बैंक की मनमानी पड़ी भारी! ग्राहक को सब्सिडी न देना पड़ा महंगा, अब आयोग के आदेश पर चुकाने होंगे ₹1.75 लाख
संभल में जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने बैंक ऑफ इंडिया को एक उपभोक्ता को सब्सिडी का लाभ न देने पर दोषी ठहराया है। बैंक को ₹1.75 लाख की सब्सिडी, ₹15,00 ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराया गया बैंक
क्षतिपूर्ति सहित दो माह में भुगतान नहीं किया तो नौ प्रतिशत ब्याज
संवाद सहयोगी, संभल। रोजगार के लिए लिया गया ऋण एक उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन गया, जब बैंक ने निर्धारित सब्सिडी का लाभ नहीं दिया। लंबे समय तक चक्कर काटने के बाद मामला जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग पहुंचा, जहां बैंक की लापरवाही सामने आई। आयोग ने इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए बैंक आफ इंडिया को न केवल सब्सिडी देने बल्कि क्षतिपूर्ति अदा करने के भी आदेश दिए हैं।
संभल तहसील क्षेत्र के गांव अख्तियारपुर ठिल्लूपुरा निवासी रिंकू ने वर्ष 2020 में स्वरोजगार स्थापित करने के उद्देश्य से आर्य समाज रोड स्थित बैंक आफ इंडिया में पांच लाख रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था। बैंक द्वारा चार लाख 75 हजार रुपये का लोन स्वीकृत किया गया।
लोन के साथ एक लाख 75 हजार रुपये की सब्सिडी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से मिलने का प्रावधान बताया गया था। लोन प्राप्त करने के बाद रिंकू ने अपना व्यापार शुरू कर दिया और समय-समय पर किस्तों का भुगतान भी करते रहे।
इसके बावजूद बैंक ने सब्सिडी की राशि को उसके खाते में समायोजित नहीं किया। इतना ही नहीं, बैंक ने बकाया दर्शाते हुए तीन लाख 89 हजार रुपये का वसूली प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया, जिससे रिंकू को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
खबरें और भी
परेशान होकर रिंकू ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान बैंक ने दलील दी कि सब्सिडी की राशि सरकार द्वारा दी जाती है और उसे तीन वर्षों तक रिजर्व फंड में रखा जाता है।
यदि लोन खाता इस अवधि से पहले खराब होता है तो सब्सिडी वापस कर दी जाती है। हालांकि आयोग ने बैंक की दलीलों को खारिज करते हुए माना कि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की अधिसूचना का पालन नहीं किया गया। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापारिक व्यवहार करार दिया।
आयोग ने बैंक आफ इंडिया के अध्यक्ष और शाखा प्रबंधक को आदेश दिया कि वे दो माह के भीतर एक लाख 75 हजार रुपये की सब्सिडी उपभोक्ता के खाते में जमा करें। साथ ही 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में अदा करें। आदेश का पालन न करने पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।