Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    संभल हिंसा: ड्रोन-वीडियो फुटेज ने क‍िया खुलासा, जानें पुलिस ने कब, किस हथियार से चलाए कितने राउंड

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 11:43 PM (IST)

    न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 24 नवंबर 2024 को संभल हिंसा के दौरान पुलिस ने न्यूनतम बल का प्रयोग किया, जिसमें चेतावनी फायर और आंसू गैस शामिल थे। ...और पढ़ें

    संभल में हिंसा के दौरान की तस्वीर। जागरण आर्काइव

    संभल में हिंसा के दौरान की तस्वीर। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. चरणबद्ध तरीके से आवश्‍यक न्‍यूतम बल का क‍िया गया प्रयोग

    संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 24 नवंबर 2024 को संभल हिंसा के दौरान पुलिस ने चरणबद्ध तरीके से न्यूनतम आवश्यक बल का प्रयोग किया। प्रभारी निरीक्षक अनुज तोमर ने अपनी नहीं एमएम सर्विस पिस्टल से हवा में दो चेतावनी फायर किए। आरक्षी विकेश कुमार ने एंटी राइट गन से 10 राउंड चलाए।

    आरक्षी सोमवीर ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए टियर गैस गन से 12 सेल दागे। आरक्षी अमृत सिंह ने 12 बोर पंप एक्शन गन से दो चेतावनी फायर, आरक्षी नवीन कुमार ने 12 बोर पंप एक्शन गन से चार चेतावनी फायर, आरक्षी सचिन कुमार ने 12 बोर पंप एक्शन गन से तीन चेतावनी फायर और आरक्षी राजपाल ने 12 बोर पंप एक्शन गन से हवा में दो चेतावनी फायर किए।

    इसके अलावा आरक्षी कपिल कुमार ने टियर गैस गन से एक सेल छोड़ा। रिपोर्ट में उल्लेख है कि यह कार्रवाई भीड़ को नियंत्रित करने, सर्वे टीम, पुलिस बल और मजिस्ट्रेटों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बहाल करने के उद्देश्य से की गई थी। आयोग ने जांच में दर्ज किया कि पुलिस ने घातक हथियारों का प्रयोग नहीं किया और अधिकांश फायर चेतावनी स्वरूप हवा में या दंगा नियंत्रण के लिए किए गए।

    ये डिजिटल साक्ष्य बने आयोग की रिपोर्ट का आधार

    न्यायिक जांच में डिजिटल साक्ष्यों ने आयोग को घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने और निष्कर्ष तक पहुंचने में अहम आधार दिया। आयोग ने घटना के वीडियो, ड्रोन फुटेज, फोटोग्राफ, मीडिया रिकार्डिंग, न्यायालय के वीडियोग्राफर और मंडलायुक्त एवं अन्य अधिकारियों के फोटोग्राफर की रिकार्डिंग, एफएसएल की डिजिटल जांच, बैलिस्टिक रिपोर्ट और क्राइम सीन री-कंस्ट्रक्शन का संयुक्त विश्लेषण किया।

    खबरें और भी

    कई आरोपितों की पहचान वीडियो फुटेज, ड्रोन रिकार्डिंग और तस्वीरों के आधार पर की गई। जांच के दौरान 10 मीडिया कर्मियों के बयान दर्ज किए गए, जबकि कुल 199 गवाहों की गवाही ली गई।

    इनमें पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, मीडिया, मस्जिद इंतजामिया समिति, प्रत्यक्षदर्शी और अन्य संबंधित पक्ष शामिल रहे। कई न्यायिक अभिरक्षा में बंद आरोपितों और गवाहों के बयान वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी दर्ज किए गए। डिजिटल साक्ष्यों का मिलान एफएसएल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, बैलिस्टिक रिपोर्ट और घटनास्थल से किया गया।

    यह भी पढ़ें- संभल हिंसा: मास्टरमाइंड के गुर्गों पर NSA बरकरार, मुकदमों में गवाही पूरी; अब फैसले की ओर केस