पुलिस के पास नहीं होती 32 बोर की पिस्टल, फिर आलम को गोली किसने मारी? संभल हिंसा का अनसुलझा सच
संभल हिंसा में आलम नामक युवक को गोली लगने के मामले में 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का कोर्ट ...और पढ़ें

संभल हिंंसा की फाइल फोटो
HighLights
जांच के दौरान प्रकाश में आया था नाम, उठा सवाल...नाकाबंदी के बाद भी कैसे पहुंचा ठेले वाला
संवाद सहयोगी, जागरण, संभल। जिस युवक आलम को गोली मारकर घायल करने के मामले में एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 20 पुलिस कर्मियों पर एफआइआर दर्ज करने के आदेश न्यायालय द्वारा किए गए हैं। वो युवक संभल हिंसा शामिल था और पुलिस की जांच में उसका नाम प्रकाश में भी आया था। पुलिस का दावा है कि उसकी अभी भी तलाश की जा रही है।
दूसरा सवाल यह भी उठता है कि आखिर हिंसा वाले दिन जब एरिया में नाकाबंदी थी तो फिर वह ठेला लेकर कैसे पहुंच गया। एसआइटी के प्रभारी एवं सीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के मामले में नखासा थाना क्षेत्र के अंजुमन तिराहे के पास रहने वाला आलम भी शामिल था।
उसका नाम अपराध संख्या 333/24 की प्राथमिकी में शामिल है और फिलहाल पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। आलम हिंसा के दौरान सक्रिय रूप से मौजूद था और बाद में उसका नाम जांच में सामने आया। दूसरा सवाल यह भी है कि जब सुबह जामा मस्जिद में एडवोकेट कमिश्नर का सर्वे कार्य चल रहा था।
सर्वे को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। नखासा तिराहा, टंडन तिराहा, डाकखाना रोड, जामा मस्जिद की ओर जाने वाले मार्ग और मनोकामना रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस बल तैनात किया गया था। फिर यह युवक रस्क और बिस्कुल बेचने के लिए अपना ठेले लेकर कैसे वहां पर पहुंच गया? फिर मौके पर कोई ठेला आदि बरामद भी नहीं हुआ था।
अब तक की हुईं जांच में यह बात सामने भी नहीं आई है, फिर कैसे मान लिया जाए कि उसको गोली पुलिस ने मारी है। खास बात यह है कि आलम को जो गोली लगी हैं, वो 32 बोर की हैं। 32 बोर के कारतूस का उपयोग तमंचे, रिवाल्वर और पिस्टल में ही होता है। जबकि पुलिस के पास 32 बोर की सरकारी पिस्टल होती ही नहीं है?
ऐसे बदला था माहौल
सर्वे के दौरान जामा मस्जिद के पीछे वाले मार्गों से लोग अलग-अलग स्थानों पर एकत्र होने लगे। किसी को भी यह आशंका नहीं थी कि हालात अचानक हिंसक हो जाएंगे। चंद मिनटों के भीतर धार्मिक नारेबाजी के साथ स्थिति बेकाबू हो गई और पथराव शुरू हो गया। देखते ही देखते भीड़ में शामिल लोगों ने पुलिस टीम पर पथराव के साथ ही फायरिंग शुरू कर दी थी।
फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू के पैर में पत्थर लगने से वह घायल हो गए थे। वहीं तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी के पैर में गोली लगी थी। इसके अलावा 25 पुलिसकर्मी भी हिंसा में घायल हुए थे।
मामले में पुलिस ने सात अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की थीं। इनमें 3750 अज्ञात और 37 नामजद आरोपियों को चिह्नित किया गया था। पुलिस जांच में सांसद जियाउर्रहमान को आरोपित बनाया गया था। हालांकि उनकी गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से स्टे है।
बहन बोली- पैर में पोलियो के कारण भाग नहीं सका था भाई
हिंसा के दौरान गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए आलम के पिता यामीन ने कोर्ट में 14 फरवरी 2024 को वाद दायर किया गया था। नखासा थाना क्षेत्र के अंजुमन तिराहे के पास रहने वाले यामीन के स्वजन का कहना है कि आलम न तो हिंसा में शामिल था और न ही उसे हालात की जानकारी थी।
वह रोज की तरह पापे (रस्क-बिस्कुट) बेचने निकला था, लेकिन, पोलियो से ग्रस्त होने के कारण भाग नहीं पाया और पुलिस की गोलीबारी का शिकार हो गया। यामीन के सात बेटे और तीन बेटियां हैं। वह वर्षों से रस्क बेचकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। चौथे नंबर का बेटा आलम भी पिता के साथ रस्क बेचने का काम करता था।
रस्क बेचने के लिए निकला था आलम
आलम की बड़ी बहन रजिया ने बताया कि उसका भाई बचपन से पोलियो से ग्रस्त है। जिसके चलते उसके चलने-फिरने में परेशानी रहती है। इसलिए उसने कोई दूसरा काम भी नहीं सीखा था। वह रस्क बेचता था। रजिया ने बताया कि हिंसा वाले दिन भी आलम सुबह करीब छह बजे घर से ठिलिया लेकर रस्क बेचने निकला था। उसे
यह जानकारी नहीं थी कि शहर में बवाल की स्थिति बन चुकी है। जब अचानक हिंसा भड़की तो बाकी लोग जान बचाकर भाग निकले, लेकिन पोलियो होने की वजह से आलम भाग नहीं सका। इसी दौरान पुलिस ने उस पर फायरिंग कर दी। आरोप है कि आलम को तीन गोलियां मारी गईं, जिनमें दो उसकी पीठ में और एक बाईं कोहनी में लगी। गोली लगने के बाद आसपास मौजूद लोगों से स्वजन को जानकारी मिली।
बहन बोली, चरमरा गई घर की आर्थिक स्थिति
आनन-फानन में आलम को इलाज के लिए पहले मुरादाबाद ले जाया गया, वहां से हालत गंभीर होने पर मेरठ रेफर कर दिया गया। बताया कि आलम के तीन आपरेशन हो चुके हैं और डाक्टर चौथे आपरेशन की तैयारी कर रहे हैं। इलाज में लगातार खर्च हो रहा है, जिससे घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। बोली, इस घटना से पहले स्वजन में खुशी का माहौल था।
सबसे बड़ी बहन चांदनी का रिश्ता तय हो चुका था और निकाह की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन आलम के इलाज के चलते निकाह टालना पड़ा। इसमें चांदनी के सभी जेवरात भी बिक गए। इलाज और दवाइयों के खर्च ने परिवार को कर्ज में डुबो दिया है। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। आलम आज भी अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से जूझ रहा है, जबकि हम इंसाफ की आस लगाए बैठे हैं।
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