संभल का 35 बीघा जमीन विवाद: जब उर्दू के पुराने दस्तावेजों ने घुमाया अफसरों का सिर, फेल हुए ट्रांसलेटर भी
संभल में 35 बीघा भूमि विवाद की जांच में पुराने उर्दू दस्तावेजों के कारण अधिकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तहसील और पालिका रिकॉर्ड में नी ...और पढ़ें

संभल के सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में अभिलेखों की जांच अधिकारी व अन्य।
HighLights
रिटायर्ड कानूनगो और उर्दू अनुवादक की ली गई मदद, नहीं मिल रहे नीलामी के अभिलेख
संवाद सहयोगी, संभल। सरायतरीन के बाजारगंज स्थित नगर पालिका परिषद की 35 बीघा भूमि प्रकरण में बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में करीब तीन घंटे तक अभिलेखों की जांच की गई। सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक राजस्व विभाग, नगर पालिका और अन्य अधिकारियों ने सरकारी रिकार्ड का मिलान किया। पुराने अभिलेख उर्दू में होने के कारण जांच में दिक्कत आई, जिसके चलते रिटायर्ड कानूनगो और उर्दू अनुवादक की भी मदद लेनी पड़ी, लेकिन वह भी असफल रहे।
अब जांच का दायरा और बढ़ गया है क्योंकि तहसील के रिकार्ड में नीलामी के दस्तावेज नहीं मिल रहे हैैं। हालांकि गुरुवार को भी मामले में जांच की जाएगी। वर्ष 2013 से 2015 के बीच तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता के कार्यकाल में सरायतरीन के सईदउद्दीन खां द्वारा इस भूमि पर करीब 40 दुकानें बनाई गई थीं।
वर्तमान में यह क्षेत्र बाजारगंज के नाम से जाना जाता है। नगर पालिका का दावा है कि भूमि उसकी है, जबकि सईदउद्दीन खां की ओर से इसे नीलामी के माध्यम से खरीदी गई संपत्ति बताया जा रहा है।
मामला उजागर हुआ तो पालिका ने सईदउद्दीन खां उनके बेटे शाहबुद्दीन खां, जमीरउद्दीन खां, मेराजउद्दीन खां और फरीदउद्दीन खां को नोटिस जारी नीलामी से संबंधित दस्तावेज दिखाने को कहा, लेकिन वह दस्तावेज नहीं दिखा सके। इस प्रकरण में सईदुद्दीन खां समेत अन्य ने वर्ष 2025 में हाईकोर्ट में सिविल रिट याचिका संख्या 1174/2025 दाखिल की थी।
हाईकोर्ट ने 20 फरवरी 2025 को आदेश देते हुए विवादित 35 बीघा 5 बिस्वाह भूमि की पैमाइश और जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश के पर नगर पालिका प्रशासन ने संबंधित पक्षों को 11 जून 2025 को नोटिस जारी किया था। लेकिन पैमाइश में सहयोग के लिए मौके पर पहुंचे थे। 19 मई 2026 दोबारा पैमाइश का प्रयास हुआ, फिर भी सहयोग नहीं मिला।
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तीन जुलाई को बाजार गंज के हिंदू परिवार व व्यापारियों ने इस प्रकरण की शिकायत डीएम अंकिल खंडेलवाल से की। फिर नौ जुलाई 2026 की तारीख तय करते हुए जांच करने की बात कहीं लेकिन, बरसात और संबंधित हल्का लेखपाल के निजी कारणों से सीमांकन नहीं हो सका।
13 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी, कर निर्धारण अधिकारी कार्तिक यादव, अवर अभियंता निर्माण अमन वर्मा, तहसीलदार, राजस्व विभाग की टीम तथा पुलिस बल मौके पर पहुंचे थे, लेकिन वहां सिर्फ भूमि का मुआयना किया गया था।
बुधवार की सुबह 11 बजे सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार की मौजूदगी में दोपहर दो बजे तक नायब तहसीलदार अरविंद सिंह, नगर पालिका परिषद के ईओ आदित्य प्रकाश, कर निर्धारण अधिकारी, कार्तिक यादव और राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने राजस्व अभिलेखों के रिकार्ड देखे। हालांकि, अधिकांश पुराने अभिलेख उर्दू भाषा में होने के कारण रिकार्ड का मिलान करने में अधिकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके चलते एक रिटायर्ड कानूनगो को बुलाया गया, जिन्हें पुराने राजस्व अभिलेखों का अनुभव है। साथ ही उर्दू में दर्ज दस्तावेजों को समझने और उनका सही मिलान कराने के लिए उर्दू अनुवादक की भी सहायता ली गई।
हालांकि इसके बाद भी कई अभिलेख उनकी समझ में नहीं आए। वहीं पालिका अपने रिकार्ड में नीलामी के दस्तावेज नहीं दिखा सकी है। जांच के दौरान कब्जाधारी पक्ष का कोई प्रतिनिधि कार्यालय नहीं पहुंचा। ऐसे में जांच अब गुरुवार को होगी।
नीलामी का मामला काफी पुराना है और दस्तावेज भी उर्दू में दर्ज हैं। इसलिए जांच में काफी परेशानी हो रही है। हालांकि धीरे धीरे सभी रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। जल्द ही इसका निर्णय करेंगे।
- सुधीर कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट, संभल
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