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    जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे की 'जुगलबंदी' से संभल बनेगा यूपी का नया एक्सपोर्ट हब

    Updated: Sun, 29 Mar 2026 03:30 AM (IST)

    जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी संभल के विकास को नई गति दे रही है। इससे संभल के हार्न-बोन हस्तशिल्प, मेंथा और ओडीओपी उत्पादों को वैश् ...और पढ़ें

    जेवर एयरपोर्ट की तस्वीर। सौ. सूचना विभाग

    जेवर एयरपोर्ट की तस्वीर। सौ. सूचना विभाग

    HighLights

    1. हार्न-बोन हस्तशिल्प, मेंथा व ओडीओपी उत्पादों को ग्लोबल बाजार, हजारों शिल्पकारों को रोजगार के अवसर

    संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकार्पित और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर मुरादाबाद मंडल के विकास का नया इंजन बनकर उभर रहा है, जिसमें संभल को सबसे अधिक रणनीतिक लाभ मिलने की स्थिति बन रही है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से ही जगह बना चुके संभल के हस्तशिल्प जिसमें सींग और हड्डी से बने विभिन्न उत्पादों के अलावा अन्य सामग्री की बेहतर निर्यात से यहां के हजारों शिल्पकारों को और अवसर मिलेंगे।

    इतना ही नहीं गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे औद्योगिक गलियारे से संभल की सीधी सड़क कनेक्टिविटी जेवर एयरपोर्ट से जुड़ रही है, जिससे जनपद के ओडीओपी उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेज, सुलभ और किफायती पहुंच मिलेगी।

    1.2 करोड़ वार्षिक यात्री क्षमता और 2.5 लाख टन कार्गो क्षमता वाला यह एयरपोर्ट दिल्ली के जाम से राहत दिलाते हुए पूरे मंडल के निर्यात ढांचे को नई गति देगा। विदित हो कि संभल का हार्न-बोन हस्तशिल्प (सींग और हड्डी), हड्डी व सींग से निर्मित सजावटी व उपयोगी उत्पाद और मेंथा उद्योग पहले से ही विदेशों में अपनी पहचान बनाए हुए हैं।

    अब एयर कार्गो सुविधा और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के कारण परिवहन समय में कमी आएगी और लागत घटेगी, जिससे निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल होगी। इससे संभल के हजारों शिल्पकारों, कारीगरों और युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे।

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    इसके साथ ही नए उद्यमों के लिए भी रास्ते खुलेंगे। किसानों के लिए भी एयर कार्गो के माध्यम से कृषि उत्पादों को सीधे विदेशी बाजारों में भेजने का मार्ग प्रशस्त होगा, जबकि मंडल में नए वेयरहाउस और लाजिस्टिक्स हब विकसित होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

    कुल मिलाकर, जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे की संयुक्त कनेक्टिविटी संभल को एनसीआर से मजबूत रूप से जोड़ते हुए इसे तेजी से उभरते निर्यात, उद्योग और रोजगार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो रही है।

     

    जनपद का हार्न-बोन हस्तशिल्प (सींग और हड्डी) पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना चुका है, लेकिन जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी से इसे नई गति मिलेगी। अब निर्यातकों को माल भेजने में कम समय और कम लागत लगेगी, जिससे कारोबार बढ़ेगा। इससे हजारों शिल्पकारों की आय में वृद्धि होगी और विदेशी बायर्स की सीधी पहुंच से व्यापार का दायरा और विस्तृत होगा।

    - मुकेश कुमार, जीएम, डीआइसी, संभल


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