संभल हिंसा मामला: इतिहास में पहली बार बेखौफ होकर गवाहों ने दिए बयान, DGC बोले- अगला नंबर जफर अली का
संभल हिंसा मामले में पुलिस और प्रशासन का शिकंजा कस रहा है, डीजीसी राहुल दीक्षित ने बताया कि 12 मुकदमों में साक्ष्य संकलन और गवाही अंतिम चरण में है। उन ...और पढ़ें

संभल हिंसा की फाइल फोटो
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डीजीसी राहुल दीक्षित बोले : संभल हिंसा का कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा
संवाद सहयोगी, चंदौसी (संभल)। संभल हिंसा मामले में पुलिस और प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मामले से जुड़े 12 मुकदमों में साक्ष्यों के संकलन और गवाही की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राहुल दीक्षित ने अभियोजन पक्ष की प्रगति की जानकारी देते हुए इसे प्रदेश सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया है।
उन्होंने बताया कि हिंसा से जुड़े कुल 12 मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से दो नखासा और शेष संभल कोतवाली में दर्ज हैं। इनमें से चार पत्रावलियां दंगे में जान गंवाने वाले मृतकों से संबंधित हैं। लगभग सभी मुकदमों में साक्ष्यों की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। अब केवल कुछ मामलों में विवेचकों की गवाही बाकी है, जो जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।
डीजीसी ने बताया कि वर्ष 1936 से लेकर 2024 तक संभल में करीब 15 दंगे हुए। इन दंगों से जुड़े जितने भी मुकदमे दर्ज हुए, उनमें किसी भी न्यायालय में कोई भी गवाह डर के कारण साक्ष्य देने सामने नहीं आता था।
दहशतगर्दों का खौफ इस कदर था कि पैरवी अधूरी रह जाती थी, लेकिन योगी सरकार में यह पहली बार हुआ है जब वादी और गवाह बेखौफ होकर न्यायालय आए और अपने बयान दर्ज कराए। कहा कि हिंसा का मुख्य आरोपी शारिक साठा अभी फरार चल रहा है, जिसके खिलाफ विवेचना जारी है।
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हिंसा भड़काने और साजिश में शामिल सारिक के गुर्गों वारिस और गुलाम के खिलाफ एनएसए (रासुका) के तहत कार्रवाई की गई है। इनके खिलाफ साक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं। डीजीसी ने स्पष्ट किया कि संभल हिंसा की साजिश रचने में शामिल कोई भी आरोपित कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।
उन्होंने कहा कि मामला चाहे जामा मस्जिद के सदर जफर अली का हो या सांसद जियाउर्रहमान बर्क का, अभियोजन पक्ष चरणबद्ध तरीके से कानूनी कार्रवाई कर रहा है। चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई यह सोचता है कि राजनीति में सक्रिय होकर वह बच जाएगा, तो यह उसकी भूल है।
जिन्होंने संभल हिंसा की साजिश रची है, उनमें अगला नंबर जफर अली का होगा। एक-एक करके सभी मुकदमों में साक्ष्य पूरे कराकर दोषियों को सजा दिलाना ही हमारा प्राथमिक लक्ष्य है।
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