कोटेदार बने 'मजदूर', राशन कार्ड धारक मजबूर, चंदौसी में घाटा पूरा करने को कर रहे घटतौली
चंदौसी में राशन वितरण व्यवस्था में अनियमितता सामने आई है, जहाँ कोटेदारों को खुद गोदाम से राशन उठाना पड़ रहा है, जिससे वे नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक् ...और पढ़ें

HighLights
कोटेदार गोदाम से खुद लाते हैं राशन, भाड़ा नहीं मिलता।
नुकसान की भरपाई को उपभोक्ताओं को कम राशन देते हैं।
पूर्ति निरीक्षक, ठेकेदार के पास कोटेदारों का डेटा नहीं।
जागरण संवाददाता, चंदौसी। तहसील में राशन व्यवस्था का हाल ये है कि पात्रों तक या तो राशन नहीं पहुंच रहा या कटौती होकर पहुंच रहा है। कई कोटेदारों को खुद गोदाम तक आकर राशन उठाना पड़ रहा है। इसका भाड़ा भी समय पर नहीं मिल रहा है। ऐसे में कोटेदार राशन उपभोक्ताओं का राशन काटकर अपने नुकसान की भरपाई कर रहे हैं।
तहसील में करीब 250 कोटेदार हैं। शासन के नियमानुसार राशन को गोदामों से निकालकर कोटेदारों की दुकान तक पहुंचाना अनिवार्य है। सरकारी नियमों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त परिवहन ठेकेदारों या एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है कि वे राशन को सीधे कोटेदार की दुकान तक पहुंचाएं।
गोदाम से दुकान तक राशन पहुंचाने का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है। इसके लिए किसी भी कोटेदार से कोई अतिरिक्त किराया या ढुलाई शुल्क नहीं वसूला जाना चाहिए।
जिन दुकानों तक बड़े ट्रक नहीं पहुंच सकते, वहां ठेकेदारों को छोटे वाहनों के जरिए राशन पहुंचाना अनिवार्य होता है, लेकिन चंदौसी में ऐसा नहीं हो रहा। यहां तमाम कोटेदार ऐसे हैं, जो खुद गोदाम से अनाज उठाकर ले जाते हैं, जिसका भाड़ा भी उन्हें नहीं मिलता। ऐसे में कोटेदार भी गरीबों का राशन उन्हें घटतौली करके देकर अपना नुक़सान पूरा करते हैं।
अब कितने ऐसे कोटेदार हैं जो खुद आकर राशन गोदाम से आकर राशन ले जाते हैं, इस बारे में न तो पूर्ति निरीक्षक आशीष गुप्ता के पास कोई आंकड़ा है और न ही परिवहन ठेकेदार बबलू शर्मा के पास।
हालांकि, ये दोनों स्वीकारते हैं कि कई कोटेदार गोदाम से आकर राशन ले जाते हैं। पूर्ति निरीक्षक यह भी बताते हैं कि इसके लिए उन्हें दस रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा दिया जाता हैं। हालांकि परिवहन ठेकेदार कहते हैं कि भाड़े की कोई व्यवस्था सरकार की तरफ से नहीं है। इधर, तमाम राशन उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें राशन काटकर दिया जा रहा है।
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किस कार्ड पर कितना राशन
राशन वितरण व्यवस्था के तहत दो प्रकार के कार्ड होते हैं। इसमें अन्त्योदय कार्ड धारकों को 35 किलो राशन दिया जाता है। इसमें 21 किलो गेंहू तथा 14 किलो चावल होता है। तीन से चार महीने में तीन किलो चीनी 18 रुपये प्रति किलो की दर से दी जाती है। इसके अलावा पीएचएच पात्र गृहस्थी कार्ड पर पांच किलो प्रति यूनिट राशन दिया जाता है। इसमें दो किलो चावल व तीन किलो गेंहू शामिल है। अपना नुकसान पूरा करने के लिए राशन कोटेदार इसी राशन में कटौती कर लेते हैं।
ठेकेदार बोले- लड़के काम करते हैं, जानकारी नहीं दे सकता
गोदाम पर मिली लेबर ने बताया कि यहां आले हसन नाम का व्यक्ति पूरी व्यवस्था संभालता है। ठेकेदार कभी-कभी आते हैं। इस सबंध में जब ठेकेदार बबलू शर्मा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वहां पर लड़के काम करते हैं, वह इस संबंध में जानकारी नहीं दे सकते। उनका काम केवल इतना है कि जो लिस्ट मिलती है, उसके अनुसार राशन पहुंचा देते हैं।
कोटेदार बोले- पांच महीने से नहीं मिला कमीशन
नगर क्षेत्र के कई कोटेदार खुद ही गोदाम से राशन लाते हैं। कुछ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दस रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा दिया जाता है लेकिन वह भी समय पर नहीं मिलता। और तो और पांच महीने से कमीशन भी नहीं मिला, जिससे समस्या आ रही है।
जहां गोदाम के ट्रक नहीं जा पाते या गलियों में कोटेदार होते हैं वहां के कोटेदार खुद आकर ले जाते हैं। इसके लिए उन्हें 10 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा दिया जाता है। अब ऐसे कितने कोटेदार हैं, इसका पूरा डाटा हमारे पास नहीं है। कुछ समय से कोटेदारों को कमीशन मिलने में समस्या आ रही थी लेकिन अब कमीशन आ गया है।
-आशीष गुप्ता, पूर्ति निरीक्षक, चंदौसी