संभल हिंसा में 'तुर्क बनाम पठान' की पुरानी रार बनी आधार: जांच आयोग की रिपोर्ट में सांसद बर्क और विधायक इकबाल महमूद का जिक्र
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में संभल हिंसा का असली कारण 'तुर्क बनाम पठान' की पुरानी अदावत को बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वित ...और पढ़ें

संभल में हिंसा के दौरान की तस्वीर। जागरण आर्काइव
HighLights
सपा विधायक इकबाल महमूद पठानों की और सांसद जियाउर्रहमान बर्क करते हैं तुर्कों की सियासत
सौरव प्रजापति, संभल। जिले में लंबे समय से तुर्क बनाम पठान की अदावत चलती आ रही है। समय-समय पर दोनों वर्गों के लोग आमने-सामने भी आए हैं क्योंकि दोनों वर्गों की सियासत करने वाले सियासी धुरंधर भी अलग हैं। पठानों की पैरवी सपा विधायक इकबाल महमूद करते हैं और तुर्कों की सियासत सांसद जियाउर्रहमान बर्क करते हैं।
खास बात यह है कि दोनों नेताओं के बीच में लंबे समय से अदावत चली आ रही है लेकिन, 2024 में सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने दोनों को एक करवा दिया था मगर, हिंसा के बाद से फिर से दोनों अलग-अलग छोर पर नजर आते हैं।
ऐसा इसलिए क्योंकि न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि संभल में तुर्क बनाम पठान चलता है। हिंसा के समय पर भी उसका सामना करना पड़ा। उस हिंसा में दोनों वर्गों में भी झड़प हुई और गालियां चलीं।
जांच आयोग ने माना कि तत्कालीन एएसपी श्रीश्चंद, सीओ अनुज चौधरी व इंस्पेक्टर अनुज तोमर और उप निरीक्षक दीपक राठी की गवाही के अनुसार, दिनांक 24 नवंबर 2024 की घटना का एक कारण क्षेत्र में दो समूहों द्वारा प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास था।
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आयोग ने माना है कि तत्कालीन एएसपी का बयान बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बयान में कहा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा के फलस्वरूप वर्तमान सांसद जियाउर्रहमान बर्क एवं उनके स्व. दादा शफीकुर्रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बीच चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंदिता और मुस्लिमों का शुभचिंतक और रहनुमा बनने के लिए बढ़ चढ़कर सक्रिय भागीदारी की जाती है।
हिंसक घटना वाले दिन को भी इसी महत्वाकांक्षा के कारण वर्तमान सांसद जिया-उर-रहमान बर्क एवं विधायक इकबाल महमूद के पुत्र सुहेल इकबाल द्वारा घटना में सक्रिय भूमिका निभाई गयी और लोगों को उद्वेलित किया गया।
रिपोर्ट में उल्लेख है कि संभल जिले में मुसलमानों में दो समूह तुर्क और पठान सक्रिय हैं। जिसमें उनके बीच प्रभुत्व की लड़ाई के लिए एक हिंसक वातावरण बनाया जाता है, जिसे आगे दर्ज मुकदमों व गवाहों के बयान से बल मिलता है।
रिपोर्ट में तुर्कों द्वारा पथराव व फायरिंग का जिक्र
हिंसा में घायल हुए वसीम ने आयोग के समक्ष अपने बयान में कहा कि उसके चाचा नसीम ने एफआइआर दर्ज कराई जो अपराध संख्या -342/2024 धारा 109, 125, 190, 191(2), 191 (3) भारतीय न्याय संहिता के तहत पुलिस स्टेशन कोतवाली संभल में अज्ञात तुर्क समुदाय के खिलाफ दर्ज की गई, वह सही है।
इसमें लिखा है कि दिनांक 24.11.2024 को हमारे घर से कुछ दूर पर स्थित जामा मस्जिद में सरकारी कर्मचारियों द्वारा सर्वे का काम किया जा रहा था, उसी समय शहर के कुछ शरारती व उपद्रवी लोगों ने जामा मस्जिद के आस-पास इकट्ठा होना शुरू कर दिया जिसमें तुर्क बिरादरी के लोग भी थे तथा कुछ उपद्रवियों के द्वारा सर्वे कर रहे लोगों पर पथराव शुरू कर दिया गया।
जब प्रशासन के लोगों ने पथराव कर रहे लोगों के समझाना चाहा तो पथराव कर रही भीड़ में से कुछ तुर्क बिरादरी के लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। अज्ञात तुर्क बिरादरी के उपद्रवियों द्वारा जान से मारने की नीयत से की जा रही फायरिंग में से एक गोली मेरे भतीजे वसीम जो कि अपने घर के दरवाजे पर खड़ा था, को लगी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया, हम लोग घायल वसीम को तुरंत उठाकर डाॅक्टर के पास ले गए।