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संभल हिंसा केस: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, AI और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से 1 साल में पूरा करें ट्रायल

Published: Thu, 03 Sep 2026 06:48 PM (IST)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल हिंसा मामले में आरोपित मुहम्मद अली को जमानत दे दी है। कोर्ट ने जनपद न्यायालय ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट और संभल हिंसा

इलाहाबाद हाई कोर्ट और संभल हिंसा

HighLights

  1. दो आरोपितों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए उच्च न्यायालय ने दिए आदेश

संवाद सहयोगी, चंदौसी (संभल)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल की शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में आरोपित मुहम्मद अली की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। साथ ही जनपद न्यायालय को एआइ और वीडियो कान्फ्रेंसिंग से ट्रायल में तेजी लाने का निर्देश दिए हैं, ताकि मुकदमों में जल्द निर्णय हो सके।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ (कोर्ट संख्या 69) के समक्ष आरोपित मुहम्मद अली की जमानत याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता इरशाद अहमद ने तर्क रखा कि घटना में 700-800 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई थी, जिसमें किसी का स्पष्ट रोल या नाम नहीं था।

जांच के बाद 44 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिनमें से समान स्थिति वाले 37 अन्य आरोपियों को कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। समानता के आधार पर कोर्ट ने आरोपित मुहम्मद अली की जमानत मंजूर कर ली। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि संभल हिंसा से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय गंभीर है।

उन्होंने बताया कि आरोपित मुहम्मद अली को जमानत देने के साथ ही उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि इस संवेदनशील मामले का ट्रायल जल्द से जल्द, संभवतः एक वर्ष के भीतर पूरा किया जाए। इसके लिए जनपद न्यायाधीश को संबंधित केस किसी विशेष अदालत को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सुनवाई में तेजी लाने के लिए स्पीच टू टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन एआइ (जैसे Adalat.AI या Nyayalay.org) और वीडियो कान्फ्रेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।

इसी तरह संभल हिंसा मामले में सह-आरोपियों की समानता के आधार पर मुहम्मद निहाल को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ द्वारा जनपद न्यायालय को निर्देश दिया गया कि इस मामले के शीघ्र निपटारे के लिए गवाहों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के तेजी से रिकार्डिंग और डिजिटलाइजेशन के लिए ट्रांसक्रिप्शन एआइ टूल का उपयोग किया जाए।

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