनीर, चूरचूर नान और रबड़ी-जलेबी जैसे शादी समारोह के व् ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. कांवड़ भंडारों में अब शादी समारोह जैसा भव्य मेन्यू।

    2. शाही पनीर, चूरचूर नान, रबड़ी-जलेबी जैसे व्यंजन उपलब्ध।

    3. आधुनिक काउंटर, स्वच्छता और व्यवस्थित सेवा श्रद्धालुओं के लिए।

    जागरण संवाददाता, सहारनपुर। भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास की पवित्र कांवड़ यात्रा केवल आस्था का नहीं, बल्कि सेवा के बदलते स्वरूप का भी प्रतीक बन गई है। कांवड़ मार्ग पर लगने वाले भंडारों में पारंपरिक पूड़ी-सब्जी की जगह शादी समारोह जैसा मेन्यू और व्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं।

    श्रद्धालुओं के लिए शाही पनीर, चूरचूर नान, रबड़ी-जलेबी, रायता और सलाद तक परोसा जा रहा है। भोजन परोसने के लिए स्टेनलेस स्टील के आधुनिक काउंटर लगाए गए हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में किसी विवाह समारोह का एहसास होता है।

    श्रावण मास में कांवड़ यात्रा के साथ सेवा का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। कांवड़ मार्ग पर लगने वाले पारंपरिक भंडारे अब आधुनिक रूप लेते दिखाई दे रहे हैं। कहीं शादी समारोह जैसी सजावट है तो कहीं होटल जैसी भोजन व्यवस्था।

    शिवभक्तों के लिए सुबह के नाश्ते से लेकर रात के भोजन तक अलग-अलग मेन्यू तैयार किए गए हैं। स्वाद, स्वच्छता और बेहतर सुविधाओं के कारण ये भंडारे इस बार श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण बने हुए हैं।

    सुबह की शुरुआत गरमा-गरम पकौड़ी, कचौड़ी, चाय और हल्के नाश्ते से होती है। दोपहर में मिक्स वैज, तंदूरी रोटी, दाल मखनी, कढ़ी चावल, बटर नान, रायता और सलाद परोसा जा रहा है।

    वहीं, मीठे में रसमलाई से लेकर दूध व जलेबी और स्पंजी रसगुल्ला भी दिया जा रहा है। वहीं शाम को चाय के साथ नाश्ते में रस, ब्रेड सेंडविच कांवड़ियों को दिया जा रहा है।

    रात में कांवड़ियों की सुविधा के अनुसार व उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए दाल-चावल, रोटी, घी, बूरा हल्का भोजन दिया जा रहा है, ताकि दिनभर की यात्रा के बाद कांवड़ियों को आरामदायक भोजन मिल सके। कुछ स्थानों पर दोपहर में ठंडाई, मठ्ठा, जूस और आइसक्रीम भी प्रसाद के रूप में कांवड़ियों केा वितरित की जा रही है।

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    फलाहार व उपवास के भोजन का भी इंतजाम

    वहीं, श्रावण मास में उपवास रखने के वालों कांवड़ियों के लिए फलाहार व उपवास के भोजन का भी इंतजाम है। सुबह चाय के साथ जहां नाश्ते में कुट्टू के आटे की पकोड़ियां दी जा रही है तो रात के खाने में सिंधाड़े के आटे की पूड़ियां, आलू के झोल की सब्जी व लोकी आलू की सब्जी दी जा रही है।

    भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रसोई में स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए गए हैं और सैकड़ों स्वयंसेवक चौबीसों घंटे सेवा में जुटे हैं। इस बार भंडारों की पहचान केवल स्वादिष्ट भोजन नहीं, बल्कि उनकी भव्य व्यवस्था भी है।

    भोजन परोसने के लिए शादी समारोह की तरह स्टेनलेस स्टील के लंबे काउंटर लगाए गए हैं। अलग-अलग सर्विंग स्टेशन, साफ-सुथरे बर्तन, व्यवस्थित कतारें और बैठकर भोजन करने की सुविधा श्रद्धालुओं को सहज अनुभव दे रही है।