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    संभल जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा बुलाई गई दोनों पक्षों की बैठक, पूजा के अधिकार पर फंसा पेंच

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 07:06 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर संभल के हरिहर मंदिर-जामा मस्जिद विवाद में दोनों पक्षों के बीच फिर से बातचीत हुई, लेकिन पूजा के अधिकार पर असहमति के कारण यह ...और पढ़ें

    हरिहर मंदिर-जामा मस्जिद

    हरिहर मंदिर-जामा मस्जिद

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    1. करीब 45 मिनट हुई बातचीत, पर दोनों पक्ष रहे असहमत

    जागरण संवाददाता, चंदौसी (संभल)। संभल के हरिहर मंदिर बनाम यूनियन आफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोनों पक्षों में समझौते के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी संबंध में सोमवार को एडीजे (पाक्सो कोर्ट) अवधेश कुमार यादव की अध्यक्षता में बनी कमेटी के समक्ष दोनों पक्षों के लोगों में वार्ता हुई, लेकिन वह बेनतीजा रही।

    वादी पक्ष ने जहां केवल पूजा का अधिकार देने की मांग रखी वहीं दूसरे पक्ष ने इससे यह कहते हुए साफ इंकार कर दिया कि मामला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और उनके बीच का है। ऐसे में करीब 45 मिनट चली वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।

    19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने चंदौसी सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट में दावा दायर किया था कि संभल की शाही जामा मस्जिद वास्तव में श्री हरिहर मंदिर है। इस पर कोर्ट ने इसके सर्वे का आदेश दिया। 19 नवंबर की शाम मस्जिद परिसर में पहले चरण का सर्वे हुआ, जबकि दूसरा चरण 24 नवंबर को पूरा हुआ था।

    सर्वे के दौरान उपजे विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। भीड़ द्वारा पुलिस पर पथराव और फायरिंग की गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। इस मामले में तीन हत्यारोपितों, तीन महिलाओं और इंतजामिया मस्जिद के सदर जफर अली समेत कुल 103 लोगों को जेल भेजा जा गया था।

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    इसके बाद मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट चला गया। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 को ट्रायल कोर्ट को आदेश दिए कि दोनों पक्षों को बैठाकर समझौते के आधार पर मामला निपटाने के प्रयास किए जाए। आदेश के बाद मई महीने में ही नोटिस देकर दोनों पक्षों को बुलाया गया था लेकिन, दोनों ही पक्ष हाजिर नहीं हुए।

    इसके बाद दोनों में से किसी भी पक्ष के नहीं पहुंचने की रिपोर्ट बनाकर सुप्रीम कोर्ट को भेज दी गई। इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने पुन: प्रयास करने के लिए कहा तो अब दोबारा नोटिस भेजकर सोमवार को बुलाया गया था।

    सोमवार को कमेटी अध्यक्ष एडीजे (पाक्सो कोर्ट) अवधेश कुमार यादव, सदस्य एसीजीएम संभल नावेद अख्तर, मध्यस्थता कमेटी के सदस्य लवमोहन वार्ष्णेय, वादी पक्ष के अधिवक्ता श्रीगोपाल शर्मा समेत एएसआई के विष्णु शर्मा, मस्जिद कमेटी की ओर से शकील भारती, जामा मस्जिद सदर जफर अली, सगीर वारसी, प्रिंस शर्मा आदि की मौजूदगी में दोनों पक्षों में बातचीत हुई।

    इस दौरान हिंदू पक्ष ने कहा कि उन्हें केवल यहां पूजा का अधिकार दे दिया जाए लेकिन दूसरे पक्ष ने इससे साफ इंकार कर दिया। दूसरे पक्ष का कहना था कि यह जगह 1920 में ही एएसआई के अधिकार क्षेत्र में आ गई थी। ऐसे में यह हमारा और एएसआई के बीच का मामला है। इसके बाद दोनों पक्षों में चली वार्ता बगैर किसी नतीजे के समाप्त हो गई।

     

    दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई थी। हरिहर मंदिर का दावा करने वाले पक्ष के लाेग मस्जिद परिसर में पूजन करने की बात कह रहे थे। जबकि हम लोग इस बात से इंकार करते रहे। इन्हीं बातोें के बीच में वार्ता किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंची है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

    - जफर अली, सदर, जामा मस्जिद, संभल

     

    हमें न्यायालय पर पूरा विश्वास है कि हरिहर मंदिर के पक्ष में ही फैसला आएगा। उसी का हमें इंतजार भी है। बाकी वार्ता हुई थी, उसमें कोई नतीजा नहीं निकला है। क्योंकि हम लोग वहां पर पूजा और सामूहिक जलाभिषेक की मांग पर कर रहे थे, दूसरा पक्ष इस बात से इंकार करने में अड़ा हुआ था।

    - ऋषिराज गिरी, महंत, कैलादेवी मंदिर एवं याचिकाकर्ता।


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