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    पौराणिक संभल की वापसी: राजा भागीरथ की विश्राम स्थली और सूर्यकुंड के दिन बहुरेंगे, भेजा करोड़ों का प्रस्ताव

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 08:07 AM (GMT+05:30)

    संभल में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रशासन ने 54 देवतीर्थों की पहचान की है। सूर्यकुंड और भागीरथी तीर्थ के जीर्णोद्धार के लिए करो ...और पढ़ें

    संभल के सूर्य कुंड तीर्थ परिसर में बना स्नान कुंड। जागरण

    संभल के सूर्य कुंड तीर्थ परिसर में बना स्नान कुंड। जागरण

    HighLights

    1. अब तक हुई 54 देवतीर्थों की खोज, कुछ का हो रहा पुनरूद्धार, स्वीकृति के बाद होगा कार्य शुरू

    संवाद सहयोगी, संभल। प्रशासन द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। नगर में स्थित प्राचीन तीर्थस्थलों और कूपों की खोज, उनके जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। इस ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत अब तक 54 देवतीर्थों की पहचान हो चुकी है। इसके अलावा सूर्यकुंड व भागीरथी तीर्थ जैसे प्रमुख स्थलों के विकास को नगरपालिका ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है।

    संभल ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगर रहा है, जो तीन प्रमुख कोणों चंदेश्वर तीर्थ, संभलेश्वर और भोलेश्वर तीर्थ में बसा हुआ माना जाता है। इन तीनों क्षेत्रों में कुल 68 तीर्थ और 19 प्राचीन कूप स्थित हैं, जो समय के साथ उपेक्षा का शिकार हो गए थे।

    अब प्रशासन का लक्ष्य इन सभी धरोहरों को पुनः विकसित कर उन्हें धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाना है। नगर पालिका द्वारा विभिन्न मुहल्लों, पुरानी बस्तियों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तीर्थस्थलों की पहचान की जा रही है। चिन्हित स्थलों पर जीर्णोद्धार कार्य शुरू कर दिया गया है।

    इसके साथ ही इन स्थलों को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने की योजना भी तैयार की गई है। अभियान के अंतर्गत तीर्थस्थलों के आसपास स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

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    कुछ प्रमुख स्थलों पर वंदन योजना के तहत निर्माण कार्य भी प्रगति पर है, जिससे इन स्थलों का स्वरूप पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। इसी क्रम में सूर्यकुंड और भागीरथी तीर्थ के विकास के लिए नगर पालिका परिषद ने विशेष प्रस्ताव शासन को भेजा है।

    नगरीय झील, तालाब एवं पोखर योजना के तहत सूर्यकुंड के लिए 199.13 लाख रुपये और भागीरथी तीर्थ के लिए 198.60 लाख रुपये के बजट का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है तो इन दोनों प्रमुख तीर्थस्थलों का विकास आधुनिक सुविधाओं के साथ किया जाएगा, जबकि उनके पारंपरिक और ऐतिहासिक स्वरूप को भी सुरक्षित रखा जाएगा।

    भागीरथी तीर्थ कुंड में उगी है घास, प्राचीन दीवार और सीढ़ियां हो चुकी हैं जर्जर

    रायसत्ती स्थित भागीरथी तीर्थ आज उपेक्षा का शिकार है। कभी आस्था का केंद्र रहा यह तीर्थ स्थल अब गुमनामी और जर्जरता के दौर से गुजर रहा है। यहां स्थित प्राचीन कुंड वर्षों से सूखा पड़ा है और इसके चारों ओर ककइयां ईंट से बनी सीढ़ियां अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है और कभी यहां धार्मिक अनुष्ठानों, मेलों और स्नान पर्वों का आयोजन होता था। प्राचीन शंभल दर्शन पुस्तक के अनुसार इस तीर्थ का संबंध राजा भागीरथ से जोड़ा जाता है, जिन्होंने यहां विश्राम किया था। यहां भगवान भोलेश्वर भुवनेश्वर के दर्शन व पूजन कर अन्न दान करना शुभ माना जाता है।

    वहीं कुंड का जल श्रद्धालुओं के लिए पवित्र माना जाता था, परंतु अब यह कुंड सूखने के साथ ही इसकी दीवारें और सीढ़ियां भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। वहीं कुंड तीर्थ पर भी प्रकाश व्यवस्था के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    इस कुंड के बीचों बीच एक बड़ा कूप है, जिसमें स्नान करने से इच्छाएं पूरी होती हैं और सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करने से कुष्ठ रोग दूर होते हैं।

     

    सूर्यकुंड तीर्थ और भागीरथी कुंड का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति होते ही जल्द ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इसके अलावा वंदन योजना के तहत अन्य तीर्थों का सुंदरीकरण कार्य जारी है।

    - डा. मणिभूषण तिवारी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद संभल


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