हेपेटाइटिस-C का 'साइलेंट अटैक': 8 गांवों में फैला संक्रमण, 8 साल के बच्चे भी हो रहे शिकार
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के 8 गांवों में हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिसमें 8 साल के बच्चे भी शिकार हो रहे हैं। इसे 'साइलेंट अटैक' क ...और पढ़ें
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जिला अस्पताल
HighLights
जिला अस्पताल में प्रतिदिन पहुंचे रहे 20 से 30 नए मरीज
संक्रमितों में बच्चों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा
संवाद सहयोगी, जागरण, संभल। जिले में हेपेटाइटिस-सी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रतिदिन से लगभग 20 से 30 नए मरीज जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें आठ वर्ष के बच्चों से लेकर 18 वर्ष के युवा भी शामिल भी हैं। पिछले तीन सालों में 10,393 मरीजों में से 7,172 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 231 संक्रमितों को मेरठ मेडिकल कालेज रेफर किया गया है।
चिकित्सक हेपेटाइटिस के लक्षण होने पर मरीजों की वायरल लोड की जांच कराते हैं। जांच के बाद उन्हें एक महीने की दवा दी जाती है। तीन महीने बाद फिर से मरीज की वायरल लोड की जांच कराई जाती है। जांच में मरीज के लक्षण न होने पर उनकी दवा बंद की दी जाती है। हालांकि कुछ मरीजों में तीन माह की दवा खाने के बाद भी हेपेटाइटिस-सी के लक्षण मिलते हैं तो उन्हें मेरठ मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया जाता है।
मेरठ में उनका छह महीने तक इलाज चलता है। जिला अस्पताल की चिकित्सक डा. आंचल मेहरोत्रा का कहना है कि हेपेटाइटिस-सी रक्त संपर्क से फैलता है। वहीं वायरस संक्रमित व्यक्ति का इंजेक्शन दूसरे व्यक्ति को लगाने, शेविंग ब्लेड दोबारा इस्तेमाल करने, संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़ाने, सावधानी का ध्यान रखे बिना टैटू बनवाने, शारीरिक संबंध बनाने, अप्रशिक्षित चिकित्सक से दांतों की सफाई कराने से फैल सकता है। जिला अस्पताल में हर माह 500 से अधिक मरीजों का इलाज चल रहा है।
पीड़ित बच्चों को भेज रहे नोएडा पीजीआइ सेंटर
हेपेटाइटिस-सी जैसा गंभीर संक्रमण बच्चों को भी अपनी चपेट में लेने लगी है। पहले यह बीमारी वयस्कों में पाई जाती थी, लेकिन अब जिला अस्पताल में बच्चों में इसके लक्षण और पुष्टि के मामले सामने आने लगे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में कुछ बच्चों को बुखार, थकान, आंखों में पीलापन और पेट दर्द की शिकायत के साथ लाया गया था।
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प्रारंभिक जांच के बाद डाक्टरों को शक हुआ कि यह हेपेटाइटिस-सी हो सकता है। इसके बाद जब बच्चों के ब्लड सैंपल की जांच की गई तो कुछ में संक्रमण की पुष्टि हुई। जिला अस्पताल में इस बीमारी के लिए विशेष इलाज की सुविधा न होने के कारण 65 बच्चों को नोएडा स्थित पीजीआइ सेंटर में रेफर किया जा रहा है, जहां उनकी जांच और इलाज संभव है।
आठ से 17 वर्ष के किशोरों में यह बीमारी पाई गई है। चिकित्सक का कहना है कि बच्चों में हेपेटाइटिस सी का संक्रमण आमतौर पर संक्रमित सुइयों, खून या जन्म के समय मां से बच्चे में ट्रांसमिशन के कारण हो सकता है।
गांव भैंसोड़ा में एक दर्जन से अधिक लोगों की हो चुकी मौत
हेपेटाइटिस-सी के मरीज जिले के अलावा अन्य जिलों से भी आते हैं। जबकि जनपद में सबसे ज्यादा मरीज सरायतरीन, असमोली, मनोटा, भारतल, लखौरी, सांरगपुर, नारंगपुर, बनियाठेर, बहजोई से आते हैं। इसमें 18 वर्ष के युवा भी शामिल हैं। गांव भैंसोड़ा की आठ हजार की आबादी में से लगभग 40 प्रतिशत ग्रामीण इस बीमारी से ग्रस्त हैं। सात वर्षों में दो दर्जन से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
ये हैं लक्षण
- - भूख कम लगना।
- - थकान, पेट दर्द।
- - पीलिया, अवसाद।
- - खुजली और फ्लू।
यह बरतें सावधानी
- - शराब का सेवन न करें।
- - लीवर में वसा न जमा न होने दें।
- - पानी अधिक मात्रा में लें।
- - जांच नियमित कराते रहें।
- - आराम करें और नींद पूरी लें।
- - कच्चा या अधपका भोजन न करें।
- - शक्कर और नमक की उच्च मात्रा वाले आहार न लें।