संभल का स्वाद अब पूरी दुनिया में! सेवईं, गजक और सोनपापड़ी को मिली 'सरकारी मुहर', जानें क्या बदलेगा?
ODOP: संभल की सेवईं और चंदौसी की गजक व सोनपापड़ी को 'एक राज्य एक उत्पाद' योजना में शामिल किया गया है। इससे इन स्थानीय व्यंजनों का कारोबार और रोजगार दो ...और पढ़ें

चंदौसी की प्रसिद्ध सोहन पपड़ी और गजक
HighLights
एक राज्य एक उत्पाद में शामिल होने से बढ़ेगा कारोबार
जागरण टीम, संभल। जिले के व्यंजनों पर अब सरकारी मुहर भी लग चुकी है। शासन ने संभल शहर की सेवईं और चंदौसी की गजक व सोनपापड़ी को एक राज्य एक उत्पाद में शामिल किया है। तीनों ही अपने स्वाद के लिए देश-दुनिया में मशहूर हैं। इसके लिए प्रस्ताव प्रशासन ने भेजा था। कारोबारियों का कहना है कि एक राज्य एक उत्पाद में शामिल होने से सेवईं, गजक और सोनपापड़ी का कारोबार और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।
संभल और हयातनगर में करीब पांच कारखानों में मैदा से उच्च गुणवत्ता की सेवईं तैयार की जाती है। लगभग 35 रुपये प्रति किलोग्राम मैदा से तैयार सेवईं थोक में करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिकती है, जबकि फुटकर बाजार में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है।
यहां की सेवईं की सबसे अधिक खपत अलीगढ़ और उसके बाद आगरा मंडी में है। इसके अलावा दिल्ली और उत्तराखंड में भी इसकी अच्छी मांग है। संभल में हर वर्ष औसतन 1,200 से 1,500 टन सेवईं का उत्पादन होता है। वहीं यदि गजक व सोनपापड़ी की बात की जाए तो चंदौसी में ये कारोबार करीब 80 साल से अधिक पुराना है।

अक्टूबर से फरवरी माह तक चलने वाले गजक के कारोबार से चंदौसी के करीब 200 से अधिक लोग जुड़े है। छह माह के सीजन में करीब दो से ढाई करोड़ रुपये का कारोबार होता है। राहुल यादव बताते हैं कि करीब तीन से चार क्विंटल गजक रोजाना बिकती है। 20 से अधिक वैरायटी तैयार होती हैं।
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यहां बनी गजक मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, बिहार आदि प्रदेशों में जाती है। जिन लोगों के रिश्तेदार विदेश में रहते हैं, वे उनके पास भी भेजते हैं। कारोबारी प्रमोद कुमार बताते हैं कि वैसे तो उनके यहां 30 साल से सोनपापड़ी बनाई जा रही है। शहर में 30 से अधिक स्थानों पर सोनपापड़ी बनाई जाती है। सबसे ज्यादा डिमांड देशी घी से बनी सोनपापड़ी की रहती है।