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    संभल में बंदरों के आतंक ने ली मासूम की जान, छज्जे से गिरी स्लैब के नीचे दबा इकलौता बेटा, मां बेसुध

    Updated: Mon, 22 Jun 2026 06:18 PM (IST)

    संभल के गुन्नौर में बंदरों के आतंक के कारण छज्जे से सीमेंट की स्लैब गिरने से 12 वर्षीय कौशल की मौत हो गई। इकलौते बेटे की मौत से मां का रो-रोकर बुरा हा ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

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    1. बेटे की मौत होने पर मां का रो-रोकर बुरा हाल, गुन्नौर थाना क्षेत्र के गांव नंदरोली की घटना

    संवाद सहयोगी, गुन्नौर (संभल)। गांव नंदरोली में बंदरों के उछल-कूद से मकान के छज्जे पर रखी सीमेंट की स्लैब गिर गई। जिसके नीचे दबने से दुकान पर सामान लेने जा रहे इकलौते बालक की मौत हो गई। इकलौते बेटे की मौत से स्वजन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां का रो-रोकर बुरा हाल है।

    गांव निवासी स्व. पप्पू का 12 वर्षीय पुत्र कौशल सोमवार की सुबह करीब साढ़े नौ बजे घर से दुकान की ओर जा रहा था। इसी दौरान गांव की एक गली से गुजरते समय हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गली में स्थित एक मकान के छज्जे पर सीमेंट की भारी स्लैब (छजली) रखी हुई थी।

    उसी समय बंदरों का झुंड छज्जे पर उछल-कूद करने लगा, जिससे स्लैब नीचे आ गिरी। स्लैब सीधे कौशल के ऊपर आ गिरी। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायल बालक को बाहर निकाला। स्वजन भी मौके पर पहुंच गए और सीएचसी ले जाया गया।

    चिकित्सक ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इकलौते बेटे की मौत की जानकारी मिलते ही स्वजन में खलबली मच गई। चिकित्सा अधिकारी डा. अजहर अली ने बताया कि किशोर को अस्पताल लाया गया था, लेकिन उसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।

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    उधर, स्वजन ने किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई कराए बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया। मृतक के घर से आ रही चीख-पुकार सुनकर ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।

    इकलौते बेटे की मौत से टूट गई मां

    नंदरोली गांव में हुए हादसे ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी। 12 वर्षीय कौशल अपने घर का इकलौता बेटा था। सात वर्ष पहले बीमारी के कारण उसके पिता का निधन हो गया था। तब से मां सविता ही दो बेटियों और बेटे का पालन-पोषण कर रही थीं।

    कौशल को ही वह अपना सहारा मानती थीं। अस्पताल में बेटे का शव देखते ही सविता बेसुध हो गईं। वह बिलखते हुए कहती रहीं कि पहले पति का साथ छूटा और अब इकलौता बेटा भी चला गया। उनके करुण विलाप से अस्पताल और गांव का माहौल गमगीन हो गया।

    दर्जनों गांवों में बढ़ा बंदरों का आतंक, ग्रामीणों में दहशत

    गुन्नौर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन बंदर लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। सोमवार को ईशमपुर निवासी प्रवेश देवी को बंदर ने घर में घुसकर काट लिया, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए सीएचसी गुन्नौर लाया गया।

    ग्रामीणों के अनुसार, ईशमपुर, गोठना, अकबरपुर, बिजुआ नगला, जगन्नाथपुर, शाहपुर, सेजना मुस्लिम और रायपुर समेत कई गांवों में बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लोगों का कहना है कि शायद ही कोई परिवार बचा हो, जिसका कोई सदस्य बंदरों का शिकार न हुआ हो। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

    हर माह 600 मरीज पहुंच रहे अस्पताल

    बंदरों के बढ़ते आतंक इतना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुन्नौर में प्रतिदिन 15 से 20 लोग बंदरों के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सा अधिकारी डा. अजहर अली ने बताया कि बंदरों के हमलों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

    एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए रोज बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल आते हैं। कई बार अस्पताल का समय समाप्त होने के बाद भी लोग उपचार के लिए पहुंच जाते हैं। मासिक आंकड़ों के अनुसार करीब 600 मरीज बंदर काटने के मामलों में अस्पताल पहुंच रहे हैं, जो चिंता का विषय है।

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