ई-रजिस्ट्री आंदोलन समाप्त, संभल में रजिस्ट्री कार्यालयों में लौटी रौनक, होने लगे जमीनों के बैनामे
ई-रजिस्ट्री के विरोध में संभल, चंदौसी और गुन्नौर में अधिवक्ताओं का धरना प्रदर्शन समाप्त हो गया है। इसके बाद रजिस्ट्री कार्यालयों में जमीनों के बैनामे ...और पढ़ें

HighLights
संभल, चंदौसी, गुन्नौर में अधिवक्ताओं का धरना प्रदर्शन समाप्त।
रजिस्ट्री कार्यालयों में जमीनों के बैनामे का काम फिर शुरू।
अधिवक्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया, मिठाई बांटी।
जागरण संवाददाता, संभल। ई रजिस्ट्री के विरोध में संभल चल रहा अधिवक्ताओं का धरना प्रदर्शन बुधवार को समाप्त हो गया। जिसके बाद रजिस्ट्री कार्यालय में शाम तक करीब 48 बैनामे हुए। अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।
इस दौरान प्रदीप कुमार गुप्ता, राजीव भटनागर, चौधरी रवि कुमार, शाहबुद्दीन, चौधरी रमेश, चौधरी प्रकाशवीर सिंह, मनीष आर्य, सचिन चौहान, पंचम सिंह आदि रहे। वहीं चंदौसी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश संघर्ष समिति के आह्वान पर ई-रजिस्ट्री के विरोध में चल रहा आंदोलन आखिरकार स्थगित हो गया।
उप निबंधक कार्यालय परिसर चंदौसी में अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों, स्टाम्प वेंडरों, टाइपिस्टों की बैठक हुई। जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए बुधवार से रजिस्ट्री कार्यालय में कार्य पुनः प्रारंभ करने का ऐलान किया गया।
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कल्याण सिंह तोमर ने अधिवक्ताओं की सहमति से कार्य प्रारंभ करने की औपचारिक घोषणा की। घोषणा होते ही पूरा रजिस्ट्री दफ्तर परिसर उत्सव के माहौल में डूब गया। अधिवक्ताओं और सहयोगियों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया, एक-दूसरे को बधाई दी।
यहां अधिवक्ताओं ने आंदोलन को सफल बनाने वाले पदाधिकारियों का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस दौरान महामंत्री दिलीप यादव, बाबूलाल एडवोकेट, अमर सिंह यादव, बलराम शर्मा, धनवीर सिंह , महेश बंसल, विजय पाल, मुनेन्द्र शर्मा, अंकित राघव, महिपाल सिंह, गुड्डू एडवोकेट, राकेश शर्मा, अलीशेर, संतोष कुमार आदि रहे।
वहीं ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में गुन्नौर अधिवक्ताओं की पिछले 10 दिनों से चल रहा धरना प्रदर्शन समाप्त हो गया। अधिवक्ता न्यायिक कार्य पर लौट आए। तहसील में रजिस्ट्री का कार्य भी दोबारा शुरू हो गया।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता शैलेंद्र यादव ने बताया कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं की ओर से उठाई गई मांगों पर शासन ने गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया है।