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सहारनपुर : थाने में गर्भवती महिला से किया था सामूहिक दुष्कर्म, दोषी रिटायर्ड CO और इंस्पेक्टर को 20-20 साल की कैद

Published: Sat, 07 Nov 2026 12:47 AM (IST)

वर्ष 2015 के देवबंद थाने में गर्भवती महिला से सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने रिटायर्ड सीओ बृजमोहन यादव और ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, सहारनपुर। साल 2015 में थाने में गर्भवती महिला से सामूहिक दुष्कर्म के दोषी रिटायर्ड सीओ और इंस्पेक्टर को अदालत ने 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक लाख बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

दोषी तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव सीओ के पद से सेवानिवृत्त हो चुका है जबकि तत्कालीन उपनिरीक्षक वेगपाल सिंह फिरोजाबाद में निरीक्षक के पद पर तैनात है। छह अगस्त 2015 को देवबंद पुलिस ने अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।

इसके बाद ढाई महीने की गर्भवती पत्नी और बहन थाने पहुंचीं। वहां मौजूद एक दारोगा ने उन्हें थाना प्रभारी से मिलने के लिए भेज दिया। इसी दौरान पत्नी के साथ चार पुलिसकर्मियों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगा था।

विरोध करने पर ननद की पिटाई भी की गई। पीड़िता ने एसएसपी तक से शिकायत की, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। हाई कोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 2017 में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। चार आरोपितों में से एक तत्कालीन चौकी प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी, क्योंकि उसने मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का दावा किया था।

अदालत ने किया था तलब

चौथे आरोपित, एक कांस्टेबल का पता नहीं चला। मामले की विवेचना सीबीसीआइडी को सौंपी गई। सीबीसीआइडी ने आरोपों को गलत बताते हुए अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी। पीड़िता ने अंतिम रिपोर्ट को सीजेएम कोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने इसे शिकायत के रूप में दर्ज किया। अदालत ने साक्ष्य आने के बाद आरोपित बृजमोहन और वेगपाल को तलब किया था।

ट्रायल के बाद त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार वर्मा ने गुरुवार को दोनों को दोषी करार दिया था। अदालत की टिप्पणी : फैसले में न्यायालय ने कहा कि दुष्कर्म का अपराध समाज में अत्यंत अनैतिक और शारीरिक शोषण का अपराध है। दुष्कर्म का अपराध गैर मानवीय कार्य होने के अलावा स्त्री की पवित्रता एवं निजता के अधिकार का उल्लंघन है।

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यह उसकी सर्वोच्च प्रतिष्ठा पर कुठाराघात है और उसकी स्वगरिमा एवं मर्यादा को चोट पहुंचाता है। यह अपराध पीड़िता का दमन करता है और उसे समाज की नजरों में गिराता है। दुष्कर्मी असहाय महिला की आत्मा को मलिन एवं अशुद्ध कर देता है। यह अपराध पीड़िता के जीवन को पशुवत या नारकीय बना देता है और उसकी आत्मा को झकझोर देता है।

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