रोते हुए बच्चे को मोबाइल देना पड़ सकता है भारी, डॉक्टरों ने दी रूह कंपा देने वाली चेतावनी
बच्चों को शांत कराने के लिए मोबाइल देना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ...और पढ़ें

HighLights
मोबाइल से बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या।
आंखों में जलन, सिरदर्द और व्यवहार में बदलाव।
बच्चों को खेल, पढ़ाई, रचनात्मक गतिविधियों में लगाएं।
संवाद सहयोगी, बहजोई। आज के डिजिटल दौर में छोटे बच्चों को चुप कराने या व्यस्त रखने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमाना अभिभावकों के लिए भारी पड़ सकता है। चिकित्सकों के अनुसार कम उम्र में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
उनका कहना है कि लगातार मोबाइल देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, सिर में कंपन, ध्यान की कमी और नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई बच्चों में आंखों में जलन, सिरदर्द और व्यवहार में अचानक बदलाव भी देखने को मिल रहा है।
बाल रोग चिकित्सक डा. सजल वार्ष्णेय के अनुसार अभिभावक अक्सर बच्चों के रोने या जिद करने पर उन्हें मोबाइल दे देते हैं, जिससे धीरे-धीरे बच्चों को इसकी आदत लग जाती है और वह बिना मोबाइल के असहज महसूस करने लगते हैं।
चिकित्सकों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को मोबाइल की जगह खेल, पढ़ाई, चित्रकारी और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके।छोटे बच्चों का मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है। ऐसे में लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से उनकी आंखों और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को मोबाइल से यथासंभव दूर रखा जाए और उन्हें खेल-कूद व रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रोत्साहित किया जाए। -डा. नितिन कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ
पहले बच्चों को चुप कराने के लिए खिलौने या कहानियों का सहारा लिया जाता था, लेकिन अब कई अभिभावक जल्दी समाधान के लिए मोबाइल दे देते हैं। इससे बच्चों में मोबाइल की लत लग रही है, जो भविष्य में गंभीर समस्या बन सकती है। -देवेंद्र योगी अभिभावक, बहजोई