ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण से यूपी के 50+ गांवाें को मिलेगा सीधा फायदा, भारतमाला परियोजना से जुड़ेंगे कई शहर
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे के उद्घाटन से सहारनपुर भारतमाला परियोजना से जुड़ जाएगा। बड़गांव इंटरचेंज से 50 से अधिक गांवों की दो लाख आबादी को लाभ ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, सहारनपुर। दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे के 14 अप्रैल को उद्घाटन के बाद सहारनपुर भारतमाला परियोजना से जुड़ जाएगा। हाईवे पर बड़गांव में मिले इंटरचेंज से क्षेत्र के 50 से भी अधिक गांवों की दो लाख से अधिक आबादी को सीधे लाभ मिलेगा।
कृषि और व्यापार क्षेत्र को पंख लगने की उम्मीद बढ़ गई है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए देहरादून-दिल्ली की दूरी भी कम हो जाएगी। लाइटें व छोटे पेचवर्क का कार्य अंतिम दौर में पहुंच चुका है।
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे शामली जिले के उमरपुर गांव के बाद सहारनपुर के जड़ौदा पांडा में प्रवेश करता है। बड़गांव इंटरचेंज के पास सीसीटीवी की केबिल डालने और सर्विस रोड को दुरुस्त करने का काम प्रगति पर है।
हाईवे में आड़े आ रहा विद्युत ट्रांसफार्मर अभी भी ज्यों का त्यों रखा हुआ है। विद्युत कनेक्शन अभी भी नही मिल सका। बड़गांव के बडूली में हाईवे के दोनों ओर रेस्ट एरिया का निर्माण अभी आधा-अधूरा है।यहां खानपान, मैकेनिक, पेट्रोल पंप, शौचालय सहित यात्रियों की हर सुविधा सुलभ कराई जाएगी।
हाईवे के हर किमी पर सौर ऊर्जा चलित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जो रात में बैटरे की मदद से हर स्थिति पर नजर रखेंगे। जैनपुर के पास टोल प्लाजा तैयार हो चुका है।
सब्जी किसानों को लाभ
क्षेत्र के सब्जी किसानों की अधिकतर फसलें बैंगन, खीरा आदि दिल्ली की ओखला व आजादपुर मंडी के अलावा देहरादून की मंडियों में बेची जाती हैं। बैंगन बोने वाले किसान सतीश कुमार ने बताया कि पहले दूसरे रास्तों से दिल्ली जाने में पांच घंटे का समय लगता था, लेकिन अब ढाई घंटे में किसान दिल्ली पहुंच जाएंगे। सब्जी लेकर देहरादून जाने वाले किसानों को लगभग चार घंटे का समय लगता था। अब एक घंटे में देहरादून पहुंच सकेगें।
गंभीर मरीजों के लिए कवच बनेगा हाईवे
देवबंद, नानौता, बड़गांव आदि नगरों से गंभीर मरीजों को चिकित्सकों द्वारा अमूमन देहरादून या दिल्ली स्थित हायर सेंटर्स रेफर किया जाता है। पहले दिल्ली-देहरादून आदि जाने में चार से पांच घंटे का समय लग जाता था। वाया हाईवे अब दो घंटे के अंदर मरीजों को दिल्ली या देहरादून में इलाज मिल सकेगा।
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शिक्षा क्षेत्र में भी मिलेगा लाभ
शिक्षा का हब कहे जाने वाले देहरादून व दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान मौजूद हैं।आज भी क्षेत्र के सैंकड़ों छात्र-छात्राएं इन महानगरों के संस्थानों में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हाईवे का शुभारंभ होते ही ये क्षेत्र दोनों महानगरों से सीधा जुड़ जाएंगे,इससे समय की बचत व आर्थिक रूप से भी लाभ होगा।
कारोबार से आर्थिक स्थिति मजबूत
नानौता, देवबंद व बडगांव के अधिकतर व्यापारी दिल्ली से सामान लाकर यहां व्यापार करते हैं। कस्बे के व्यापारी सुनील रुहेला कहते हैं कि इसके लिए पहले से ही प्लान बनाकर रात में ही दिल्ली पहुंचना होता था और सामान लेकर लौटने में शाम हो जाती थी।अब आर्डर के दो से तीन घंटे बाद सामान दिल्ली से कस्बों के व्यापारियों को मिल सकेगा।
आंदोलन से निकली हाईवे की राह
यह हाईवे गांव मोरा, हसनपुर लौटनी, बालू माजरा, बडूली, खुदाबक्शपुर, बडगांव, दल्हेडी, चंदपुर मजबता, मियानगी, मिर्जापुर, कुतबा, टपरी, अंबेहटा चांद, भगवानपुर, हलगोआ, अहमदपुर, सढोली, नसरतपुर, सकतपुर, बहादरपुर, सरगथल, जैनपुर, ताशीपुर, लबडोला होते हुए लाखनौर में पंचकुला-देहरादून मार्ग पर मिल जाता है।
हाईवे को 28 गांवों की लगभग एक हजार बीघा जमीन का अधिग्रहण किया गया था। किसानों ने कभी मुआवजा तो कभी सर्विस रोड को लेकर तीस से भी अधिक आंदोलन किये थे, लेकिन अब किसानों, व्यापारियों सहित आम लोगों को लाभ नजर आ रहा है।